करोड़ों की टोयोटा लैंड क्रूजर में बड़ी खराबी, कंपनी ने वापस मंगवाईं गाड़ियां; कहीं आपकी SUV तो शामिल नहीं?
दिग्गज कार निर्माता कंपनी टोयोटा ने भारत में अपनी लग्जरी SUV लैंड क्रूजर 300 की 969 यूनिट्स को वापस मंगवाने का ऐलान किया है। यह रिकॉल उन गाड़ियों के लिए है जिनका निर्माण 4 सितंबर, 2024 से 30 सितंबर, 2025 के बीच हुआ है।
Skanda Sashti 2026: स्कंद षष्ठी का व्रत आज, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त, विधि, महत्व और नियम
Skanda Sashti 2026: हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी के व्रत का विशेष महत्व होता है. ये व्रत देवताओं के सेनापति और भगवान शिव के बड़े बेटे भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है. आज यानी 22 फरवरी 2026 को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाएगा. भगवान कार्तिकेय को मुरुगन और सुब्रह्मण्य भी कहा जाता है. हर महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है. स्कंद षष्ठी के दिन व्रत और भगवान कार्तिकेय का विधि-विधान से पूजन करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. इसके अलावा व्रत के प्रभाव से संतानवती माताओं के बच्चों को लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम के बारे में.
स्कंद षष्ठी 2026 तिथि (Skanda Sashti 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत आज यानी 22 फरवरी 2026 की सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 23 फरवरी 2026 की सुबह 09 बजकर 09 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में आज यानी 22 फरवरी 2026, रविवार को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाएगा.
स्कंद षष्ठी 2026 शुभ मुहूर्त
स्कंद षष्ठी के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त 05 बजकर 12 मिनट से लेकर 06 बजकर 03 मिनट तक रहेगा. वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 14 मिनट से 06 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा अमृत काल सुबह 11 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. निशिता मुहूर्त देर रात 12 बजकर 09 मिनट से लेकर 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा.
स्कंद षष्ठी 2026 पूजा विधि (Skanda Sashti 2026 Puja Vidhi)
स्कंद षष्ठी के दिन अगर आप व्रत कर रहे हैं तो सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें. इसके बाद साफ सुथरे कपड़े पहनें. फिर मंदिर की साफ सफाई करें. मंदिर में भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. भगवान कार्तिकेय का विधि-विधान से पूजन करें. उन्हें फल, मिठाई, फूल और मौसमी फल का भोग लगाएं. स्कंद षष्ठी व्रत की कथा का पाठ करें. अंत में भगवान कार्तिकेय की आरती करें.
स्कंद षष्ठी व्रत के नियम
स्कंद षष्ठी के दिन दिनभर ब्रह्माचर्य का पालन करें. सूर्योदय में व्रत की पूजा करें. व्रत का पारण अगले दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद करें. लोगों की बुराई करने से बचे. लड़ाई-झगड़ा न करें और नकारात्मक चीजों से दूरी बनाएं रखें. बाल धोने से बचें.
स्कंद षष्ठी का महत्व
स्कंद षष्ठी का व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, शत्रु नाश, बुद्धि और बल की प्राप्ति के लिए किया जाता है. मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर सच्चे मन से पूजा करता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय मिलती है. साथ ही भगवान सभी इच्छाओं को पूरा भी करते हैं.
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