संशोधित भारतनेट से आंध्र प्रदेश के गांवों में मजबूत होगा टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर: ज्योतिरादित्य सिंधिया
नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। संशोधित भारतनेट एक 16.9 अरब डॉलर (करीब 1.39 लाख करोड़ रुपए) की सार्वजनिक वित्तपोषित योजना है, जिसका उद्देश्य आंध्र प्रदेश सहित देश के हर गांव तक ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) और ब्रॉडबैंड पहुंचाना है। यह बात सोमवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कही।
डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), दूरसंचार विभाग और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच राज्य में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) के तेज क्रियान्वयन के लिए एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
सिंधिया ने कहा, हम मूल रूप से देश के हर नागरिक तक तकनीक का लोकतंत्रीकरण कर रहे हैं। हमारी पीढ़ी में तकनीक ने व्यक्तिगत प्रतिभा, महत्वाकांक्षा और सपनों को वैश्विक मंच तक पहुंचने की क्षमता दी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने कहा कि यह समझौता राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल के तहत तेज और टिकाऊ क्रियान्वयन के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करता है, जिसमें वित्तीय सहायता के साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मजबूत करेगी, 4जी सेवाओं का विस्तार करेगी और ग्रामीण नागरिकों को सस्ती और भरोसेमंद डिजिटल सेवाओं का लाभ दिलाएगी।
यह समझौता डीबीएन और राज्य सरकार के बीच संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तेज विस्तार के लिए व्यापक सहयोग का ढांचा तैयार करता है।
राज्य सरकार ने कार्यक्रम के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू), बुनियादी ढांचे तक पहुंच और आवश्यक समन्वय में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
मंत्रालय के अनुसार, परियोजना के लिए अधिकांश वित्तपोषण डीबीएन द्वारा किया जाएगा, जबकि राज्य सरकार भी आपसी सहमति के अनुसार योगदान देगी।
इस कार्यक्रम के तहत तैयार नेटवर्क का उपयोग राज्य सरकार सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को अधिकतम करने के लिए करेगी।
केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश में इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 2,432 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।
इससे सरकार की सहायता से पांच लाख से अधिक ग्रामीण घरों को फाइबर कनेक्शन मिलने की उम्मीद है। साथ ही डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती मिलेगी, नागरिक सेवाओं की डिलीवरी बेहतर होगी और ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और टेलीमेडिसिन को बढ़ावा मिलेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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भारत–जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास #DharmaGuardian, 24 फरवरी से उत्तराखंड के चौबट्टिया में शुरू
भारत और जापान के बीच 7वां संयुक्त सैन्य अभ्यास #DharmaGuardian 2026 24 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक उत्तराखंड के चौबट्टिया में आयोजित किया जाएगा. इस अभ्यास का उद्देश्य शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों में दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना है.
'धर्म गार्डियन' भारत और जापान के बीच एक सालाना सैन्य अभ्यास है. इसका आयोजन बारी-बारी से भारत और जापान में होता है. पिछली बार अभ्यास फरवरी-मार्च 2024 में राजस्थान में हुआ था. इस दौरान भारतीय सेना के 120 सैनिकों की टुकड़ी, जिसमें मुख्य रूप से मद्रास रेजिमेंट के सैनिक शामिल होंगे. 34वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के 120 सैनिक इस अभ्यास करेंगे.
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— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) February 23, 2026
भारत–जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास #DharmaGuardian उत्तराखंड में कल से ????????????????
भारत और जापान के बीच 7वां संयुक्त सैन्य अभ्यास #DharmaGuardian 2026 24 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक उत्तराखंड के चौबट्टिया में आयोजित किया जाएगा।
इस अभ्यास का उद्देश्य शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी… pic.twitter.com/nzHPaoYgIw
इस अभ्यास का उद्देश्य क्या है
इस सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के तहत शहरी युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अंतर-संचालन को बढ़ाना है. इस दौरान संयुक्त योजना और सामरिक रणनीतियों पर जोर रहेगा. यह अभ्यास भारत और जापान के द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को ताकत देगा. क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले और समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है.
प्रमुख गतिविधियां
▪️ टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना
▪️ ISR ग्रिड का विकास
▪️ मोबाइल चेक पोस्ट
▪️ कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन
▪️ हेलिबोर्न मिशन
▪️ हाउस इंटरवेंशन ड्रिल्स
दो सप्ताह तक सैनिक संयुक्त योजना, सामरिक अभ्यास और विशेष युद्ध कौशल को और निखारेंगे. यह अभ्यास भारत–जापान रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है.
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