Naman Dhir की पारी पर बोले Shreyas Iyer, ऑलराउंड क्षमता से Team India को मिलते हैं कई विकल्प
क्राइस्टचर्च में पहले T20I मैच में 'मेन इन ब्लू' (भारतीय टीम) की जीत के बाद, भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने ऑलराउंडर नमन धीर की तूफानी बल्लेबाजी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि नमन को बल्लेबाजी करते देखना शानदार था और अपनी ऑलराउंड क्षमताओं के दम पर वह टीम को कई विकल्प देते हैं। बीच के ओवरों में लड़खड़ाने के बावजूद, संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा के बीच 93 रनों की ओपनिंग साझेदारी और नमन की 15 गेंदों में नाबाद 42 रनों की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने न्यूजीलैंड को 5 विकेट से हरा दिया।
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इस जीत के साथ भारत ने 5 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। भारत ने 226 रनों के लक्ष्य का पीछा किया, जो T20I में उनका अब तक का सबसे बड़ा सफल रन-चेज है। नमन की तेज-तर्रार पारी ने कप्तान श्रेयस अय्यर को दूसरे छोर पर टिके रहने में मदद की, और इन दोनों ने छठे विकेट के लिए अर्धशतकीय साझेदारी निभाई। मैच के बाद नमन के बारे में बात करते हुए अय्यर ने कहा कि वह हमें कई विकल्प देते हैं, खासकर बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ या दाएं हाथ के बल्लेबाजों के सामने भी। इस मैदान पर आकर 2-3 अहम ओवर गेंदबाजी करना मैच का रुख बदल सकता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि आज उन्होंने जिस तरह का शांत और संयमित स्वभाव दिखाया, वह काबिले तारीफ था; उन्हें बल्लेबाजी करते देखना वाकई शानदार था।
T20I की 5 पारियों में, धीर ने 40.00 की औसत और 285.71 के स्ट्राइक रेट से 80 रन बनाए हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 42 रन रहा है। T20 मैचों में 16वें से 20वें ओवर के बीच, इस ऑलराउंडर ने 167 गेंदों में 204.19 के स्ट्राइक रेट से 341 रन बनाए हैं, जिसमें 34 चौके और 19 छक्के शामिल हैं। इस दौरान वह 10 बार आउट हुए हैं। श्रेयस ने बताया कि जब टीम ने गेंदबाजी शुरू की, तो उन्हें लगा कि पिच थोड़ी धीमी है और गेंद रुक-रुक कर आ रही है। हालांकि, बाद में ओस आ गई, जिससे गेंद बल्ले पर अच्छे से आने लगी।
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उन्होंने कहा कि जब हमने गेंदबाजी शुरू की, तो मुझे लगा कि पिच थोड़ी धीमी खेल रही है। गेंद थोड़ी रुक रही थी, और हमने सही 'हार्ड लेंथ' पर गेंदबाजी करने के बजाय थोड़ा आगे गेंदबाजी की। लेकिन जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, ओस आ गई और विकेट पर गेंद तेजी से फिसलने लगी, जिससे वह बल्ले पर बहुत अच्छे से आने लगी। इसी वजह से उन्हें मोमेंटम मिला और वे 220 रन तक पहुंच गए। उनकी कोशिशों की तारीफ करनी होगी, लेकिन जाहिर है कि हमें भी ऐसी ही शुरुआत की जरूरत थी। खासकर जब आप 220 रन का पीछा कर रहे हों, तो 6 ओवर में 80-85 रन तक पहुंचना एक शानदार शुरुआत होती है।
Greg Chappell ने Team India को तोड़ा, Harbhajan Singh ने 2007 World Cup पर किया खुलासा
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 2007 का एकदिवसीय विश्व कप आज भी प्रशंसकों को निराशा की याद दिलाता है। मजबूत खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई थी। उस समय टीम के हेड कोच रहे ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल भी काफी विवादों में रहे थे। अब पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने उस दौर को याद करते हुए चैपल पर टीम के खिलाड़ियों के बीच फूट डालने का गंभीर आरोप लगाया है।
हरभजन सिंह ने प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि चैपल के कार्यकाल में भारतीय टीम की एकता को बड़ा नुकसान पहुंचा था। उनके मुताबिक, चैपल ने ऐसी रणनीति अपनाई, जिसमें खिलाड़ियों के बीच मतभेद बढ़े और टीम का आपसी तालमेल कमजोर हो गया। हरभजन ने इसे भारतीय क्रिकेट के सबसे खराब दौर में से एक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि चैपल को मुख्य कोच बनाना भारतीय क्रिकेट प्रबंधन के सबसे गलत फैसलों में शामिल था।
हरभजन के अनुसार, 2003 के एकदिवसीय विश्व कप में उपविजेता रही भारतीय टीम के खिलाड़ी आपस में काफी अच्छे संबंध रखते थे। उस समय खिलाड़ियों के बीच मजबूत तालमेल था और सभी मिलकर खेलते थे। लेकिन चैपल के आने के बाद स्थिति बदलने लगी। हरभजन का दावा है कि जो खिलाड़ी पहले एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलते थे, उनके बीच बातचीत तक कम हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चैपल ने टीम को अंदर से कमजोर कर दिया।
बता दें कि ग्रेग चैपल और तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के बीच विवाद उस समय भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक था। चैपल के कोच रहते गांगुली को पहले एकदिवसीय टीम और फिर टेस्ट टीम से बाहर होना पड़ा था। इसके बाद राहुल द्रविड़ को भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा बटोरी थी।
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब बीसीसीआई को भेजे गए चैपल के एक ईमेल की बातें सार्वजनिक हो गईं। इसमें गांगुली के प्रदर्शन और नेतृत्व को लेकर आलोचनात्मक बातें सामने आई थीं। गांगुली भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में गिने जाते थे, इसलिए उन्हें टीम से बाहर किए जाने का मुद्दा काफी बड़ा बन गया था। उनकी टीम से अनुपस्थिति पर संसद में भी चर्चा हुई थी।
हरभजन सिंह ने बातचीत में यह भी आशंका जताई कि भारतीय टीम में फूट डालने के पीछे चैपल का कोई दूसरा मकसद हो सकता था। उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय टीम ही ऐसी टीमों में शामिल थी, जो ऑस्ट्रेलिया को लगातार कड़ी चुनौती दे सकती थी। हरभजन के विचार में, अगर भारतीय खिलाड़ी एकजुट नहीं रहते तो मैदान पर उनका प्रदर्शन प्रभावित होना स्वाभाविक था।
उन्होंने यह संभावना भी जताई कि टीम के भीतर मतभेद पैदा होने से ऑस्ट्रेलिया को फायदा मिल सकता था। हालांकि, चैपल ने जानबूझकर ऐसा ऑस्ट्रेलियाई टीम के लाभ के लिए किया था या नहीं, इस बारे में हरभजन ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। यह उनकी व्यक्तिगत राय और उस दौर के अनुभवों पर आधारित आरोप है।
गौरतलब है कि 2007 के विश्व कप में भारत बांग्लादेश से हारने के बाद ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाया था। इसके बाद देशभर में प्रशंसकों ने खिलाड़ियों के खिलाफ नाराजगी जताई थी और कई जगह उनके पुतले तक जलाए गए थे। हरभजन के ताजा बयान ने एक बार फिर उस निराशाजनक दौर, चैपल-गांगुली विवाद और भारतीय टीम के भीतर के माहौल को चर्चा में ला दिया है।
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