3 साल के FD पर मिलेगा 8.30% रिटर्न, दिवाली से पहले इस लघु वित्त बैंक ने बदली ब्याज दरें, यहाँ चेक करें नए रेट
अक्टूबर में फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज दरों (FD Rates) में बदलाव का सिलसिला जारी है। अब जना स्मॉल फाइनेंस बैंक ने एफडी के ब्याज दरों में संशोधन किया है। डॉमेस्टिक, NRE और NRE डिपॉजिट के लिए नए रेट 22 अक्टूबर 2026 से नए रेट लागू हो चुके हैं, इसमें 3 करोड़ रुपये से कम का निवेश किया जा सकता है। अभी भी वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त ब्याज की सुविधा मिल रही है।
बदलाव के बाद एफडी पर सामान्य नागरिकों को 3.50% से लेकर 8% ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को चुनिंदा टेन्योर पर 50 बीपीएस तक अतिरिक्त ब्याज मिल रहा है। ध्यान रखें कि सभी बैंक अलग-अलग वित्तीय कारणों को ध्यान में एफडी के ब्याज दरों में संशोधन करते रहते हैं। इसलिए निवेश से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी शाखा विजिट करने की सलाह दी जाती है।
3 साल के एफडी पर मिल रहा अधिकतम ब्याज
बैंक सबसे अधिक ब्याज 3 साल यानि 1095 दिन के टेन्योर पर मिल रहा है। सामान्य नागरिकों को 8% और वरिष्ठ नागरिकों को 8.30% रिटर्न मिल रहा है। 3 साल से अधिक और 5 साल तक के मैच्योरिटी स्लैब पर सामान्य नागरिकों को 7.77% ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए इंटरेस्ट रेट 8% है। 2 साल से अधिक 3 साल से कं के टेन्योर पर 7.65% इंतरेस्ट मिल रहा है। एक साल से अधिक और 3 साल से कम के टेन्योर पर 7.30% रिटर्न बैंक ऑफर कर रहा है।
टेन्योर वाइज ब्याज दरें चेक करें
- 7 से लेकर 14 दिन- 3.50%
- 15 से लेकर 60 दिन तक- 4.25%
- 61 से लेकर 90 दिन- 4.75%
- 91 से लेकर 120 दिन- 5%
- 121 दिन से लेकर 180 दिन- 6%
- 181 दिन से लेकर 270 दिन- 6.50%
- 271 दिन से अधिक और एक साल से कम- 7%
- 1 साल से अधिक और 2 साल तक- 7.30%
- 2 साल से अधिक और 3 साल से कम- 7.65%
- 3 साल- 8%
- 3 साल से अधिक और 5 साल तक- 7.77%
- 5 साल से अधिक और 10 साल तक- 6.50%
रेकरिंग डिपॉजिट की ब्याज दरें बदली
बैंक ने रेकरिंग डिपॉजिट के लिए भी नई ब्याज दरें 22 अक्टूबर से लागू कर दी हैं। सामान्य नागरिकों को 4.25% से लेकर 8% ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को 4.25% से लेकर 8.30% इंटरेस्ट मिल रहा है। एक महीने से लेकर 120 महीने तक का निवेश ग्राहक कर सकते हैं।
भोपाल मास्टर प्लान-2047 के खिलाफ किसानों का पैदल मार्च, जमकर की नारेबाजी, नीलबड़ में पुलिस ने रोका, जानें क्या हैं मांगें
भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध तेज हो गया है। योजना के नये ड्राफ्ट में कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किये जाने के विरोध में गुरुवार को 66 गांवों के किसान और स्थानीय रहवासी सड़कों पर उतर आये है।
इसके अलावा, मिसरोद के रहवासियों ने पुरानी आबादी के बीच से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को योजना से हटाने की मांग करते हुए नगर तथा ग्राम निवेश (टीएनसीपी) विभाग को लिखित आपत्तियां सौंपीं हैं। दोनों ही पक्षों ने मांग की कि विकास योजना तैयार करते समय स्थानीय आबादी, आजीविका, सार्वजनिक संस्थानों और पर्यावरण के हितों को प्राथमिकता दी जाये।
उनका कहना है कि सड़क से पुराने मकानों, सैकड़ों परिवारों, प्राचीन मंदिरों, सार्वजनिक संस्थानों और 10 से 15 पुराने पीपल-बरगद के पेड़ों पर असर पड़ सकता है। रहवासियों ने संयुक्त स्थल निरीक्षण कर आबादी और सार्वजनिक संस्थानों को कम प्रभावित करने वाले वैकल्पिक मार्ग का तकनीकी सर्वे कराने की मांग की।
पैदल मार्च कर भोपाल पहुंचे सैकड़ों किसान
बता दें कि मुगालिया छाप से सैकड़ों किसान दोपहर करीब 12 बजे पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे। किसान टीएनसीपी कार्यालय जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें नीलबड़ पर बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इससे नाराज किसान सड़क पर धरने पर बैठ गये और नारेबाजी करने लगे। किसानों ने अपनी जमीन और खेती बचाने की मांग उठाते हुये भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट पर आपत्ति जताई। उनका विरोध कृषि भूमि को आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने को लेकर है।
किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित मास्टर प्लान में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किया जा रहा है। इससे हजारों किसानों की खेती और आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने कहा कि वे अपनी आपत्तियां और सुझाव संबंधित विभाग तक पहुंचाने के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि भूमि का उपयोग बदलने से उनके परिवारों के सामने रोजगार और भरण-पोषण का संकट खड़ा हो सकता है।
किसानों और स्थानीय रहवासियों की प्रमुख मांगें
- भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 के कड़े प्रतिबंध हटाए जायें।
- कृषि भूमि का उपयोग केवल खेती के लिए सुरक्षित रखा जाये।
- मास्टर प्लान पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा कम से कम एक माह बढ़ाई जाये।
- फैसला लेने से पहले प्रभावित गांवों में ग्रामसभाएं आयोजित कर किसानों का पक्ष सुना जाये।
- मिसरोद में प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क के लिए वैकल्पिक मार्ग का सर्वे कराया जाये।
- सड़क निर्माण की योजना में मकानों, मंदिरों और प्राचीन पेड़ों को बचाया जाये।
इसके अलावा, किसानों ने मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाये हैं। किसानों का कहना है कि साल 2031 के मास्टर प्लान को लेकर आपत्तियों के दौरान ग्राम पंचायतों की सहमति से प्रारूप तैयार करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन मौजूदा प्रारूप तैयार करते समय गांवों की ग्राम सभाओं की सहमति नहीं ली गई।
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