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आरबीआई का लक्ष्य रुपए में स्थिरता लाना, किसी एक स्तर की रक्षा करने पर फोकस नहीं: संजय मल्होत्रा

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक डॉलर के मुकाबले रुपए के किसी एक स्तर की रक्षा करने पर फोकस नहीं कर रहा है, बल्कि हमारा प्राथमिक लक्ष्य विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिरता लाना है।

राष्ट्रीय राजधानी में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई मुद्रा बाजार में तभी हस्तक्षेप करता है जब सट्टेबाजी की गतिविधियों या भारी उतार-चढ़ाव से निपटने की जरूरत हो।

उन्होंने कहा, हम रुपए के लिए किसी खास कीमत या स्तर को लक्ष्य नहीं बनाते हैं, लेकिन साथ ही हमारी कोशिश यह रहती है कि विदेशी मुद्रा बाजारों में स्थिति व्यवस्थित बनी रहे।

जैसा कि आपने पहले भी देखा है, अगर हमें लगता है कि बाजार में सट्टेबाजी हो रही है या बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव है, तो हम जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटते।

उनका यह बयान डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल को लेकर चल रही तेज बहस के बीच आई है। हाल के हफ्तों में, भारतीय मुद्रा अपने अब तक के सबसे निचले स्तर करीब 97 रुपए प्रति डॉलर के करीब पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।

रुपया लगातार आठ सत्रों तक मजबूत हुआ और चार महीनों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसके बाद गुरुवार को इसमें थोड़ी नरमी आई और यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 94.83 रुपए पर आ गया।

पिछले कुछ वर्षों में रुपए की गिरावट एक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है, जिसमें विपक्षी दल इस कमजोरी को आर्थिक दबाव के संकेत के रूप में पेश कर रहे हैं।

एक दशक पहले, अक्टूबर 2016 में, रुपया प्रति डॉलर लगभग 66.83 रुपए पर कारोबार कर रहा था। इसका मतलब यह है कि इस अवधि के दौरान अमेरिकी मुद्रा की कीमत में लगभग 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

हालांकि, आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, भारत के व्यापक आर्थिक आधार मजबूत बने हुए हैं। देश की हालिया 7.8 प्रतिशत की जीडीपी विकास दर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रमुख आर्थिक संकेतक अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को दर्शाते हैं।

आरबीआई गवर्नर ने महंगाई को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कीमतों का मौजूदा दबाव अधिक तो है, लेकिन यह अभी भी केंद्रीय बैंक की सहन-सीमा (टॉलरेंस बैंड) के भीतर है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की औसत महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रही है, जो उससे पहले के चार वर्षों में दर्ज की गई 7.4 प्रतिशत की औसत दर से काफी कम है।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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विश्व पोलियो दिवस 2026: बच्चों के स्वस्थ भविष्य की ओर एक कदम, जानें टीकाकरण का महत्व

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो पोलियोमाइलाइटिस नामक वायस से मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। यह नर्वस सिस्टम पर हमला करती है और बच्चों में स्थायी पक्षाघात (पैरालिसिस), जिसे लकवा भी कहते हैं, का कारण बन सकती है। मौजूदा समय तक इसका इलाज नहीं है, लेकिन टीका लगवाकर इसे रोका जा सकता है।

इसलिए पोलियो टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और दुनिया को पोलियो मुक्त बनाने के प्रयासों के दिशा में प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व पोलियो दिवस की थीम एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का सर्वथा उन्मूलन है।

विश्व पोलियो दिवस की स्थापना रोटरी इंटरनेशनल द्वारा अमेरिकी विषाणु विज्ञानी (वायरोलॉजिस्ट) डॉ. जोनास साल्क के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में की गई थी, जिन्होंने ही पोलियो का पहला सफल टीका विकसित किया था। पोलियो के मामले को लेकर भारत की स्थिति की बात करें, तो 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आधिकारिक तौर पर भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया था। हालांकि पोलियो का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए जागरूकता और टीकाकरण अभियान लगातार जारी हैं।

भारत में पोलियो का अंतिम मामला वर्ष 2011 में सामने आया था। देश को पोलियो मुक्त बनाने में दो बूंद जिंदगी की अभियान ने अहम भूमिका निभाई। इस अभियान के जरिए 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) दी जाती है।

देश में बच्चों को पोलियो से बचाव के लिए दो प्रकार की टीकाएं उपयोग में लाई जाती हैं। पहली है इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी), जिसे जन्म के बाद दिया जाता है ताकि भविष्य में पोलियो का खतरा न रहे। दूसरी है ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), जो बच्चों को पिलाई जाती है।

प्रत्येक वर्ष विश्व पोलियो दिवस हमें याद दिलाता है कि बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना, साफ-सफाई बनाए रखना और जन जागरूकता को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है।

--आईएएनएस

डीके/वीसी

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  Sports

Indian Cricketer S Meghana ने 30 साल की उम्र में Cricket के सभी प्रारूपों से संन्यास लिया

भारतीय महिला क्रिकेटर एस मेघना ने 30 साल की उम्र में क्रिकेट के सभी प्रारूपों में खिलाड़ी के तौर पर अपने सफर को अलविदा कह दिया है। भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुकी मेघना ने संन्यास की घोषणा करते हुए खेल के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के मैदान ने उन्हें मुश्किल हालात में डटे रहना, विनम्र रहना और जिंदगी भर साथ रहने वाली यादें बनाना सिखाया है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि क्रिकेट से उनका जुड़ाव आगे भी बना रहेगा और वह आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में योगदान देना चाहती हैं।

मेघना ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में कहा कि खिलाड़ी के तौर पर सभी प्रारूपों से संन्यास लेते समय उनका दिल कृतज्ञता से भरा हुआ है। उनके मुताबिक, क्रिकेट का मैदान उनके लिए दूसरे घर जैसा रहा है। यहां उन्हें खेल के साथ कई अच्छे दोस्त मिले और ऐसे अनुभव हासिल हुए, जिन्हें वह जीवनभर याद रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनका लक्ष्य खेल को कुछ वापस देना और नई पीढ़ी के क्रिकेटरों का मार्गदर्शन करना होगा।

एस मेघना ने भारत के लिए अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नवंबर 2016 में विजयवाड़ा में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। इसके बाद उन्होंने फरवरी 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ क्वीन्सटाउन में अपना पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका सफर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्हें सीमित ओवरों के दोनों प्रारूपों में अपनी बल्लेबाजी दिखाने का मौका मिला।

मौजूद जानकारी के अनुसार, मेघना ने भारत के लिए 3 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और 17 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। एकदिवसीय क्रिकेट में उनके नाम 114 रन दर्ज हैं, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने कुल 258 रन बनाए। खास बात यह है कि उन्होंने दोनों प्रारूपों में 1-1 अर्धशतक लगाया। उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में खेला था।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा मेघना महिला प्रीमियर लीग में भी खेल चुकी हैं। उन्होंने इस प्रतियोगिता के पहले 3 सत्रों में हिस्सा लिया। 2023 में वह गुजरात जायंट्स की ओर से खेलीं, जबकि 2024 और 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम का हिस्सा रहीं। महिला प्रीमियर लीग में उनका आखिरी मुकाबला 2025 में था। इस प्रतियोगिता में उन्होंने 15 मुकाबलों में 302 रन बनाए, जिसमें 1 अर्धशतक भी शामिल है।

गौरतलब है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लेना आसान फैसला नहीं होता। मेघना ने अपने संदेश में यह संकेत दिया है कि उनका संन्यास खेल से दूरी बनाने के बजाय अपनी भूमिका बदलने का फैसला है। वह अब युवा खिलाड़ियों को अपने अनुभव से मदद देने और क्रिकेट के विकास के लिए काम करने की इच्छा रखती हैं। ऐसे में आने वाले समय में कोचिंग, मार्गदर्शन या खेल से जुड़ी दूसरी जिम्मेदारियों के जरिए उनका अनुभव नए खिलाड़ियों के काम आ सकता है और वह क्रिकेट से जुड़े रहने की अपनी योजना को आगे बढ़ा सकती हैं।

Fri, 23 Oct 2026 20:46:00 +0530

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