590 करोड़ रुपये का घोटाला, हरियाणा सरकार के बैंक खातों में हेराफेरी, 4 कर्मचारी निलंबित
Haryana Bank Fraud 590 Crore Rupees: हरियाणा सरकार के बैंक खातों में 590 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है. इस मामले में बैंक के ही चार कर्मचारियों को निलंबित किया गया है. इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब सरकार ने अपना खाता इस बैंक से बंद कर दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का आवेदन लेकर पहुंची.
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दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है
दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता से जुड़े एक मामले पर कहा कि बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं होती। घर संभालना, बच्चों की देखभाल और परिवार की मदद करना भी काम है, भले ही वह बैंक खाते में नजर न आए। ऐसे में गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी के योगदान को नजरअंदाज करना गलत है। जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने 16 फरवरी को दिए इस फैसले में कहा कि घरेलू काम का भी आर्थिक महत्व होता है और इसे नजरअंदाज करना नाइंसाफी है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी खाली नहीं बैठती, वह ऐसा काम करती है जिससे कमाने वाला पति सही तरीके से काम कर पाता है। क्या है मामला मामला 2012 में हुई शादी से जुड़ा है। पत्नी का आरोप है कि 2020 में पति ने उसे और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। पत्नी ने घरेलू हिंसा कानून के तहत अंतरिम मेंटेनेंस की मांग की। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि पत्नी शिक्षित और सक्षम है, लेकिन उसने नौकरी नहीं की। अपीलीय अदालत ने भी कोई राहत नहीं दी। हाईकोर्ट में पति ने दलील दी कि वह बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा रहा है और पत्नी खाली बैठकर मेंटेनेंस नहीं मांग सकती। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि कमाने की क्षमता और वास्तविक कमाई दो अलग बातें हैं। केवल इस आधार पर पत्नी को मेंटेनेंस से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह कमाने में सक्षम है। पत्नी को ₹50 हजार मेंटेनेंस का आदेश हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी के पास अभी या पहले से किसी आय का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। अदालत ने उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत ₹50 हजार अंतरिम मेंटेनेंस देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मेंटेनेंस से जुड़े मामले अक्सर अत्यधिक टकरावपूर्ण बन जाते हैं, जिससे दोनों पक्षों और खासकर बच्चों के हित लंबे समय तक प्रभावित होते हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि वैवाहिक विवादों में लंबी मुकदमेबाजी के बजाय मध्यस्थता बेहतर विकल्प हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि विवादित कार्यवाही में अक्सर पत्नी खर्च बढ़ा-चढ़ाकर बताती है, जबकि पति आय कम दिखाने या आर्थिक असमर्थता का दावा करता है, जिससे बातचीत की गुंजाइश कम हो जाती है।
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