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India AI Summit: घोषणा-पत्र पर दुनिया एकमत, पर Binding Rules के बिना आगे का रास्ता मुश्किल

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का 21 फरवरी को समापन हो गया और आयोजकों ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक एआई सम्मेलन बताया। 16 फरवरी से भारत मंडपम में शुरू हुए इस छह दिवसीय आयोजन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, वैश्विक टेक कंपनियों के प्रमुख और हजारों प्रतिनिधि शामिल हुए।

गौरतलब है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत अभी भी अमेरिका और चीन जैसे देशों से पीछे माना जाता है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर सम्मेलन आयोजित करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि समिट के नतीजे मिले-जूले रहे।

सबसे अहम परिणाम ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ रहा, जिसे 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन दिया। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस सहित कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल रहीं। बता दें कि फरवरी 2025 में पेरिस में आयोजित पिछले एआई एक्शन समिट में 61 हस्ताक्षरकर्ता थे, ऐसे में संख्या के लिहाज से यह एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस व्यापक समर्थन को भारत की बड़ी सफलता बताया। मौजूद जानकारी के अनुसार घोषणा-पत्र में सहयोगात्मक, भरोसेमंद और समावेशी एआई के साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह दस्तावेज़ मुख्यतः एक राजनीतिक बयान है। इसमें किसी भी तरह की बाध्यकारी व्यवस्था या अनुपालन तंत्र का प्रावधान नहीं है। अमेरिका की ओर से वरिष्ठ अधिकारी माइकल क्रात्सियोस ने साफ कहा कि वॉशिंगटन वैश्विक एआई गवर्नेंस के विचार को पूरी तरह खारिज करता है और उसका रुख समन्वय से ज्यादा तकनीकी प्रभुत्व पर केंद्रित है।

चीन, जो एआई क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, औपचारिक तौर पर प्रक्रिया का हिस्सा रहा, लेकिन चर्चाओं में उसकी सक्रिय भागीदारी सीमित दिखी। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह घोषणा भविष्य में किसी ठोस वैश्विक ढांचे में बदलेगी या नहीं।

कुल मिलाकर समिट ने भारत को वैश्विक एआई विमर्श में एक ‘कन्वीनिंग पावर’ के रूप में स्थापित जरूर किया है और निवेश प्रतिबद्धताओं के संकेत भी मिले हैं, लेकिन एआई गवर्नेंस के ठोस नियमों और महाशक्तियों के बीच सहमति के बिना आगे का रास्ता अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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Infosys-TCS में 6% तक की बड़ी गिरावट, AI की टेंशन ने डुबोया IT Sector, Sensex भी क्रैश।

मंगलवार सुबह दलाल स्ट्रीट पर माहौल कुछ ठीक नहीं दिखा और कारोबार के साथ ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ने लगा। दिन के अंत तक बिकवाली और तेज हो गई। बीएसई सेंसेक्स 1,068.74 अंक गिरकर 82,225.92 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 288.35 अंक टूटकर 25,424.65 पर आ गया।

बता दें कि गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में तेज बिकवाली रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में ही करीब 5 प्रतिशत फिसल गया। इसका सीधा मतलब यह है कि अधिकांश बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर एक साथ टूटे और उन्होंने पूरे बाजार को नीचे खींच लिया।

मौजूद जानकारी के अनुसार इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएलटेक, टेक महिंद्रा और विप्रो समेत कई दिग्गज शेयर गहरे लाल निशान में बंद हुए। एलटीआईमाइंडट्री में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टेक महिंद्रा और एचसीएलटेक भी 5 से 6 प्रतिशत तक टूटे। इंफोसिस और टीसीएस जैसे बड़े शेयरों में भी लगभग 3 से 4 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।

गौरतलब है कि निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। हाल ही में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रॉपिक ने ऐसे उन्नत टूल पेश किए हैं जो कोडिंग, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा प्रोसेसिंग जैसे काम स्वतः कर सकते हैं। ये वही सेवाएं हैं जिनसे भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक बाजार में बड़ा कारोबार करती हैं। ऐसे में आशंका है कि भविष्य में मांग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक टेक शेयरों में कमजोरी व्यापक ट्रेंड का हिस्सा है और अमेरिकी बाजार में सूचीबद्ध भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर में भी दबाव दिख रहा है।

वैश्विक संकेतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए टैरिफ संकेत दिए जाने के बाद वहां के बाजारों में गिरावट आई। बता दें कि टैरिफ यानी आयात शुल्क में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ता है और कंपनियां निवेश फैसलों को टाल सकती हैं। यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिका के साथ एक प्रमुख व्यापार समझौते को रोकने की खबर ने भी अनिश्चितता बढ़ाई।

हालांकि टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एशियन पेंट्स और एक्सिस बैंक जैसे कुछ गैर-आईटी शेयरों में हल्की मजबूती दिखी, लेकिन वे आईटी सेक्टर की बड़ी गिरावट की भरपाई नहीं कर सके।

विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक हाल के हफ्तों में भारतीय बाजार में खरीदार जरूर रहे हैं, लेकिन उनका फोकस पूंजीगत सामान और वित्तीय शेयरों पर अधिक है। आईटी सेक्टर में वे अब भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।

तकनीकी स्तर पर विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,500–25,450 का दायरा अहम सपोर्ट है। इसके नीचे फिसलने पर 25,300 तक गिरावट संभव है, जबकि ऊपर की ओर 25,650–25,750 पर रुकावट देखने को मिल सकती है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत स्थिर दिखा और 60,900 के ऊपर बने रहने पर व्यापक रुझान सकारात्मक माना जा सकता है।

कुल मिलाकर आईटी सेक्टर में तेज बिकवाली, एआई को लेकर बढ़ती आशंका और वैश्विक व्यापार तनाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है और निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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  Sports

T20 World Cup में हैरी ब्रूक ने रचा इतिहास, पाकिस्तान के खिलाफ शतक जड़कर किए 3 कारनामे

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