महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया गया है और इस बार मुकाबला पहले से भी ज्यादा बड़ा होने जा रहा है। गौरतलब है कि यह टूर्नामेंट 12 जून से 5 जुलाई तक इंग्लैंड में खेला जाएगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह महिला टी20 वर्ल्ड कप का 10वां संस्करण है और पहली बार 12 टीमें खिताब के लिए मैदान में उतरेंगी। टूर्नामेंट का उद्घाटन मुकाबला मेजबान इंग्लैड वूमेन टीम और श्रीलंका वूमेन टीम के बीच 12 जून को एजबेस्टन में खेला जाएगा।
बता दें कि पिछले महीने नेपाल में खेले गए क्वालीफायर के जरिए बांग्लादेश, आयरलैंड, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स ने मुख्य टूर्नामेंट में जगह बनाई थी। ये चारों टीमें अब मौजूदा चैंपियन न्यूज़ीलैंड वूमेन टीम, छह बार की विजेता ऑस्ट्रेलिया वूमेन टीम, 2016 की चैंपियन वेस्ट इंडीज वूमेन टीम और वनडे विश्व कप विजेता भारत वूमेन टीम जैसी मजबूत टीमों के साथ मुकाबला करेंगी।
टूर्नामेंट को दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया, भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और नीदरलैंड्स शामिल हैं। वहीं ग्रुप बी में इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, आयरलैंड और स्कॉटलैंड को रखा गया है।
भारतीय टीम का सबसे चर्चित मुकाबला 14 जून को एजबेस्टन में पाकिस्तान के खिलाफ होगा। भारत का सामना 28 जून को लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया से भी होगा, जिसे ग्रुप चरण का बड़ा मैच माना जा रहा है। बता दें कि भारत 25 जून को बांग्लादेश और 21 जून को दक्षिण अफ्रीका से भिड़ेगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार सेमीफाइनल मुकाबले 30 जून और 2 जुलाई को ओवल के मैदान में खेले जाएंगे, जबकि फाइनल 5 जुलाई को ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। महिला क्रिकेट के लिहाज से यह बड़ा क्षण माना जा रहा है, क्योंकि लॉर्ड्स को क्रिकेट का मक्का कहा जाता है।
आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता ने कहा कि शेड्यूल जारी होना टूर्नामेंट की तैयारी का अहम चरण है। उनका कहना है कि महिला क्रिकेट में आईसीसी लगातार निवेश बढ़ा रहा है, चाहे वह भागीदारी हो, पुरस्कार राशि हो या प्रसारण का दायरा। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में महिला क्रिकेट की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है और रिकॉर्ड दर्शक संख्या ने खेल को नई ऊंचाई दी है।
नीदरलैंड्स इस टूर्नामेंट में पहली बार हिस्सा लेगा और अपना पहला मैच बांग्लादेश के खिलाफ खेलेगा। वहीं आयरलैंड और स्कॉटलैंड 13 जून को ओल्ड ट्रैफर्ड में आमने-सामने होंगे।
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह संस्करण प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा और रोमांचक होने की उम्मीद है। 12 टीमों के साथ टूर्नामेंट का विस्तार महिला क्रिकेट के बढ़ते दायरे और लोकप्रियता को दर्शाता है। आने वाले हफ्तों में टीमों की तैयारियां और संयोजन पर खास नजर रहेगी, क्योंकि हर टीम इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरने वाली है।
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नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का 21 फरवरी को समापन हो गया और आयोजकों ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक एआई सम्मेलन बताया। 16 फरवरी से भारत मंडपम में शुरू हुए इस छह दिवसीय आयोजन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, वैश्विक टेक कंपनियों के प्रमुख और हजारों प्रतिनिधि शामिल हुए।
गौरतलब है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत अभी भी अमेरिका और चीन जैसे देशों से पीछे माना जाता है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर सम्मेलन आयोजित करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि समिट के नतीजे मिले-जूले रहे।
सबसे अहम परिणाम ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ रहा, जिसे 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन दिया। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस सहित कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल रहीं। बता दें कि फरवरी 2025 में पेरिस में आयोजित पिछले एआई एक्शन समिट में 61 हस्ताक्षरकर्ता थे, ऐसे में संख्या के लिहाज से यह एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस व्यापक समर्थन को भारत की बड़ी सफलता बताया। मौजूद जानकारी के अनुसार घोषणा-पत्र में सहयोगात्मक, भरोसेमंद और समावेशी एआई के साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह दस्तावेज़ मुख्यतः एक राजनीतिक बयान है। इसमें किसी भी तरह की बाध्यकारी व्यवस्था या अनुपालन तंत्र का प्रावधान नहीं है। अमेरिका की ओर से वरिष्ठ अधिकारी माइकल क्रात्सियोस ने साफ कहा कि वॉशिंगटन वैश्विक एआई गवर्नेंस के विचार को पूरी तरह खारिज करता है और उसका रुख समन्वय से ज्यादा तकनीकी प्रभुत्व पर केंद्रित है।
चीन, जो एआई क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, औपचारिक तौर पर प्रक्रिया का हिस्सा रहा, लेकिन चर्चाओं में उसकी सक्रिय भागीदारी सीमित दिखी। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह घोषणा भविष्य में किसी ठोस वैश्विक ढांचे में बदलेगी या नहीं।
कुल मिलाकर समिट ने भारत को वैश्विक एआई विमर्श में एक ‘कन्वीनिंग पावर’ के रूप में स्थापित जरूर किया है और निवेश प्रतिबद्धताओं के संकेत भी मिले हैं, लेकिन एआई गवर्नेंस के ठोस नियमों और महाशक्तियों के बीच सहमति के बिना आगे का रास्ता अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
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