यश की टॉक्सिक की दुनिया में अक्षय ओबेरॉय और सुदेव नायर की एंट्री, दिलचस्प हैं दोनों के किरदार
रॉकिंग स्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स को लेकर फैंस के बीच उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है. अब मेकर्स ने फिल्म के दो अहम किरदारों से पर्दा उठाया है. अक्षय ओबेरॉय फिल्म में ‘टोनी’ और सुदेव नायर ‘कर्मादी’ की भूमिका निभाते नजर आएंगे.
कैसा है अक्षय ओबेरॉय का किरदार
अक्षय ओबेरॉय का किरदार ‘टोनी’ 1950 के दौर की झलक देता है. लंबे साइडबर्न्स और पुराने अंदाज के साथ उनका लुक काफी स्टाइलिश है. उनका किरदार शांत दिखता जरूर है, लेकिन अंदर से बेहद खतरनाक है. बताया जा रहा है कि वह कहानी में अहम मोड़ लाने वाला पात्र है.
सुदेव नायर का कुछ ऐसा दिखेगा अंदाज
वहीं सुदेव नायर का किरदार ‘कर्मादी’ बिल्कुल अलग स्वभाव का है. वह कम बोलने वाला, गंभीर और जमीन से जुड़ा हुआ इंसान है. सिर पर फ्लैट कैप, मूंछ और हाथ में बंदूक के साथ उनका लुक दमदार नजर आता है. उनकी खामोशी ही उनके किरदार की ताकत बताई जा रही है.
निर्देशक ने भी की कलाकारों की तारीफ
फिल्म की निर्देशक गीता मोहनदास ने दोनों कलाकारों की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि सुदेव ने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है और वह फिल्म की मजबूत कड़ी साबित होंगे. वहीं अक्षय के बारे में उन्होंने बताया कि वह स्क्रिप्ट को गहराई से समझते हैं और किरदार में पूरी तरह उतर जाते हैं.
200 मिलियन से ज्यादा मिले व्यूज
हाल ही में फिल्म का टीजर रिलीज हुआ, जिसे 24 घंटे में 200 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले. टीज़र में यश नए क्लीन-शेव लुक में नजर आए, जिससे फैंस के बीच डबल रोल की चर्चा तेज हो गई है.
कन्नड़ और इंग्लिश में हुई शूटिंग
फिल्म को कन्नड़ और इंग्लिश में एक साथ शूट किया गया है. इसके हिंदी, तमिल, तेलुगु और मलयालम समेत कई भाषाओं में डब वर्जन भी रिलीज होंगे. फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. इसमें नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, रुक्मिणी वसंत और तारा सुतारिया भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी.
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कसरत के बाद गाय का दूध पीने से हड्डियां होती हैं मजबूत, बढ़ती उम्र में फ्रैक्चर से बचाव संभव: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। बढ़ती उम्र के साथ एक प्रवृत्ति जो बहुत आम होती है, वो ये कि लोग कसरत को खुद से कोसों दूर कर देते हैं, खाने-पीने में लापरवाही बरतते हैं, और धीरे-धीरे कमजोर होती हड्डियों के कारण लाचार हो जाते हैं। लेकिन एक शोध उन्हें इसमें सुधार करने की हिदायत भी देता है और नसीहत भी। चीनी वैज्ञानिकों ने पाया है कि वर्कआउट के बाद दूध पीने की एक आसान आदत बाद में हड्डियों को बचाने में मदद कर सकती है।
स्टडी से पता चलता है कि कसरत के साथ दूध पीने से बुज़ुर्गों में जानलेवा फ्रैक्चर का खतरा कम हो सकता है।
ये नतीजे जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन, हेल्थ एंड एजिंग में पब्लिश हुए, जहां शोधार्थियों ने यह जांच की कि क्या एक्सरसाइज के बाद प्रोटीन लेने से बुज़ुर्गों की हड्डियों को लाभ हो सकता है।
साइंटिस्ट्स ने पाया कि प्रोटीन हड्डियों की मजबूती में अहम भूमिका निभाता है। यह कैल्शियम अवशोषण को बढ़ाता है। एक मिनरल है जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है और बुढ़ापे में गिरने पर फ्रैक्चर का खतरा कम कर सकता है।
गाय का दूध और सोया दूध दोनों को प्रोटीन के आसान और असरदार सोर्स के तौर पर पहचाना गया।
स्टडी में 60 साल और उससे ज्यादा के 82 स्वस्थ व्यस्कों को शामिल किया गया। सभी सहभागी ऐसी किसी भी परेशानी से नहीं जूझ रहे थे जो प्रोटीन लेने या हड्डियों के मेटाबॉलिज्म पर असर डाल सकती थीं।
उन्होंने आठ हफ्ते का लगातार व्यायाम किया, जिसमें रेजिस्टेंस और बैलेंस ट्रेनिंग के तीन हफ्ते का सत्र शामिल था।
इसमें भाग लेने वाले लोगों को चार ग्रुप में बांटा गया। इनमें से एक सिर्फ वो थे जो कसरत करते थे, और दो ग्रुप उनके भी थे जो कसरत के बाद या तो गाय का दूध पीते थे या फिर सोया मिल्क लेते थे।
गाय के दूध वाले समूह में शामिल लोगों ने वर्कआउट खत्म करने के एक घंटे बाद 240 एमएल लो-फैट दूध पिया। सोया दूध वाले ग्रुप वालों को थोड़ी कम मात्रा में दूध दिया गया ताकि यह पक्का हो सके कि दोनों समूह हर सत्र में लगभग 7 से 8 ग्राम प्रोटीन लें।
प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के बीच बैलेंस बनाए रखने के लिए, दोनों दूध वाले ग्रुप्स ने हर ट्रेनिंग सेशन के बाद 60 ग्राम उबले हुए शकरकंद भी खाए। ऐसा आठ हफ्ते के प्रोग्राम में बदस्तूर जारी रखा गया।
आठ हफ्तों के बाद, सबसे ज्यादा असर उन लोगों में देखा गया जिन्होंने कसरत के बाद गाय का दूध पिया था। वो ज्यादा चपल और सक्रिय तो दिखे ही, उनकी हड्डियों की मजबूती भी बढ़ी।
इसी आधार पर नतीजा निकाला गया कि ज्यादा कसरत के साथ दूध पीना, ज्यादा उम्र के लोगों में हड्डियों की कमजोरी को रोकने और फ्रैक्चर के खतरे को कम करने का एक असरदार तरीका हो सकता है।
--आईएएनएस
केआर/
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