कौन हैं Gugun Kipgen? जो 'Boong' बन दुनियाभर में छाए, एक्टिंग में बड़े सितारों को छोड़ा पीछे
Boong Actor Gugun Kipgen: डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी की मणिपुरी फिल्म 'बूंग' को (Boong) दुनियाभर में छा गई है. फिल्म को 'द ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन अवॉर्ड्स' ‘BAFTA 2026’ में बेस्ट 'चिल्ड्रेन एंड फैमिली फिल्म' कैटेगरी में अवॉर्ड मिला है. इसी के साथ अब फिल्म में नजर आए चाइल्ड आर्टिस्ट गुगुन किपगेन ( Gugun Kipgen) के बारे में हर कोई जानना चाह रहा है. तो चलिए जानते हैं कौन हैं गुगुन किपेगन.
कौन हैं गुगुन किपेगन?
गुगुन किपगेन (Gugun Kipgen) मणिपुर के 12 साल के चाइल्ड आर्टिस्ट है. गुगुन मणिपुर के कुकी समुदाय से आते हैं और इस समय अपनी एक्टिंग की वजह से दुनियाभर में छाए हुए हैं. फिल्म बूंग में अपनी एक्टिंग और मासूमियत से गुगन ने लोगों का दिल तो जीता ही है, साथ ही उन्हें IFFM और इंडो-जर्मन फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट चाइल्ड एक्टर का अवॉर्ड भी मिला है.
क्या है बूंग की कहानी?
फिल्म बूंग की कहानी मणिपुर की पहाड़ियों में रहने वाले एक छोटे लड़के 'बूंग' की है, जिसका किरदार गुगुन ने निभाया है. बूंग अपनी मां को एक सरप्राइज गिफ्ट देने का प्लान करता है. इसके लिए बूंग सोचता है कि अगर वो अपने बिछड़े हुए पिता को घर वापस ले आएगा तो वो उसकी मां के लिए बड़ा तोहफा होगा. इसी उम्मीद के साथ वो अपने पिता की खोज में निकल दाता है. वहीं, इस सफर के दौरान उसके साथ जो कुछ भी होता है, वो उसकी उम्मीदों से परे है. गुगुन के अलावा फिल्म में बाला हिजाम, एंगम सनामतम, विक्रम कोचर, नेमेतिया नगंगबाम, जेनी खुरई जैसे कलाकार भी नजर आए हैं.
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Acharya Balkrishna Health Tips: बार-बार आ रही है खट्टी डकार? आचार्य बालकृष्ण से जानिए इन घरेलू उपायों से कैसे करें ठीक
Acharya Balkrishna Health Tips: आज के दौर में गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण पाचन से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं. खट्टी डकारें आना, सीने में जलन और भारीपन जैसे लक्षण अक्सर परेशान करते हैं. कई लोग तुरंत दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद के योग गुरू आचार्य बालकृष्ण ने सोशल मीडिया पर इसका सरल समाधान बताया गया है. चलिए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में.
आचार्य बालकृष्ण ने बताया असरदार उपाय
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, खट्टी डकारें आने पर एक आसान घरेलू नुस्खा बहुत लाभकारी हो सकता है. इसके लिए भुने हुए जीरे का चूर्ण लें. इसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाएं. अब इस मिश्रण को गुनगुने पानी के साथ सेवन करें. यह उपाय पाचन अग्नि को संतुलित करता है. पेट में बनी गैस को कम करता है. साथ ही एसिडिटी से भी राहत देता है.
कितनी बार करना चाहिए सेवन?
इस नुस्खे का सेवन दिन में तीन बार किया जा सकता है. सुबह, दोपहर और रात के भोजन के बाद इसका सेवन लाभकारी माना जाता है. नियमित रूप से इसे अपनाने से पेट हल्का महसूस होता है. डकारों की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है.
क्यों फायदेमंद है यह आयुर्वेदिक नुस्खा
जीरा पाचन को मजबूत करता है. यह गैस और अपच को दूर करने में सहायक है. वहीं सेंधा नमक पेट के लिए हल्का होता है. यह पाचन रसों के संतुलन में मदद करता है. दोनों मिलकर पेट की जलन और खटास को कम करते हैं.
किन बातों का रखें ध्यान?
इस उपाय के साथ खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है. बहुत अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन न करें. समय पर भोजन करें. खूब पानी पिएं. रात को हल्का खाना लें. इससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करेगा. यदि खट्टी डकारों की समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. घरेलू नुस्खे सामान्य समस्या में सहायक होते हैं. गंभीर परेशानी में जांच जरूरी होती है.
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