पोलैंड की नई राजदूत नियुक्त की गई नीता भूषण, जल्द संभालेंगी जिम्मेदारी
नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की 1994 बैच की अधिकारी नीता भूषण पोलैंड में भारत की राजदूत नियुक्त की गई हैं। जल्द ही वह पोलैंड में अपना कार्यभार संभालेंगी। वर्तमान समय में वह न्यूजीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त के रूप में काम संभाल रही हैं।
इससे पहले उन्होंने जापान, जर्मनी, यूएई और बांग्लादेश में बतौर राजनयिक अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने अबू धाबी में उप राजदूत और अमेरिका के शिकागो में महावाणिज्य दूत के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी संभाली है। नीता भूषण विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (मध्य यूरोप) भी रही हैं।
नीता भूषण ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स की डिग्री ली और फिर उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से एम.फिल किया।
सितंबर 2022 में उन्हें न्यूजीलैंड में भारत की उच्चायुक्त नियुक्त किया गया। नीता के पास कुक आइलैंड्स, नियू, वनुआतु और समोआ का भी अतिरिक्त प्रभार रहा। शिकागो में उन्होंने 2017 से लेकर 2019 तक अपनी सेवा दी। यहां उन्होंने अमेरिका के मिडवेस्ट क्षेत्र के 10 राज्यों में भारतीय हितों का नेतृत्व किया।
अप्रैल 2020 से उन्होंने विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में मध्य यूरोप के 30 देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों का अनुभव लिया। 2009 से 2013 के बीच, वह वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में निदेशक के रूप में प्रतिनियुक्ति पर थीं। इस दौरान उन्होंने यूरोप के साथ आर्थिक संबंधों पर काम किया। इसके अलावा, नीता भूषण ने विकास भागीदारी प्रशासन (डीपीए) में निदेशक, जापान एवं कोरिया डेस्क पर अवर सचिव और नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) में फैकल्टी सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
बता दें, भारत और पोलैंड के बीच 1954 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। 1957 में भारत ने अपना दूतावास वारसॉ में खोला था। 1989 में पोलैंड द्वारा लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को चुनने के बाद भी दोनों देशों की घनिष्ठता बनी हुई है। 45 साल में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अगस्त 2024 को यहां का दौरा किया था।
भारत से पोलैंड को टेक्सटाइल और परिधान (सूती वस्त्र, आरएमजी), इंजीनियरिंग सामान (मशीनरी, यांत्रिक उपकरण, लोहे और इस्पात के उत्पाद, धात्विक उत्पाद), रसायन और फार्मा (रसायन, रबर उत्पाद और फार्मास्युटिकल (दवा) उत्पाद), कृषि उत्पाद (कॉफी, चाय, मसाले और तंबाकू) और खनिज ईंधन और तेल का निर्यात होता है।
इसके अलावा पोलैंड से भारत को मशीनरी और उपकरण (औद्योगिक मशीनरी, यांत्रिक उपकरण, कंप्यूटर, वाहन के पुर्जे), रसायन (अवशिष्ट रासायनिक और मिश्रित उत्पाद), धातु (लोहा और इस्पात) और इलेक्ट्रिक बैटरी, रबर उत्पाद आयात होते हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सिंगापुर में सीएम योगी ने जीआईसी के साथ की दीर्घकालिक निवेश पर विस्तृत चर्चा
सिंगापुर/लखनऊ, 23 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सिंगापुर दौरे के दौरान प्रमुख संप्रभु निवेश संस्था जीआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लिम चो किआट और उनकी टीम के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश में जीआईसी के दीर्घकालिक निवेश की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई।
सीएम योगी ने जीआईसी को उत्तर प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करते हुए राज्य की नीतिगत स्थिरता, सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था, 25 करोड़ से अधिक की विशाल उपभोक्ता आबादी तथा तेजी से विकसित हो रहे अवसंरचना तंत्र को प्रमुख आकर्षण के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज भारत की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला राज्य है और सरकार निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी एवं अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है।
बैठक में औद्योगिक कॉरिडोर के किनारे लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग अवसंरचना के विकास, अक्षय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं, डेटा सेंटर एवं डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, उभरते शहरी केंद्रों में वाणिज्यिक रियल एस्टेट व इंटीग्रेटेड टाउनशिप, एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप फिनटेक एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा भविष्य उन्मुख उद्योगों के लिए कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को “फ्यूचर-रेडी” औद्योगिक और आर्थिक हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और नए औद्योगिक शहरों का तेजी से विकास हो रहा है, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए स्थिर और लाभकारी अवसर प्रदान करते हैं।
जीआईसी, जो विश्व की प्रमुख दीर्घकालिक संप्रभु संपत्ति निवेश संस्थाओं में से एक है, का भारत में अवसंरचना, रियल एस्टेट, फिनटेक और डिजिटल प्लेटफॉर्म क्षेत्रों में मजबूत निवेश आधार है। इस परिप्रेक्ष्य में मुख्यमंत्री और जीआईसी के बीच हुई यह बैठक उत्तर प्रदेश में वैश्विक पूंजी के प्रवाह को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। गौरतलब है कि राज्य में निवेश आमंत्रण के इसी क्रम के तहत डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य यूरोप के दौरे पर हैं।
--आईएएनएस
एसके/
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