भारत में कब आएगी बुलेट ट्रेन? क्यों हो रही देरी?...रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिए सभी सवालों के जवाब
भारत में बुलेट ट्रेन आने वाली है…यह सुनते-सुनते वर्षों बीत गए लेकिन बुलेट ट्रेन अब तक शुरू नहीं हो सकी. अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देरी की वजहों और आगे की समयसीमा की जानकारी दी. बता दें, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश की सबसे महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं में शामिल है. शुरुआत में 2026 के आसपास इसे शुरू करने का लक्ष्य था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसकी समयसीमा आगे बढ़ गई.
वैष्णव ने बताई देरी की वजह
रेल मंत्री ने बताया कि 2017 में प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ. फिर करीब ढाई साल का वक्त डिजाइन तैयार करने में लगा. इसके बाद फिर कोरोना आ गया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण में हुई देरी का असर वर्ष 2021 तक परियोजना पर पड़ा. बाद में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आई और परियोजना के लिए आवश्यक जमीन हासिल कर हुई. सरकार अब इस कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है. इसके अलावा, समुद्र के नीचे सुरंग बनाने जैसे जटिल इंजीनियरिंग कार्यों और विभिन्न निर्माण चरणों को पूरा करना भी इस परियोजना में हुई देरी की एक वजह है.
यह कॉरिडोर सामान्य रेल परियोजना की तुलना में अधिक तकनीकी जटिलता वाला है. इसमें सिविल निर्माण, ट्रैक बिछाने, बिजली व्यवस्था, सिग्नलिंग, दूरसंचार और हाई-स्पीड ट्रेन सेट की आपूर्ति जैसे कई कार्यों का एक साथ समन्वय जरूरी है. इसी वजह से परियोजना की अंतिम समयसीमा तय करने में सभी महत्वपूर्ण कामों की प्रगति को ध्यान में रखना पड़ता है.
जापानी मंत्री भारत में हो रहे काम से संतुष्ट
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हम जापान के साथ कई काम कर चुके हैं. हमारे रणनीतिक संबंध हैं. हाल ही में जापान के मंत्री आए थे तो वह स्पीड से संतुष्ट थे. उनका कहना था कि हमने दुनिया में कहीं भी काम की इतनी गति नहीं देखी. इसके अलावा यहां काम करने वाले कुछ जापानी इंजीनियरों का भी कहना है कि हमने इतना तकनीक का प्रयोग नहीं देखा.
2027 में ट्रैक पर परीक्षण की तैयारी
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत में निर्मित बुलेट ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम तैयार हो चुका है और उसे परीक्षण के लिए भेजा गया है. ट्रेन को मई या जून 2027 तक ट्रैक पर टेस्टिंग के लिए लाने की प्लानिंग है. टेस्टिंग पीरियड करीब दो से चार महीने हो सकती है, जिसके बाद देश की पहली बुलेट ट्रेन का उद्घाटन किया जाएगा.
508 किलोमीटर लंबा होगा मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर
बता दें, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 508 किलोमीटर है. यह महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा. योजना के अनुसार, इस मार्ग पर मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती सहित 12 स्टेशन होंगे.
परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये है. इसमें जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) से लगभग 81 प्रतिशत वित्तीय सहायता मिलने की व्यवस्था है, जबकि शेष राशि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के योगदान से जुटाई जानी है.
आरबीआई का लक्ष्य रुपए में स्थिरता लाना, किसी एक स्तर की रक्षा करने पर फोकस नहीं: संजय मल्होत्रा
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक डॉलर के मुकाबले रुपए के किसी एक स्तर की रक्षा करने पर फोकस नहीं कर रहा है, बल्कि हमारा प्राथमिक लक्ष्य विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिरता लाना है।
राष्ट्रीय राजधानी में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई मुद्रा बाजार में तभी हस्तक्षेप करता है जब सट्टेबाजी की गतिविधियों या भारी उतार-चढ़ाव से निपटने की जरूरत हो।
उन्होंने कहा, हम रुपए के लिए किसी खास कीमत या स्तर को लक्ष्य नहीं बनाते हैं, लेकिन साथ ही हमारी कोशिश यह रहती है कि विदेशी मुद्रा बाजारों में स्थिति व्यवस्थित बनी रहे।
जैसा कि आपने पहले भी देखा है, अगर हमें लगता है कि बाजार में सट्टेबाजी हो रही है या बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव है, तो हम जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटते।
उनका यह बयान डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल को लेकर चल रही तेज बहस के बीच आई है। हाल के हफ्तों में, भारतीय मुद्रा अपने अब तक के सबसे निचले स्तर करीब 97 रुपए प्रति डॉलर के करीब पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।
रुपया लगातार आठ सत्रों तक मजबूत हुआ और चार महीनों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसके बाद गुरुवार को इसमें थोड़ी नरमी आई और यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 94.83 रुपए पर आ गया।
पिछले कुछ वर्षों में रुपए की गिरावट एक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है, जिसमें विपक्षी दल इस कमजोरी को आर्थिक दबाव के संकेत के रूप में पेश कर रहे हैं।
एक दशक पहले, अक्टूबर 2016 में, रुपया प्रति डॉलर लगभग 66.83 रुपए पर कारोबार कर रहा था। इसका मतलब यह है कि इस अवधि के दौरान अमेरिकी मुद्रा की कीमत में लगभग 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
हालांकि, आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, भारत के व्यापक आर्थिक आधार मजबूत बने हुए हैं। देश की हालिया 7.8 प्रतिशत की जीडीपी विकास दर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रमुख आर्थिक संकेतक अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को दर्शाते हैं।
आरबीआई गवर्नर ने महंगाई को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कीमतों का मौजूदा दबाव अधिक तो है, लेकिन यह अभी भी केंद्रीय बैंक की सहन-सीमा (टॉलरेंस बैंड) के भीतर है।
उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की औसत महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रही है, जो उससे पहले के चार वर्षों में दर्ज की गई 7.4 प्रतिशत की औसत दर से काफी कम है।
--आईएएनएस
एबीएस
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