YRKKH: सालों बाद एक दूसरे को देखकर चिल्लाएंगे अभीरा-अरमान, क्या फिर से एक हो पाएंगे?
Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: समृद्धि शुक्ला और रोहित पुरोहित स्टारर शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' सालों से लोगों का मनोरंजन करता आ रहा है. ये शो टीवी पर सबसे लंबे समय तक चलने वाला सीरियल है. लेकिन पिछले कुछ समय से शो की टीआरपी गिर रही है. ऐसे में मेकर्स 8 साल का लीप लेकर आए है. वहीं, अब शो में एक और बड़ा मोड़ आने जा रहा है. अरमान और अभीरा जो बीते काफी सालों से अलग हैं, अब फाइनली मिलने वाले हैं.
अभीरा को देख पूरानी याद में खोएगा अरमान
ये रिश्ता क्या कहलाता है में देखने को मिला है कि अरमान मायरा की गलती की वजह से उसके स्कूल जा रहा होता है. लेकिन रास्ते में उसे सड़क किनारे एक लड़की दिखती है, जो कोई और नहीं अभीरा होती है. पहले तो अभीरा को देख अरमान गाड़ी से उतरने की कोशिश करता है, फिर उसे पुरानी यादें याद आती है और वो गुस्से में गाड़ी में बैठ जाता है. वहीं, अभीरा ऑटो में बैठ जाती है और उसका दुप्पटा उड़ते हुए अरमान की कार में जा फंसता है, जिसे बाद में अरमान जला देता है.
आमने-सामने आएंगे अरमान-अभिरा
अपकमिंग एपिसोड में अब अरमान-अभीरा का सामना होने वाला है. शो का जो प्रोमो सामने आया है उसमें अरमान एक बार फिर उसी गराज के सामने जा खड़ा होगा जिसकी मालकिन अभीरा है.अरमान यह आवाज लगाते हुए शॉप में दाखिल होगा कोई मैकेनिक है? उसका पांव एक गाड़ी के नीचे लेटकर उसकी मरम्मत कर रही अभीर के पांव से टकराएगी और वह गिर पड़ेगा. फिर दोनों एक दूसरे के सामने आ जाएगा और चिल्ला बैठेंगे. अब देखना होगा शो में आगे क्या होता है.
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तमिलनाडु में जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट, जानें कुल कितने कटे नाम
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने सोमवार 23 फरवरी 2026 को तमिलनाडु में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी. इस व्यापक पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक ने जानकारी दी कि कुल 97 लाख 37 हजार 831 नाम सूची से हटाए गए हैं. संशोधित आंकड़ों के अनुसार अब तमिलनाडु में कुल मतदाताओं की संख्या 5.43 करोड़ रह गई है.
यह संशोधन आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया गया था. चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद फर्जी, दोहराए गए और अयोग्य नामों को हटाकर चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना है.
किन कारणों से हटे नाम?
चुनाव अधिकारियों के अनुसार हटाए गए नामों में बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है जिनका निधन हो चुका है. इसके अलावा स्थान परिवर्तन, दोहरी प्रविष्टि, अधूरी जानकारी या दस्तावेजों की कमी जैसे कारण भी सामने आए। कुल मिलाकर 66 लाख नाम विभिन्न प्रशासनिक कारणों से सूची से हटाए गए.
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम तकनीकी या दस्तावेजी कमी के चलते हटे हैं, उन्हें दोबारा आवेदन का अवसर दिया जाएगा. इसके लिए फॉर्म-6 के माध्यम से पुनः पंजीकरण किया जा सकता है. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी वास्तविक और पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे.
नोटिस और सुधार का अवसर
एसआईआर के दौरान 12,43,363 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे. इन मतदाताओं के नाम या विवरण में त्रुटियां पाई गई थीं. संबंधित व्यक्तियों को निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज और स्व-घोषणा पत्र (सेल्फ डिक्लेरेशन) जमा करने का निर्देश दिया गया था.
चुनाव आयोग का कहना है कि जिन लोगों ने समय पर जवाब दिया और आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत किए, उनके नाम सूची में बरकरार रखे गए हैं. वहीं, निर्धारित अवधि में प्रतिक्रिया न देने वालों के नाम नियमों के तहत हटा दिए गए.
पारदर्शिता और सटीकता पर जोर
विशेष गहन पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया चुनावी पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. आयोग का मानना है कि शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद होती है.
हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुनः पंजीकरण की प्रक्रिया कितनी सुगम और प्रभावी रहती है, ताकि पात्र मतदाताओं का लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रह सके.
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