नेपाल में आचार संहिता का उल्लंघन, कार्रवाई नहीं करने पर भड़की एनईओसी
नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल में 5 मार्च को चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव से पहले देश में सियासी हलचल तेज हो गई है। नेपाल के निर्वाचन आयोग ने आचार संहिता को लेकर लगभग एक महीने की रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के आधार पर नेपाल की इलेक्शन ऑब्जर्वेशन कमेटी (एनईओसी) ने चुनाव आयोग को कार्रवाई की चेतावनी दी है।
नेपाल के चुनाव आयोग ने 19 जनवरी को 5 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए लक्षित आचार संहिता लागू की। आचार संहिता लागू करने से पहले इस संबंध में चुनाव में भाग लेने वाली राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग दौर की चर्चाएं की गईं। इसके अलावा आम जनता से भी सुझाव आमंत्रित किए गए थे। बाद में इसे लागू किया गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 19 जनवरी से अब तक सैकड़ों शिकायतें की गई हैं, जिनमें से 79 में स्पष्टीकरण दिए गए और कोई एक्शन नहीं हुआ। यह इलेक्शन कमीशन का एक महीने का रिपोर्ट कार्ड है।
आचार संहिता लागू होने के 35 दिन बाद भी, कमीशन ने इलेक्शन के नियमों को तोड़ने में कथित तौर पर शामिल लोगों से स्पष्टीकरण मांगने के अलावा कुछ नहीं किया है।
नेपाली मीडिया काठमांडू पोस्ट ने बताया कि कमीशन ने लोगों और संस्थानों से लिखकर सफाई मांगने के लिए 79 पत्र जारी किए हैं, जिनमें से नौ लोगों और संस्थाओं को दो बार स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया। इन नौ लोगों और संस्थाओं के ऊपर एक से ज्यादा बार आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतें आई थीं।
उदाहरण के लिए, धाडिंग-1 से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की उम्मीदवार आशिका तमांग से सबसे पहले एक स्कूल में चुनावी कैंपेन करने के लिए स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था। दस दिन बाद, उन पर आरोप है कि वे कैंपेन में स्कूली बच्चों का इस्तेमाल कर रही थीं और कमीशन ने एक और सफाई मांगी। कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों बार उनकी सफाई ठीक नहीं है। उनसे फिर से सफाई मांगी गई है।
चुनाव ऑब्जर्वेशन कमेटी के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण सिवाकोटी ने कहा, यह कहना गलत है कि घटनाओं की संख्या कम हो गई है। पहले, वे फिजिकल तौर पर ज्यादा होती थीं, और अब वे सोशल मीडिया पर आ गई हैं, जो और भी खतरनाक है। सारा नुकसान हो जाने के बाद एक्शन लेने का कोई मतलब नहीं है। कमीशन को चुनाव से पहले कुछ खास मामलों में सजा देने वाली कार्रवाई करनी होगी।
नेपाल की इलेक्शन ऑब्जर्वेशन कमेटी (एनईओसी) के चेयरमैन कृष्ण सुबेदी ने कहा कि कोड तोड़ने की संख्या में कमी दूसरे मामलों में एक्शन न लेने का बहाना नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, हम कुछ दिन इंतजार करेंगे। अगर कमीशन एक्शन लेने की अपनी ड्यूटी से गायब रहता है, तो हम सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग करेंगे।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत के साथ संबंध मजबूत करने को लेकर उत्सुक हूं : जापानी विदेश मंत्री मोटेगी
टोक्यो, 24 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी को उनके पद पर दोबारा नियुक्ति की बधाई दी। वहीं, जापान के विदेश मंत्री ने ईएएम जयशंकर के बधाई संदेश के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक (एफआईओपी) को साकार करने के लिए उत्सुक हैं।
जापान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी का धन्यवाद संदेश साझा किया।
बयान में लिखा था, मेरी दोबारा नियुक्ति पर आपके बधाई संदेश के लिए आपका धन्यवाद। मैं द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफआईओपी) को साकार करने के लिए आपके साथ लगातार काम करने के लिए उत्सुक हूं।
भारत के विदेश मंत्री ने मोटेगी के लिए बधाई संदेश में लिखा था, जापान के विदेश मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति पर विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी को बधाई। हमारी खास रणनीति और वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।
इससे पहले, 8 फरवरी को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रतिनिधि सभा के चुनाव में जीत पर सनाए ताकाइची को बधाई दी थी। अपने संदेश में पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि वह और ताकाइची भारत और जापान की दोस्ती को और ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
इसके जवाब में ताकाइची ने एक्स पर पोस्ट किया, प्रतिनिधि सभा के चुनाव पर आपकी हार्दिक बधाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मैं जापान और भारत के बीच स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप को मजबूत करने और एक फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) को साकार करने में सहयोग करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करना जारी रखने के लिए उत्सुक हूं।
बता दें, भारत और जापान के बीच का मंत्रीपूर्ण संबंध काफी पुराना है। दोनों देशों के बीच के संबंध, रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद गहरे और मजबूत हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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