झारखंड के खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी: 'पे एंड प्ले स्कीम' से निखारें अपना स्कील्स
झारखंड के उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और उसे निखारने का एक शानदार अवसर आया है. राज्य के खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग ने 'पे एंड प्ले स्कीम' (Pay & Play Scheme) के जरिए खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से जोड़ने की पहल की है. अब खिलाड़ी रांची के हॉटवार स्थित मशहूर मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पेशेवर तरीके से प्रैक्टिस कर पाएंगे.
इन 11 खेलों की मिलेगी ट्रेनिंग
इस स्कीम के तहत कुल 11 खेलों को शामिल किया गया है, ताकि हर क्षेत्र के खिलाड़ी को मौका मिल सके.
- एथलेटिक्स
- बैडमिंटन
- लॉन टेनिस
- टेबल टेनिस
- शूटिंग
- जिम्नास्टिक
- बास्केटबॉल
- ताइक्वांडो
- वॉलीबॉल
- कुश्ती
- तैराकी (Swimming)
किसे मिलेगी फ्री एंट्री?
सरकार ने कुछ खास वर्गों के लिए इस स्कीम को बिल्कुल फ्री रखा है. कक्षा 10वीं तक के छात्र अगर अपने स्कूल प्रिंसिपल की सिफारिश (लेटर) लेकर आते हैं, तो उनका रजिस्ट्रेशन और मेंबरशिप फ्री होगी. राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके या मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों से कोई फीस नहीं ली जाएगी. एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को 15 दिनों के लिए फ्री एक्सेस मिलेगा (यह सुविधा एक बार के लिए है).
ज़रूरी शर्तें (Eligibility)
- आवेदक झारखंड का रहने वाला होना चाहिए
- खिलाड़ी को राज्य स्तर के खेलों में सक्रिय होना चाहिए
- अन्य खिलाड़ियों को तय की गई रजिस्ट्रेशन फीस (50 रुपये) और मेंबरशिप फीस देनी होगी
आवेदन कैसे करें?
- यह प्रक्रिया ऑफलाइन है, जिसे आप इन स्टेप्स में पूरा कर सकते हैं:
- विभाग की वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें
- फॉर्म में अपनी सही जानकारी भरें और फोटो व ज़रूरी कागज़ात लगाएं
- भरे हुए फॉर्म को 'झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी' के ऑफिस में जमा करें
- रजिस्ट्रेशन फीस और मेंबरशिप फीस (यदि लागू हो) जमा करे
ज़रूरी कागज़ात (Documents)
- दो पासपोर्ट साइज फोटो
- पहचान पत्र (ID Proof)
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- फिटनेस सर्टिफिकेट (यह बताने के लिए कि आपको कोई संक्रामक बीमारी नहीं है)
- फीस के लिए डिमांड ड्राफ्ट
ध्यान दें: इस स्कीम का मकसद खिलाड़ियों को प्रोफेशनल कोच की देखरेख में तैयार करना है ताकि वे भविष्य में राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें.
झुकने को तैयार नहीं प्रेसिडेंट ट्रंप, अदालती झटके के बाद 10% से 15% टैक्स का नया फरमान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को वैश्विक टैरिफ के मुद्दे पर बड़ा ऐलान करते हुए रेसिप्रोकल टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की. यह निर्णय उस समय आया है जब एक दिन पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ को निरस्त कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के तुरंत बाद घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था. अदालत के इस फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लंबा बयान जारी किया.
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला “गलत तरीके से लिखा गया और असाधारण रूप से एंटी-अमेरिकन” है. उन्होंने कहा कि व्यापक समीक्षा के बाद वह तत्काल प्रभाव से 10 प्रतिशत के वैश्विक टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहे हैं, जो “कानूनी रूप से परीक्षण किया गया और पूरी तरह अनुमत स्तर” है.
व्यापार नीति पर सख्ती
राष्ट्रपति ने अपने बयान में दावा किया कि कई देश दशकों से अमेरिका का “आर्थिक शोषण” कर रहे थे और उनकी सरकार ने पहली बार सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि नई टैरिफ दर अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है.
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में वृद्धि से वैश्विक व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है. इससे आयातित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होने की आशंका है, जिसका प्रभाव अमेरिकी उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों पर पड़ सकता है.
राजनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रिया
रिपब्लिकन खेमे में जहां इस कदम को अमेरिकी उद्योगों के समर्थन में उठाया गया साहसिक निर्णय बताया जा रहा है, वहीं डेमोक्रेटिक नेताओं और कई व्यापारिक संगठनों ने इसे न्यायालय के फैसले की अवहेलना करार दिया है. उनका कहना है कि यह कदम कानूनी विवाद को और बढ़ा सकता है.
विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच अधिकारों के टकराव को भी उजागर करता है. आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर नई कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं.
वैश्विक बाजारों पर नजर
टैरिफ में 5 प्रतिशत की वृद्धि से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है. प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया तैयार कर रहे हैं. यदि जवाबी कार्रवाई होती है तो यह वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंकाओं को फिर से बढ़ा सकता है. फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह अपने आर्थिक एजेंडे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है और अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए आगे भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं.
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