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Putin की शर्तों के आगे नहीं झुकेगा Ukraine, President Zelensky का Peace Talks पर बड़ा ऐलान

यूक्रेन पर रूस के बड़े हमले की चौथी बरसी है। यूक्रेन के प्रेसिडेंट वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने माना कि सालों की लड़ाई के बाद उनके देश के लोग थक चुके हैं, लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रूस की मांगें मानना ​​कोई ऑप्शन नहीं है। सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की सॉवरेनिटी से समझौता करने वाली कोई भी डील का मतलब असल में देश को पूरी तरह से खोना होगा। उन्होंने माना कि देश इस लड़ाई से थक चुका है, जो अब अपने पांचवें साल में है, लेकिन उन्होंने ज़ोर दिया कि उनके लिए सरेंडर करना अभी भी मुमकिन नहीं है। 

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यूक्रेन के प्रेसिडेंट ने व्लादिमीर पुतिन की भी बुराई की, उन्हें युद्ध के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि इसके चलते जो अफ़रा-तफ़री मची है, वह एक ही आदमी के इर्द-गिर्द घूमती है। ज़ेलेंस्की ने आगे रूस के ख़िलाफ़ यूक्रेन की लड़ाई में इंटरनेशनल सपोर्ट की अपील की, डोनाल्ड ट्रंप से पर्सनली बात की और कहा कि रूस का मुकाबला करने में यूनाइटेड स्टेट्स अहम रोल निभा सकता है।

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बड़ी असहमतियों की वजह से शांति बातचीत रुकी

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन में युद्ध खत्म करने की अपील की है और जल्द हल का वादा किया है। हालांकि, दोनों तरफ़ से अलग-अलग मांगों की वजह से झगड़े में बीच-बचाव की कोशिशों में बड़ी रुकावटें आ रही हैं। रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने शांति के लिए कई शर्तें रखी हैं। वह चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेट्स्क इलाके के उन हिस्सों से अपनी सेना हटाए जो अभी भी यूक्रेन के कंट्रोल में हैं, अपने नाटो मेंबरशिप प्लान को छोड़ दे, अपनी मिलिट्री कैपेबिलिटी कम करे और रूसी भाषा को ऑफिशियल स्टेटस दे। कीव ने इन मांगों को पूरी तरह से मना कर दिया है। रूस ने इशारा किया है कि वह भविष्य में यूक्रेन के यूरोपियन यूनियन में शामिल होने का विरोध नहीं करेगा। साथ ही, उसने समझौते के हिस्से के तौर पर यूक्रेन में यूरोपियन पीसकीपर्स को भेजे जाने के विचार का भी कड़ा विरोध किया है। यूक्रेनी प्रेसिडेंट वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने मौजूदा फ्रंटलाइन पर सीज़फ़ायर की मांग की है। हालांकि, पुतिन का कहना है कि टेम्पररी ट्रूस मंज़ूर नहीं है, और वह एक पूरे शांति समझौते की मांग करते हैं जिसमें उनकी सभी शर्तें शामिल हों।

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दुनिया पर मंडराया परमाणु युद्ध का साया! अमेरिका का खुलासा! China ने गुप्त रूप से तैयार किया हथियारों का जखीरा

दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों, अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार समझौता (New START) समाप्त होने के साथ ही वैश्विक सुरक्षा पर संकट के बादल गहरा गए हैं। सोमवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री क्रिस्टोफर यिआव ने चीन और रूस को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अमेरिकी शस्त्र नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के प्रमुख क्रिस्टोफर यिआव ने जानकारी साझा की कि लगभग छह साल पहले चीन ने एक गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने दुनिया को अंधेरे में रखकर अपने परमाणु भंडार में अभूतपूर्व और सुनियोजित विस्तार किया है।

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इस महीने अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार समझौते की समाप्ति के बाद यिआव ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक संस्था के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस समझौते की अवधि खत्म होने से दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के हथियारों पर लगी सीमाएं समाप्त हो गई हैं। यिआव ने चीन से अधिक पारदर्शिता की मांग की और ‘न्यू स्टार्ट’ संधि की कुछ कमियों की ओर इशारा करते हुए उदाहरण दिया कि इसमें रूस के गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों के विशाल भंडार का कोई समाधान नहीं किया गया।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन में कहा, “लेकिन शायद इसकी सबसे बड़ी कमी यह थी कि ‘न्यू स्टार्ट’ संधि ने चीन द्वारा अभूतपूर्व, सुनियोजित और गुप्त रूप से तैयार किए गए परमाणु हथियारों को ध्यान में नहीं रखा।” यिआव ने कहा कि चीन ने “जानबूझकर और बेरोक-टोक अपने परमाणु हथियार भंडार में भारी विस्तार किया,” जबकि उसने ऐसा न करने का आश्वासन दिया था।

उन्होंने चीन के “लक्ष्य” या उद्देश्यों के बारे में पारदर्शिता की कमी पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि चीन अगले चार या पांच साल में बराबरी हासिल कर सकता है।” यिआव ने सोमवार को जिनेवा में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और मंगलवार को चीनी और अन्य प्रतिनिधिमंडलों से मिलने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारी पहले ही अपने साझेदारों के साथ कई दौर की बैठक कर चुके हैं जिसमें परमाणु हथियार रखने वाले फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं।

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जिनेवा में कूटनीतिक हलचल

परमाणु हथियारों पर लगी सीमाएं समाप्त होने के बाद अब अमेरिका सक्रिय हो गया है।

रूसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात: यिआव ने सोमवार को रूसी अधिकारियों से मुलाकात कर स्थिति की गंभीरता पर चर्चा की।

चीन से वार्ता: मंगलवार को अमेरिकी अधिकारी चीनी प्रतिनिधिमंडल से मिलने वाले हैं, जहाँ पारदर्शिता की मांग की जाएगी।

वैश्विक गठबंधन: अमेरिका पहले ही ब्रिटेन और फ्रांस जैसे परमाणु संपन्न देशों के साथ कई दौर की बैठकें कर चुका है ताकि एक नया वैश्विक सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सके। 

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