भारत में ग्लोबल अवेयरनेस कैंपेन लॉन्च, सड़क सुरक्षा पर मिलकर काम करने की अपील
नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सड़क सुरक्षा के खास दूत जीन टॉड ने रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने के लिए एक ग्लोबल अवेयरनेस कैंपेन मेक ए सेफ्टी स्टेटमेंट भारत में लॉन्च किया। इसमें अलग-अलग हस्तियां सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रोजाना के उपायों को प्रमोट करते हुए नजर आएंगी।
इन बयानों वाले डिजिटल बिलबोर्ड और पोस्टर भारत के चार शहरों, नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बैंगलोर में दिखाई देंगे। इसका मकसद अलग-अलग क्षेत्र के नेताओं को सड़क सुरक्षा में समर्थन करने की अहमियत को उजागर करना है। कैंपेन को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया जाएगा।
पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कैंपेन का समर्थन करते हुए एक वीडियो जारी किया। वह सड़क सुरक्षा के लिए ग्लोबल चैंपियंस के तौर पर चुनी गई हस्तियों और स्पोर्टिंग चैंपियंस के समूह में शामिल हुए।
जीन टॉड ने कहा, “सड़क हादसे दुनियाभर में एक साइलेंट महामारी हैं और भारत में इसकी वजह से हर साल हजारों जानें जा रही हैं। इससे देशभर के परिवार और समुदाय पर गहरा असर पड़ रहा है। एक ऐसे देश में जहां मोबिलिटी तेजी से बढ़ रही है, सड़क सुरक्षा पर मिलकर काम करने से सड़कों पर पीड़ितों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।”
दूत का भारत का यह दौरा माराकेश डिक्लेरेशन के 11 महीने बाद हो रहा है, जहां यूएन सदस्यों ने सड़क सुरक्षा के लिए एक्शन में तेजी लाने पर सहमति जताई थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या को आधा करना था।
भारत में सड़क दुर्घटना एक बड़ी पब्लिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, जिससे हर साल लगभग 153,972 लोगों की जान जाती है और मृत्यु दर 15.4 प्रति 100,000 है। पैदल चलने वाले, साइकिल चलाने वाले और मोटरसाइकिल चलाने वाले खास तौर पर कमजोर होते हैं और मौतों का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं का होता है।
यूएन ने संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा फंड (यूएनएसआरएफ) से फंडेड एक प्रोजेक्ट भी लॉन्च किया। ‘भारत में रोड सेफ्टी के लिए सस्टेनेबल फाइनेंसिंग: एक कोलैबोरेटिव अप्रोच’ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग एशिया और प्रशांत (यूएनईएससीएपी) के तकनीकी समर्थन से लागू किया गया है। इसका मकसद पूरे भारत में रोड सेफ्टी को मजबूत करना है।
भारत में यह प्रोजेक्ट यूएन रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ऑफिस के साथ तालमेल बैठाकर राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम राज्यों के साथ पार्टनरशिप में लागू किया जा रहा है। यह पहल एक समन्वित और टिकाऊ सड़क सुरक्षा वित्तपोषण ढांचा बनाने, सड़क सुरक्षा एक्शन प्लान को असरदार तरीके से लागू करने के लिए क्षमता बनाने और सड़क पर होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने पर फोकस करती है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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नोएडा इंजीनियर युवराज मौत मामले में दाखिल हुई नई याचिका, 17 मार्च को होगी सुनवाई, इलाहाबाद HC ने मांगा जवाब
नोएडा में बार-बार सामने आ रही गंभीर घटनाओं को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 तय की है और साफ किया है कि अगली तारीख तक उठाए गए ठोस कदमों की जानकारी अदालत में पेश की जाए.
अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब शहर में सार्वजनिक सुरक्षा, निर्माण मानकों और आपदा प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
जनहित याचिका में क्या है मांग?
याचिकाकर्ता हिमांशु जायसवाल की ओर से दायर पीआईएल में नोएडा क्षेत्र में घटित आवर्ती घटनाओं का हवाला देते हुए प्रभावी रोकथाम तंत्र की मांग की गई है. याचिका में सार्वजनिक सुरक्षा, संरचनात्मक जोखिम और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की अपील की गई है.
सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्य सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसल ने अदालत से काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय मांगा. अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक प्रस्तावित सुधारात्मक कदमों का स्पष्ट खाका पेश किया जाए.
याचिका में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस आयुक्त, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) को भी पक्षकार बनाया गया है. इससे स्पष्ट है कि मामला बहु-एजेंसी समन्वय से जुड़ा है.
बेसमेंट हादसा बना याचिका की वजह
यह जनहित याचिका 16 जनवरी को सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे के बाद दायर की गई. इस घटना में युवराज नामक युवक की मौत बेसमेंट में भरे पानी में डूबने से हो गई थी. बताया गया कि प्लॉट एससी-02 ए-3 के बेसमेंट में जलभराव था, जिससे वह बाहर नहीं निकल सका.
इस हादसे ने नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. स्थानीय निवासियों ने भी निर्माण स्थलों की निगरानी और सुरक्षा मानकों पर लापरवाही के आरोप लगाए थे.
एसआईटी जांच और अब तक की कार्रवाई
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. पांच दिनों की जांच और 150 से अधिक लोगों के बयान दर्ज करने के बाद एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है.
अब तक की कार्रवाई में नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ लोकेश एम और एक जूनियर इंजीनियर को पद से हटाया गया है. हालांकि व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय करने और दीर्घकालिक सुधारात्मक उपायों को लेकर अभी तक कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया है.
अदालत की सख्ती के बाद अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां नोएडा में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर क्या ठोस योजना पेश करती हैं.
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