न्यूयॉर्क में ब्लिजर्ड अलर्ट से हड़कंप: आखिर क्या होती है ये चेतावनी?
वाशिंगटन, 23 फरवरी (आईएएनएस)। न्यूयॉर्क इन दिनों बर्फीले तूफान की गिरफ्त में है। आपातकाल जैसी स्थिति है। स्कूल बंद हैं, उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। न्यूयॉर्क सिटी और अमेरिका के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में ब्लिजर्ड अलर्ट जारी होते ही जनजीवन प्रभावित हो गया। लेकिन सवाल यह है कि ब्लिजर्ड अलर्ट वास्तव में होता क्या है और यह सामान्य बर्फबारी से कितना अलग है?
ब्लिजर्ड दरअसल एक तेज गति से आता बर्फीला तूफान होता है, जिसमें भारी हिमपात के साथ लगातार तेज हवाएं चलती हैं। मौसम विज्ञान की परिभाषा के अनुसार, यदि हवा की रफ्तार कम से कम 35 मील प्रति घंटा या उससे अधिक हो और दृश्यता एक चौथाई मील से कम हो जाए तथा यह स्थिति कम से कम तीन घंटे तक बनी रहे, तो उसे ब्लिजर्ड कहा जाता है। इस दौरान गिरती बर्फ और तेज हवाएं मिलकर “व्हाइटआउट” जैसी स्थिति पैदा कर देती हैं, जिसमें सामने कुछ भी साफ दिखाई नहीं देता।
ब्लिजर्ड अलर्ट जारी होने का मतलब यह है कि ऐसे खतरनाक हालात की आशंका बहुत अधिक है या वे शुरू हो चुके हैं। नेशनल वेदर सर्विस जैसी एजेंसियां उपग्रह, रडार और मौसम मॉडल के आधार पर चेतावनी जारी करती हैं ताकि लोग पहले से तैयारी कर सकें। न्यूयॉर्क जैसे घनी आबादी वाले शहर में इसका असर व्यापक होता है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन, आपात सेवाएं और हवाई यातायात सीधे प्रभावित होते हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक कुछ दिन पहले ऐसा लग रहा था कि सर्दियों का तूफान न्यूयॉर्क सिटी इलाके में कुछ इंच बर्फ गिराएगा, लेकिन अब यह पूरी तरह से नॉर-ईस्टर बन गया है, जिससे ट्राई-स्टेट के कुछ हिस्सों में डेढ़ फीट से ज्यादा बर्फ जम गई है और इसमें लगातार इजाफा हो रहा है।
तेज हवाओं ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे हर घंटे लगभग 4 इंच बर्फबारी के बीच खतरनाक व्हाइटआउट के हालात बन गए हैं। पूरे ट्राई-स्टेट (न्यूयार्क, न्यूजर्सी और कनेक्टिकट) में इमरजेंसी लागू है, साथ ही ट्रैवल बैन भी हैं। नॉर-ईस्टर की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट और हवाई यात्रा रुक गई है।
ब्लिजर्ड के दौरान सड़कों पर बर्फ की मोटी परत जम जाती है, बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, और तापमान अत्यधिक गिरने से हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में प्रशासन लोगों से घर के अंदर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और आवश्यक वस्तुओं का स्टॉक रखने की अपील करता है।
--आईएएनएस
केआर/
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बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा पर मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता, दो किसानों की हत्या का आरोप
क्वेटा, 23 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बढ़ती हिंसा को लेकर एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में सुराब से दो किसानों को गायब कर दिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। बलूचिस्तान प्रांत में आम लोगों के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है। स्थानीय मीडिया के हवाले से सोमवार को यह खबर जारी की गई।
द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने कहा कि 26 साल के किसान तैमूर को 9 फरवरी को गायब कर दिया गया था। बीवाईसी ने आरोप लगाया कि तैमूर का शव कई दिन कस्टडी में रखने के बाद फेंक दिया गया। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे।
समूह ने कहा कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के शिकार लोगों के परिवार हिरासत के दौरान संभावित दुर्व्यवहार और लापता होने के भय में जीते हैं। संगठन के अनुसार, कई मामलों में पीड़ितों को यातना दी गई और बाद में उनके शव दूरदराज के इलाकों में मिले।
राइट्स ग्रुप के अनुसार, तैमूर मेहनती किसान था। वह रोज काम करके अपना गुजारा करता था। समूह ने तैमूर की हत्या को इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कानून का उल्लंघन बताया, जिसमें इंटरनेशनल कवनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (आईसीसीपीआर) के तहत जीवन के अधिकार और टॉर्चर पर रोक और कन्वेंशन अगेंस्ट टॉर्चर (सीएटी) के नियम शामिल हैं।
एक अन्य मामले में, बीवाईसी ने कहा कि 31 वर्षीय किसान मुर्तजा को 9 फरवरी को सुराब के माल एफसी चेकपोस्ट से पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के कर्मियों ने हिरासत में लिया। समूह का आरोप है कि मुर्तजा को बिना किसी अदालत के वारंट और बिना आरोपों की जानकारी दिए गिरफ्तार किया गया। द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद उनके परिवार को उनकी स्थिति या ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
बीवाईसी ने बताया कि मुर्तजा के मामले की जानकारी यूनाइटेड नेशंस वर्किंग ग्रुप ऑन एनफोर्स्ड ऑर इनवॉलंटरी डिसअपीयरेंस के साथ शेयर की गई थी, ताकि पाकिस्तानी अधिकारियों से उसकी किस्मत के बारे में सफाई ली जा सके। संगठन ने कहा कि मुर्तजा का शव 20 फरवरी को मिला, यानी उसे हिरासत में लेने के 11 दिन बाद। उसके शव पर भी बलूचिस्तान में रिपोर्ट किए गए दूसरे कथित जबरन गायब किए जाने के मामलों की तरह ही गंभीर चोट के निशान पाए गए।
बीवाईसी ने मुर्तजा की कथित न्यायेतर हत्या के लिए पाकिस्तान की राज्य संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराया और संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने, साथ ही पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की।
पिछले सप्ताह, बीवाईसी ने फरवरी महीने में बलूचिस्तान में न्यायेतर हत्या, जबरन गायब किए जाने और फेक एनकाउंटर में खतरनाक बढ़ोतरी की कड़ी निंदा की।
अपनी नवीनतम रिपोर्ट में बीवाईसी ने पुष्टि की कि 19 लोगों की न्यायेतर हत्या की गई है, जबकि यह भी कहा कि कुछ अन्य मामलों की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक दस्तावेजीकरण अभी बाकी है।
संगठन का कहना है, बच्चों, युवाओं और बुज़ुर्गों को टारगेट किया जा रहा है। सच जानने की कोशिश करने वाले परिवारों को डराया-धमकाया जाता है, परेशान किया जाता है और धमकियां दी जाती हैं। जिंदगी, आजादी, सुरक्षा और न्याय के अधिकारों का व्यवस्थित तरीके से और जानबूझकर उल्लंघन किया जा रहा है।
मानवाधिकार संस्था के मुताबिक, मीडिया कवरेज पर कड़ी पाबंदियों, कम सोशल मेलजोल और डर और धमकी के माहौल की वजह से, बहुत कम मामले ही फॉर्मली रजिस्टर हो पाते हैं या पब्लिक में डॉक्यूमेंट किए जाते हैं।
बीवाईसी ने घटनाओं की निंदा करते हुए कहा, ये काम गैरकानूनी और अमानवीय हैं और बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं। ये बलूच लोगों की इज्जत, सुरक्षा और सामूहिक अस्तित्व पर सीधा हमला है। पूरे बलूचिस्तान में परिवार लगातार डर में जी रहे हैं। बच्चों, स्टूडेंट्स, मजदूरों और आम लोगों को बिना किसी वजह, सही प्रोसेस या जवाबदेही के टारगेट किया जा रहा है, किडनैप किया जा रहा है और मारा जा रहा है।
--आईएएनएस
अर्पित/डीकेपी
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