क्या है अमेरिका का तेल वाला प्लान? ईरान भी सारी हदें तोड़ने को हुआ तैयार
ईरान ने ऑल आउट मल्टी लेयर जंग के लिए पूरी तैयारी कर ली है। ईरानी मीडिया ने एक सीनियर अफसर के हवाले से लिखा है कि ईरानी फौज पूरी तरह तैयार है। उनका कहना है कि हमलावरों और उनके हिमायतियों के जितने भी ठिकाने हैं हमारी पहुंच में, उनको पूरी ताकत से कुचल देंगे हम। ईरान के मीडिया का दावा है कि सीनियर अफसर ने उन्हें बताया है कि हमने पक्का फैसला कर लिया है। अगर दुश्मन ने हमला किया, कत्ल किया तो हमारा जवाब बिना किसी लिमिट और बिना किसी रोक के होगा। ईरान की नजर में अमेरिका इसराइल के बिना हमला नहीं करेगा और इसराइल अमेरिका के बिना हमला नहीं करेगा। दोनों अलग-अलग जंग करेंगे यह सोचना ही मजाक से कम नहीं। दोनों की वॉर मशीन एक ही है। ईरान के सीनियर सिक्योरिटी अफसर ने मीडिया को बताया है कि अमेरिकी अफसरों और इसराइल हुकूमत ने जो खुलेआम धमकियां दी हैं ईरान पर हमला करने की उसी ने ईरान को कानूनी और नैतिक हक दे दिया है कि वह जरूरी बचाव के लिए अपने कदम उठाए।
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इस बीच एक थ्योरी यह भी चल रही है कि अमेरिका इस बार ईरान के तेल ठिकानों पर अटैक करेगा जिसके पलटवार में मुमकिन है कि ईरान भी अरब देशों में मौजूद तेल फैसिलिटी के अमेरिकी इंटरेस्ट पर वार करें। लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि इसके पीछे अमेरिका की एक सोची समझी प्लानिंग हो सकती है। जिस तरह से ईरान ने होर्मुज को कंट्रोल में लेकर पूरी दुनिया हिला रखी है। अब अमेरिकी चाल यह हो सकती है कि ईरान के तेल जखीरा और रिफाइनरी तो तबाह हो ही साथ ही ईरान के वार से अरब देशों की ऑयल फैसिलिटी भी बर्बाद हो। जिससे दुनिया में तेल की किल्लत बढ़ेगी और अमेरिका वेनेजुएला का तेल अपने मन मुताबिक अपने तय दाम पर बेचेगा। आरोप लगता है कि इस वक्त वेनेजुएला के तेल जखायर पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है और वह मिडिल ईस्ट की तेल की बादशाहत खत्म करना चाहता है। इस बीच ईरान ने साफ किया है कि उसका 1 ग्राम भी यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाएगा। जब तक अमेरिका भरोसा पैदा नहीं करता और ईरान की शर्तें नहीं मानता तब तक न्यूक्लियर के बारे में सोचना भी नहीं है। सीधी भाषा में कहें तो अमेरिका न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर ज्यादा पारदर्शिता चाहता है। जबकि ईरान को चाहिए आर्थिक राहत। हां, इतना मुमकिन है कि ईरान इंटरनेशनल न्यूक्लियर एनर्जी एजेंसी को अपने न्यूक्लियर ठिकानों का बिना पहले से खबर दिए सरप्राइज तौर पर जायजा लेने की इजाजत दे सकता है। लेकिन यह भी दूर की कौड़ी है।
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अभी तो ईरान पूरी ताकत ताकत लगा रहा है कि अगर उसकी शर्त मानी जाती है और जंग टलती है तो वह अमेरिका के जरिए बरसों से लगे सेंशंस के कारण अपनी फ्रीज प्रॉपर्टी और पैसे को किसी भी तरह हासिल करें। और यही वजह है कि वो स्ट्रीट ऑफ हुर्मुस पर खूंटा गाड़ कर बैठ गया है। हाल ही के दिनों में हुरमुस पर जहाजों में आग लगने और डूबने के मामले तेजी से बढ़े हैं और यह ईरान के जरिए बिछाई गई माइंस का असर है। मिडिल ईस्ट में हालात बहुत तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। यमन की हूं और सऊदी की जंग और भीषण होती जा रही है। या यूं कहें कि आर-पार की जंग शुरू हो गई है। इस बीच खबर आ रही है कि एयर इंडिया ने बड़ा फैसला लिया है। एयर इंडिया ने सऊदी अरब के बदलते हालात को देखते हुए रियाद, दम्माम और जिद्दा आने जाने वाली अपनी सभी उड़ाने 20 अक्टूबर 2026 तक रद्द कर दी हैं। इस फैसले से उन मुसाफिरों की दिक्कत बढ़ेगी जिन्होंने उमरा की नियत से टिकट बुक कराए थे। क्योंकि सऊदी में हज के सीजन को छोड़कर साल भर लोग उमरा पर जाते हैं। साथ ही वहां जॉब के सिलसिले में भी बड़ी तादाद में मुसाफिरों का आना-जाना चलता है।
रूस पर चौंकाया...भारत पहुंचते ही अमेरिका के विदेश मंत्री ने किया बड़ा धमाका, सब हैरान!
ट्रंप की बेतुकी बहनबाजी को लेकर जिस तरह से भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास पैदा हो रही थी अब उसमें अचानक से ऐसा बदलाव आया है कि पूरी दुनिया हैरान हो गई है। क्योंकि जो ट्रंप अपने मन मुताबिक डील फाइनल कराने के लिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसके लिए वह टेरिफ को हथियार बना रहे थे। लेकिन अचानक से ट्रंप के ऐसे तेवर बदले कि उन्होंने एक तरह से भारत के आगे सरेंडर कर दिया। दरअसल भारत से रिश्ते सुधारने और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए ट्रंप ने अपनी टीम उतार दी है। इसी टीम में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी शामिल हैं जो अपनी पत्नी के साथ दो दिन के भारत दौरे पर आए। लेकिन जैसे ही वह भारत की धरती पर उतरे और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिले तो उन्होंने धमाकेदार बयान देकर सबको चौंका दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता की जमकर तारीफ की है। उन्होंने भारत को रिफाइनिंग के मामले में महाशक्ति बताते हुए वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में उसकी अहम भूमिका पर जोर दिया है।
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रूबियों ने कहा है कि दोनों देश ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं और कुछ ही मुद्दों का समाधान बाकी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही अच्छी खबर सामने आ सकती है और दोनों देश समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। भारत की तरफ से रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत ने बार-बार अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने की इच्छा व्यक्त की है जो कि एक समझदारी भरा कदम है। इसे एक दिन में रातोंरात करना आसान नहीं है। यह सिर्फ रूसी तेल का मामला नहीं है। यह भारत की ऊर्जा स्रोतों और विविध बनाने की इच्छा के बारे में और हमें लगता है कि हम इसकी ऊर्जा जरूरतों के कुछ स्रोतों की आपूर्ति कर सकते हैं। दरअसल रूबियों की यात्रा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच रूसी तेल की खरीद और टेरिफ को लेकर अहम बातचीत चल रही है। अमेरिकी टेरिफ और बाजार तक पहुंच को लेकर महीनों से बातचीत अटकी हुई थी। भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव का एक प्रमुख मुद्दा रही है। अमेरिकी प्रशासन ने पहले रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टेरिफ लगाने की संभावना जताई थी।
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लेकिन हाल ही में ट्रंप ने रूस से तेल और गैस की खरीद से जुड़े मामलों में भारत को टेरिफ से बड़ी राहत देते हुए अतिरिक्त टेरिफ या नए 100% वाले टेरिफ पर छूट का ऐलान किया था। लेकिन अब रूबियों ने अपने बयानों में संकेत दिया है कि दोनों देश व्यापार समझौते को लेकर गंभीर हैं और बातचीत को जल्द नतीजे तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर साफ है कि अमेरिका भारत से डील करने के पूरे मूड में है।
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