IND vs ZIM: जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले अचानक टीम इंडिया का साथ छोड़ घर लौटे रिंकू सिंह, जानें वजह
Rinku Singh: भारतीय टीम को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में अपना दूसरा मैच जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलना है. यह मुकाबला 26 फरवरी को चेन्नई में खेला जाएगा. इससे पहले टीम इंडिया के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक रिंकू सिंह वापस अपने घर लौट आए हैं. उनके लौटने की वजह फैमली इमरजेंसी बताई जा रही है.
रिंकू सिंह सुपर-8 मैचों के बीच टीम इंडिया का साथ छोड़ लौटे घर
रिंकू सिंह जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से ठीक एक दिन पहले टीम इंडिया की प्रैक्टिस सेशन में शामिल नहीं हुए. रिपोर्ट्स के मुताबिक वो घर लौटे हैं. बताया जा रहा है कि रिंकू सिंह के पिता की तबीयत ठीक नहीं है. इसी वजह से वो वापस घर लौटे हैं. हालांकि उम्मीद की जा रही है कि रिंकू जल्द ही टीम इंडिया के साथ जुड़ेंगे. अब देखने वाली बात है कि रिंकू टीम में वापसी कब करते हैं.
???? UPDATE ON RINKU SINGH ????
— Johns. (@CricCrazyJohns) February 24, 2026
- Rinku has gone back home for family emergency. [Kushan Sarkar]
He is not attending the practice session today. pic.twitter.com/NYHesDpq2a
???? RINKU SINGH'S FATHER NOT WELL ????
— Bigg boss (@BIGG_BOSS_GK) February 24, 2026
- Rinku Singh is not part of the practice session due to a family emergency. His father is not well. He is expected to join team soon.
- Pray for Rinku's father ???? pic.twitter.com/i0LGUO6Az1
रिंकू सिंह टीम इंडिया के लिए अहम प्लेयर
रिंकू सिंह को टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया के हर मैच की प्लेइंग 11 में शामिल किया जा रहा है. वो सबसे नीचले क्रम में तेजी से रन बनाने के लिए जाने जाते हैं. रिंकू एक अच्छे फिनिशर हैं. यही वजह है कि उन्हें हर मैच की प्लेइंग 11 में मौका मिल रहा है. सुपर-8 के पहले मैच में टीम इंडिया को साउथ अफ्रीका के खिलाफ 76 रनों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद टीम इंडिया की नेट रन रेट भी काफी खराब हो गया है. ऐसे में भारत के बचे दोनों मैच काफी अहम है.
यह भी पढ़ें: ENG vs PAK: साहिबजादा फरहान ने इंग्लैंड के खिलाफ लगाई फिफ्टी, बड़े स्कोर की ओर पाकिस्तान
US-Iran Tension: युद्ध की आहट के बीच इजरायल क्यों जा रहे पीएम मोदी? क्या है इस यात्रा के एजेंडे?
US-Iran Tension: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल के दौरे पर जा रहे हैं. यह यात्रा बेंजामिन नेतन्याहू के आमंत्रण पर हो रही है और कई मायनों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुए गाजा संघर्ष के पश्चात यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली इजरायल यात्रा होगी.
यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि 2017 में दोनों देशों के रिश्तों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था. उस ऐतिहासिक यात्रा के बाद अब क्षेत्रीय हालात पूरी तरह बदल चुके हैं, जिससे इस बार की वार्ता का महत्व और बढ़ गया है.
वॉर जोन में क्यों एंट्री ले रहे पीएम मोदी?
इस यात्रा की एक और खासियत है वह यह कि अमेरिकी युद्धपोत अपनी पोजिशन ले चुके हैं. पूरे क्षेत्र को वॉर जोन माना जा रहा है. किसी भी वक्त जंग छिड़ सकती है. ऐसे में दुनियाभर के नेता इस इलाके से दूरी बना रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी ऐसे वक्त पर 25 फरवरी को इजरायल पहुंच रहे हैं. जबकि ये यात्रा पहले तीन बार टल चुकी है. लेकिन आखिरकार पीएम मोदी ने साहस दिखाते हुए खुद इजरायल जाने का तय किया. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि भारत ने ऐसे वक्त पर अपनी लाल रेखा ही खींच दी है.
क्या है भारत की सोच
डर के इस माहौल में जब कई देश युद्ध जोन से दूरी बना रहे हैं भारत के प्रधानमंत्री का वहां मौजूद होना और इसके साथ ही इजरायल की संसद को संबोधित करना भी ये बताता है कि भारत क्षेत्रीय अस्थिरता में किसी से डरने वाला नहीं है. न ही किसी दबाव में पीछे हटने वाला है. इस एक मौजूदगी से भारत ने एक दो नहीं कई निशाने साध लिए हैं. सबसे अहम पाकिस्तान और तुर्की जैसे दुश्मन देशों को अपने तेवर दिखा देना कि भारत किसका नाम है और दूसरा ईरान जैसे दोस्त देश को भी भरोसा दिलाना कि जरूरत पड़ने पर भारत साथ खड़ा हो सकता है.
नेतन्याहू को मिलेगा बड़ा सपोर्ट
नेतन्याहू के लिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा काफी बड़े फायदे का सौदा साबित होने वाला है. क्योंकि हमास से युद्ध के बाद इजरायल में हालात बहुत अच्छे नहीं हैं. नेतन्याहू सरकार को देश में ही विरोध का सामाना भी करना पड़ रहा है. ऐसे में पीएम मोदी की मौजूदगी दोनों देशों के बीच अहम समझौते नेतन्याहू को अपनी छवि सुधारने का बड़ा मौका देते हैं. घरेलू पिच पर वह एक बार फिर अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं.
रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की व्यापक समीक्षा करेंगे. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी.
प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से भी मुलाकात करेंगे. माना जा रहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, गाजा की स्थिति और व्यापक वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श होगा.
रक्षा और सुरक्षा पर विशेष फोकस
भारत और इजरायल के संबंधों की रीढ़ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग रहा है. पिछले एक दशक में भारत इजरायल से रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक रहा है. ड्रोन तकनीक, मिसाइल सिस्टम, निगरानी उपकरण और सीमा सुरक्षा समाधान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरा तालमेल है.
सूत्रों का मानना है कि इस दौरे में रक्षा उत्पादन में संयुक्त निवेश, तकनीक हस्तांतरण और खुफिया सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सहमति बन सकती है. क्षेत्रीय अस्थिरता के मद्देनज़र आतंकवाद विरोधी सहयोग भी एजेंडे में रहेगा.
संतुलित कूटनीति की परीक्षा
भारत ने 7 अक्टूबर के हमले की निंदा की थी, लेकिन साथ ही ‘दो-राष्ट्र समाधान’ के अपने पुराने रुख को भी दोहराया है. नई दिल्ली की नीति इजरायल और फिलिस्तीन के साथ संबंधों को अलग-अलग आधार पर आगे बढ़ाने की रही है.
माना जा रहा है कि यह दौरा भारत की उसी संतुलित कूटनीति को मजबूत करने का प्रयास होगा. साथ ही, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) जैसे बहुपक्षीय प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हो सकती है.
घरेलू राजनीति और वैश्विक संकेत
प्रधानमंत्री मोदी के इजरायली संसद ‘नेसेट’ को संभावित संबोधन को ऐतिहासिक माना जा रहा है. हालांकि, वहां की आंतरिक राजनीति और न्यायिक सुधार को लेकर चल रहे विवाद इस यात्रा की पृष्ठभूमि को जटिल बना रहे हैं.
कुल मिलाकर, यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत की रणनीतिक और संतुलित विदेश नीति का महत्वपूर्ण संकेत भी माना जा रहा है.
यह भी पढ़ें - पीएम मोदी की इजरायल यात्रा, संसद में संबोधन से इतिहास रचने तक, यहां जानें पूरा शेड्यूल
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation























