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किसकी मांग पर ग्रीनलैंड में हॉस्पिटल शिप भेज रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप?

नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड में एक हॉस्पिटल शिप भेज रहे हैं, जो आर्कटिक में डेनमार्क का ऑटोनॉमस इलाका है। अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ट्रंप ने किसकी मांग पर समुद्र में तैरता हुआ अस्पताल ग्रीनलैंड भेजने का फैसला लिया।

उन्होंने शनिवार को ट्रूथ सोशल पर ऐलान किया कि वह ग्रीनलैंड में अपने खास दूत जेफ लैंड्री के साथ काम कर रहे हैं। बता दें, दिसंबर में कोपेनहेगन में लैंड्री की नियुक्ति को डिप्लोमैटिक उल्लंघन बताया गया था। लैंड्री ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के शासन को कब्जा कहा। इसके साथ ही उन्होंने ग्रीनलैंड से अमेरिका के साथ तालमेल बिठाने के लिए आजादी मांगने का आग्रह किया है।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों अधिकारियों पर निशाना साधते हुए लिखा, “लुइसियाना के शानदार गवर्नर जेफ लैंड्री के साथ मिलकर, हम ग्रीनलैंड में एक शानदार हॉस्पिटल बोट भेजने जा रहे हैं ताकि उन कई लोगों की देखभाल की जा सके जो बीमार हैं, और जिनकी वहां देखभाल नहीं हो रही है। यह रास्ते में है!!!”

लैंड्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप की घोषणा का स्वागत करते हुए लिखा, “धन्यवाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप! इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर आपके साथ काम करने पर गर्व है!”

हालांकि, ट्रंप और लैंड्री में से किसी ने भी यह साफ नहीं किया है कि तैनाती का अनुरोध डेनमार्क ने किया था या ग्रीनलैंड ने, या किसे इलाज की जरूरत थी। डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने मीडिया के सवालों को अमेरिकी नॉर्दर्न कमांड को भेज दिया, जिसने उन्हें अमेरिकी नौसेना को भेज दिया। दोनों में से किसी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

ग्रीनलैंड में पब्लिकली फंडेड यूनिवर्सल हेल्थकेयर सिस्टम है, हालांकि रिपोर्ट्स में स्टाफ की लगातार कमी और लॉजिस्टिक दिक्कतों की जानकारी सामने आती रही है। डेनमार्क ने सितंबर में 2029 तक हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए 1.6 बिलियन डीकेके (253 मिलियन डॉलर) देने का वादा किया था और आगे के सुधार शुरू किए हैं।

ट्रंप का यह पोस्ट डेनमार्क के जॉइंट आर्कटिक कमांड द्वारा राजधानी नुउक के पास ग्रीनलैंड के पानी में एक सबमरीन से अमेरिकी नौसेना के एक नाविक को निकालने के कुछ घंटों बाद आया, जिसे तुरंत नॉन-कॉम्बैट मेडिकल इलाज की जरूरत थी। यह साफ नहीं था कि ट्रंप के पोस्ट का इस घटना से कोई कनेक्शन था या नहीं।

--आईएएनएस

केके/डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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इटली: दौलत त्याग गरीबों की सेवा में संत फ्रांसिस ने बिताया था जीवन, उनके अवशेष अब देख पाएगी दुनिया

रोम, 22 फरवरी (आईएएनएस)। सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी, यानी इटली स्थित ऐतिहासिक शहर असीसी के संत फ्रांसिस को दुनिया गरीबों का मसीहा मानती है। उन्होंने दौलत त्यागकर अपना जीवन गरीब जनता की सेवा में समर्पित कर दिया था। 13वीं सदी के इस संत को लोग बड़े अदब से याद करते हैं। उनके लिए संत के अवशेषों की झलक भी बड़ी उपलब्धि है। करीब 800 साल बाद उनके अवशेष दुनिया देख पाएगी।

रविवार (22 फरवरी) से उनके अवशेषों को पूरी तरह से पब्लिक डिस्प्ले पर रखा जा रहा है।

14 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चर्च के पुजारियों और अधिकारियों ने बताया था कि नाइट्रोजन से भरे प्लेक्सीग्लास केस के अंदर, जिस पर लैटिन में “कॉर्पस सैंक्टी फ्रांसिसी” (सेंट फ्रांसिस का शरीर/शव) लिखा है, अवशेषों को पहाड़ों में बसे शहर बेसिलिका ऑफ सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी में दिखाया जा रहा है।

सेंट फ्रांसिस, जिनकी मृत्यु 3 अक्टूबर 1226 को हुई थी, ने अपनी दौलत छोड़कर और अपना जीवन गरीबों के लिए समर्पित करने के बाद फ्रांसिस्कन ऑर्डर की स्थापना की थी।

असीसी में फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट के कम्युनिकेशन डायरेक्टर गिउलिओ सेसारियो के हवाले से बताया कि उन्हें उम्मीद है कि यह डिस्प्ले आस्तिक और नास्तिक, दोनों के लिए “एक अद्भुत अनुभव” लेकर आएगा।

सेसारियो ने कहा कि हड्डियों की “खराब” हालत दिखाती है कि सेंट फ्रांसिस ने अपने जीवन के काम के लिए “पूरी तरह से खुद को समर्पित कर दिया था।

उनके अवशेष 22 मार्च तक दिखाए जाएंगे। ये अवशेष 1230 में संत के सम्मान में बने बेसिलिका में ट्रांसफर कर दिए गए थे, लेकिन 1818 में, बहुत ही गुप्त तरीके से की गई खुदाई के बाद, उनकी कब्र फिर से मिली थी।

वैज्ञानिक जांच के लिए पहले की गई खुदाई के अलावा, सेंट फ्रांसिस की हड्डियों को सिर्फ एक बार, 1978 में चंद लोगों को दिखाया गया था। वह भी महज 24 घंटों के लिए खोला गया था।

सेंट फ्रांसिस इटली के संरक्षक संत हैं, और उनकी मौत की 800वीं सालगिरह मनाने के लिए 4 अक्टूबर को फिर से पब्लिक हॉलिडे शुरू किया जाएगा।

फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट के गार्डियन मार्को मोरोनी ने कहा कि संत के अवशेष देखने के लिए पहले से ही दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 4,00,000 (लोग) आ रहे हैं, जिनमें इटली से ज्यादा हैं, लेकिन हमसे ब्राजीलियन, नॉर्थ अमेरिकन और अफ्रीकी लोगों ने भी अनुरोध किया है।

--आईएएनएस

केआर/

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  Sports

साउथ अफ्रीका के खिलाफ सूर्या-गंभीर का बड़ा फैसला, प्लेइंग-11 से सबको चौंकाया

India Playing-11 vs South Africa: साउथ अफ्रीका के खिलाफ सुपर-8 मैच में भारत ने प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया है. पिछले मैच में अक्षर पटेल को रेस्ट दिया गया था, जो इस मुकाबले से भी बाहर ही हैं. उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर की यह मुकाबला खेल रहे हैं. अक्षर पटेल की प्लेइंग-11 में वापसी की पूरी संभावना थी, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार और कोच गौतम गंभीर ने इस फैसले ने हर किसी को चौंका दिया. Sun, 22 Feb 2026 18:41:24 +0530

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