Abhishek Banerjee का Election Commission पर बड़ा दावा, West Bengal Voter List में मनमाने ढंग से कट रहे नाम
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संचालन में वैधानिक प्रावधानों और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का तिहरा उल्लंघन किया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने दावा किया कि ईसीआईनेट पोर्टल पर चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) के काम की निगरानी करने में असमर्थ हैं।
बनर्जी ने कहा कि यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 13बी और 13सी का उल्लंघन है, जिसमें यह प्रावधान है कि मतदाता सूची ईआरओ द्वारा तैयार और संशोधित की जाएगी और एईआरओ उनकी सहायता करेंगे। तृणमूल सांसद ने दावा किया कि यह उच्चतम न्यायालय के नौ फरवरी और 20 फरवरी के आदेशों के भी विपरीत है, जिनमें कहा गया है कि मतदाता सूची में शामिल करने के संबंध में अंतिम निर्णय ईआरओ द्वारा लिया जाना चाहिए और तार्किक विसंगति/अपरिभाषित श्रेणी के तहत दावों का निपटारा ईआरओ द्वारा अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।
बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि यह निर्वाचन आयोग के 24 जून 2025 को जारी आदेश संख्या 23/2025-ईआरएस (खंड दो) का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति शामिल न हो। इसे तिहरा उल्लंघन बताते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इससे एईआरओ के विवेक पर मनमाने ढंग से और गैरकानूनी रूप से मतदाताओं को हटाने का रास्ता खुल सकता है।
Supreme Court के फैसले से बौखलाए Donald Trump, भारत समेत दुनिया पर ठोका 15% Global Tariff
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि सभी देशों पर एक दिन पहले लागू किए गए 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। ट्रंप की ओर से पहले लगाए गए भारी भरकम शुल्क को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति ने भारत समेत सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए प्रभावी 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था। अमेरिका के 10 प्रतिशत शुल्क पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार ने शनिवार को कहा कि वह इन शुल्कों और उनके प्रभावों का अध्ययन कर रही है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “कल शुल्क को लेकर अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के हास्यास्पद, खराब ढंग से लिखे गए और असामान्य रूप से अमेरिका विरोधी फैसले की गहन, विस्तृत और पूरी समीक्षा व कई महीनों के विचार-विमर्श के बाद मैं अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहा हूं। इन देशों में से कई दशकों से अमेरिका से अनुचित लाभ उठा रहे थे, जिसका (जब तक मैं आया नहीं) कोई प्रतिशोध नहीं लिया गया।”
उन्होंने कहा, “आने वाले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन नए और कानूनी रूप से स्वीकार्य शुल्क निर्धारित करेगा और लागू करेगा, जो ‘अमेरिका को पुनः महान बनाने’ की हमारी सफल प्रक्रिया को जारी रखेंगे।” नयी दिल्ली में वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सरकार अमेरिका में शुल्क से जुड़े ताजा घटनाक्रम और उनके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रही है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “शुक्रवार को सीमा शुल्क के बारे में आए अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संबोधित संवाददाता सम्मेलन की जानकारी हमारे संज्ञान में है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से कुछ कदमों की घोषणा की गई है। हम इन सभी घटनाक्रमों का उनके प्रभावों के संदर्भ में अध्ययन कर रहे हैं।”
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने शुक्रवार को छह-तीन के बहुमत से फैसला दिया कि ट्रंप का आपातकालीन शक्तियों के कानून (आईईईपीए, 1977) के तहत दूसरे देशों पर आयात शुल्क लगाने का कदम वैध नहीं था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति के पास आयात पर कर लगाने का अधिकार नहीं था। अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी ने दिसंबर तक आईईईपीए के तहत जारी शुल्क आदेशों के तहत कुल 133 अरब डॉलर वसूल किए हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस राशि का रिफंड आयातकों को मिल सकता है, लेकिन आम लोगों को यह रिफंड मिलना मुश्किल है, क्योंकि कंपनियों ने बढ़े हुए शुल्क का बोझ कीमत वृद्धि के रूप में उपभोक्ताओं पर डाल दिया था।
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