नेपाल के सीमावर्ती इलाके में माहौल अब भी तनावपूर्ण, कर्फ्यू लागू
काठमांडू, 22 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल के दक्षिण-पूर्वी इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। रौतहट में शनिवार को दो गुटों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन एक्शन में आ गई है। तनाव के बाद स्थानीय प्रशासन ने 21 फरवरी को रौतहट के गौर नगरपालिका क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया। गौर के कुछ हिस्सों में लगाया गया कर्फ्यू अभी भी लागू है।
नेपाली मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, यह तनाव वार्ड 6 के सबगढ़ में शुरू हुआ, जहां कथित तौर पर दो समुदाय के लोगों के बीच एक शादी के जुलूस के दौरान बहस हुई। देखते ही देखते बहसबाजी हिंसा में तब्दील हो गई। इस दौरान पत्थरबाजी और एक गाड़ी में आग लगाने की घटना भी सामने आई।
नेपाली मीडिया काठमांडू पोस्ट के अनुसार, दो गुटों के बीच इससे पहले भी तनाव बढ़ा था और टकराव के बाद शुक्रवार शाम को छह प्वाइंट के समझौते पर सहमति बन गई। हालांकि, इसके बावजूद फिर शनिवार सुबह करीब 9 बजे तनाव फिर से बढ़ गया, जिसके बाद अधिकारियों ने दोपहर 1 बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया।
जिला मजिस्ट्रेट दिनेश सागर भुसाल ने कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अगली सूचना तक कर्फ्यू जारी रखा गया है। उन्होंने कहा, स्थिति स्थिर हो रही है। हालात ठीक होने पर हम कर्फ्यू हटा देंगे।
कर्फ्यू जोन में गौर कस्टम्स ऑफिस, पूरब में मुदबलवा गेट, पश्चिम में लालकैया तटबंध तक और उत्तर में बाम कैनाल एरिया शामिल हैं। नेपाली आर्मी, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स के सुरक्षाकर्मियों को व्यवस्था ठीक करने के लिए भेजा गया है।
अधिकारियों ने लोगों से संयम बरतने की अपील की है, जबकि इलाके में आने-जाने पर रोक है। सुबह 6:30 से 8:30 बजे के बीच जरूरी कामों के लिए कुछ छूट दी गई है।
झड़पों को भड़काने के आरोप में दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया, जिससे जिले में चल रहे समुदायों के बीच के तनाव का पता चलता है। प्रशासन ने कहा कि आगे की घटनाओं को रोकने के लिए स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है।
इससे पहले डीएम दिनेश सागर ने बताया था कि कर्फ्यू गौर कस्टम ऑफिस से लेकर पूरब में मुदबलवा गेट, पश्चिम में लालकैया तटबंध और उत्तर में बाम नहर इलाके तक लागू किया गया है।
नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स के दर्जनों जवानों को व्यवस्था बहाल करने के लिए भेजा गया है। प्रभावित इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और अधिकारियों ने लोगों से संयम बरतने की अपील की है।
बताया जा रहा है कि झगड़ा तब शुरू हुआ जब सबगढ़ में एक शादी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के लोगों के बीच बहस हो गई, जिसके बाद पत्थरबाजी हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में कई लोग घायल हो गए।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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Baba Vanga Prediction 2026: AI को लेकर बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई वायरल, क्या सच में इंसानों की नौकरियों पर मंडरा रहा खतरा?
Baba Vanga AI Prediction: बुल्गारिया की प्रसिद्ध नेत्रहीन भविष्यवक्ता बाबा वेंगा भले ही अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़ी भविष्यवाणियां आज भी दुनिया भर में सुर्खियों में रहती हैं. इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर उनसे जुड़ा एक दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
कहा जा रहा है कि बाबा वेंगा ने एआई के बढ़ते प्रभाव से नौकरियों और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की चेतावनी दी थी. इसी वजह से लोग उनकी इस कथित भविष्यवाणी को मौजूदा हालात से जोड़कर देख रहे हैं.
सोने की कीमतों से जुड़ा दावा कैसे हुआ वायरल?
पिछले साल दिसंबर में जब सोने के दाम गिर रहे थे, तब सोशल मीडिया पर एक दावा वायरल हुआ था कि बाबा वेंगा ने 2026 में सोने की कीमतों में तेजी आने की बात कही थी. अब जब सोने के दाम बढ़ते नजर आ रहे हैं, तो लोग इसे उनकी भविष्यवाणी से जोड़ रहे हैं. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार में बदलाव कई आर्थिक और वैश्विक कारणों से होता है.
AI को लेकर बाबा वेंगा की भविष्यवाणी
हाल के महीनों में Microsoft, Oracle, Google, Amazon और Tata Consultancy Services जैसी बड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी हुई है. कई जानकारों का कहना है कि ऑटोमेशन और एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने मानव श्रम की जरूरत को कम किया है. इसी वजह से बाबा वेंगा की एआई से जुड़ी भविष्यवाणी की चर्चा और तेज हो गई है.
तेजी से बदलती दुनिया और एआई
आज एआई हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है. आईटी सेक्टर में मुश्किल काम कुछ सेकंड में हो रहे हैं. बिना कैमरे और शूटिंग के फिल्में बनाई जा रही हैं. फैक्ट्रियों में मशीनें इंसानों की जगह ले रही हैं. गाड़ियों, रोबोटिक्स और खेती में भी एआई का उपयोग लगातार बढ़ रहा है. इन बदलावों से काम करने के तरीके पूरी तरह बदल रहे हैं.
भविष्यवाणी या सोशल मीडिया का भ्रम?
कुछ लोग दावा करते हैं कि बाबा वेंगा ने 2026 में एआई के कारण आर्थिक संकट की बात कही थी. लेकिन इसका कोई लिखित या प्रमाणिक सबूत मौजूद नहीं है. विशेषज्ञ इसे सोशल मीडिया पर फैल रहा दुष्प्रचार मानते हैं.
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि एआई द्वारा दी गई जानकारी को बिना जांचे सच मान लेना खतरनाक हो सकता है. एआई खुद से तथ्य नहीं बनाती. वह इंटरनेट पर मौजूद डेटा पर निर्भर करती है. सही और गलत जानकारी के बीच फर्क करना इंसानों की जिम्मेदारी है.
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