तो ऐसे होती है भारतीय रेलवे के जांबाज ड्राइवरों की ट्रेनिंग, सामने आया ये वीडियो
भारतीय रेलवे का जाल दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों यात्रियों और भारी सामान को ले जाने वाले इन विशाल इंजनों को चलाने वाले ड्राइवर (लोको पायलट) इतनी बारीकी से ट्रेनिंग कहां पाते हैं? इसका जवाब है Alstom का WAG 12B सिम्युलेटर, जो तकनीक और रोमांच का बेजोड़ मेल है.
बिल्कुल असली इंजन जैसा अहसास
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक ब्लॉगर ने Alstom के वर्कशॉप के अंदर की झलक दिखाई है. यह कोई साधारण कमरा नहीं, बल्कि भारत के सबसे ताकतवर इलेक्ट्रिक इंजन WAG 12B की हूबहू नकल है. सिम्युलेटर के अंदर कदम रखते ही आपको लगेगा कि आप सचमुच किसी ट्रेन के केबिन में खड़े हैं. इसमें सामने की खिड़की से दिखने वाला ट्रैक, स्टेशन और प्लेटफार्म बिल्कुल असली जैसे नजर आते हैं. यहाँ तक कि साइड-व्यू मिरर भी असली इंजन की तरह ही काम करते हैं.
बारिश हो या कोहरा
ट्रेन चलाना सिर्फ लीवर खींचना नहीं है. इस सिम्युलेटर की सबसे बड़ी खासियत इसका स्मार्ट सॉफ्टवेयर है. ट्रेनिंग के दौरान पायलटों के सामने जानबूझकर अलग-अलग मौसम की चुनौतियां पैदा की जाती हैं. सिम्युलेटर में भारी बारिश या घने कोहरे का माहौल बनाया जाता है ताकि पायलट सीख सकें कि ऐसी स्थिति में ट्रेन को सुरक्षित कैसे निकालना है. अचानक आने वाली दिक्कतों या तकनीकी खराबी के दौरान कैसे शांत रहकर सही फैसला लेना है, इसकी प्रैक्टिस यहीं कराई जाती है.
Alstom और भारत का पुराना साथ
Alstom कंपनी पिछले लगभग 100 सालों से भारत की रेल यात्रा को आधुनिक बनाने में जुटी है. भारत का सबसे पावरफुल लोकोमोटिव WAG 12B भी इसी कंपनी की देन है. देश भर में 6 फैक्ट्रियों और 5 इंजीनियरिंग सेंटर्स के साथ, यह कंपनी भारतीय रेलवे को ग्लोबल स्टैंडर्ड की तकनीक दे रही है. यह सिम्युलेटर केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि यह उन हाथों को मजबूत बनाने का जरिया है जिनके भरोसे करोड़ों लोगों का सफर होता है.
ये भी पढ़ें- भारत-अमेरिका की नई साझेदारी, प्राइवेट सेक्टर के दम पर एआई क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी
चीन के प्रतिनिधि ने दोहराया : स्थायी सदस्यता मांगने के लायक नहीं है जापान
बीजिंग, 22 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद की सीटों के उचित बंटवारे और सदस्यों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे और सुरक्षा परिषद से जुड़े दूसरे मामलों पर अंतर-सरकारी बातचीत की।
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने अपनी आखिरी बात में दोहराया कि जापान अपने ऐतिहासिक आक्रामक कृत्यों पर पश्चाताप करने से इनकार करता है, युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय शासन को खुलेआम रौंद रहा है, दूसरे देशों की संप्रभुता में दखल दे रहा है और इलाके की शांति और स्थिरता के लिए नए खतरे पैदा कर रहा है। ऐसा देश स्थायी सदस्यता मांगने के लायक ही नहीं है।
फू थ्सोंग ने सुरक्षा परिषद सुधार के बारे में तीन बातों पर भी जोर दिया: पहला, सुरक्षा परिषद शक्तिशाली और समृद्ध देशों का क्लब नहीं बन सकती। सुधार से सिर्फ बहुत कम देशों को ही फायदा नहीं होना चाहिए।
दूसरा, विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और आवाज को सच में बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे स्वतंत्र विदेश नीतियों वाले छोटे और मध्यम आकार के देशों को सुरक्षा परिषद में भागीदारी का मौका मिल सके। खास तौर पर, अफ्रीका के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को ठीक किया जाना चाहिए, और अफ्रीकी देशों की मांगों को प्राथमिकता देते हुए खास इंतजाम किए जाने चाहिए।
तीसरा, सुधार को केवल वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसे एक रणनीतिक दृष्टि और लंबे समय के नजरिए से प्लान किया जाना चाहिए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





















