T20 World Cup 2026: सुपर-8 में कितने मैच जीतने पर मिल जाएगी सेमीफाइनल की टिकट? देखें पूरा समीकरण
T20 World Cup 2026 Super-8 Semi-final Equations: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज के मुकाबले खत्म हो चुके हैं. सुपर-8 के लिए भारत, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और श्रीलंका ने सुपर-8 में अपनी जगह बनाई है. इन 8 टीमों को 2 ग्रुप में बांटा गया है, जिसमें से टॉप-2 की टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी.
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में 2 ग्रुप में 4-4 टीमों को बांटा गया है. सुपर-8 में सभी 8 टीमें 3-3 मुकाबला खेलेंगी. अब फैंस के मन में सवाल होगा कि सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए टीमों को कितना मैच जीतना होगा, तो चलिए सेमीफाइनल में एंट्री मारने के लिए सुपर-8 का पूरा समीकरण समझते हैं.
सुपर-8 का पूरा समीकरण
सुपर-8 में अगर कोई टीम अपना तीनों मैच जीतने में कामयाब हो जाती है, तो उसका सेमीफाइनल में जाना तय हो जाएगा. वहीं 2 मैच भी जीतकर टीमें सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर सकती हैं. हालांकि इसके लिए नेट रन रेट अहम होगा, लेकिन सुपर-8 में कोई टीम 2 मुकाबला हार जाती है, तो फिर उसका सेमीफाइनल से बाहर होना तय है.
दोनों ग्रुप से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल के लिए करेगी क्वालीफाई
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल के लिए सुपर-8 की 2 ग्रुप से टॉप-2 टीमें क्वालीफाई करेगी. अब देखने दिलचस्प होगा कि कौन से 4 टीमें सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करती हैं. बता दें कि पहला सेमीफाइनल मैच 4 मार्च को खेला जाएगा. जबकि दूसरा सेमीफाइनल मैच 5 मार्च को खेला जाएगा.
पहली बार सुपर-8 में पहुंचा जिम्बाब्वे
जिम्बाब्वे ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अब तक कमाल का प्रदर्शन कर क्रिकेट फैंस को हैरान किया है. जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर इस टूर्नामेंट में बड़ा उलटफेर कर चुका है. जिम्बाब्वे की टीम अब तक एक भी मैच नहीं हारी है. सिकंदर रजा की कप्तानी में जिम्बाब्वे ने तीनों खेले गए मैच में जीत हासिल किया है. जबकि बारिश की वजह से एक मैच रद्द हो गया था. अब सुपर-8 में जिम्बाब्वे का सामना भारत से भी होगा, क्योंकि सुपर-8 में भारत, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे को एक ही ग्रुप में रखा गया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि सुपर-8 में जिम्बाब्वे का प्रदर्शन कैसा रहता है.
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छोटी सी ‘डॉली’ ने बदल दी थी विज्ञान की दिशा, एक 'कोशिका' से जन्मी उम्मीद
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। जितना जीवन रहस्यमयी है उतना ही रोमांच से भरा विज्ञान है। ऐसा ही एक रोमांचक पल 22 फरवरी 1997 को दुनिया के सामने आया। वैज्ञानिक जगत में उस समय हलचल मच गई जब स्कॉटलैंड के शोधकर्ताओं ने दुनिया की पहली सफलतापूर्वक क्लोन की गई स्तनधारी भेड़ डॉली की आधिकारिक घोषणा की। हालांकि डॉली का जन्म 5 जुलाई 1996 को हुआ था, लेकिन उसकी क्लोनिंग की उपलब्धि को सार्वजनिक रूप से इसी दिन सामने लाया गया। यह घटना आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।
डॉली को स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग स्थित रोसलिन इंस्टीट्यूट में तैयार किया गया था। इस परियोजना का नेतृत्व वैज्ञानिक इयान विलमट और उनकी टीम ने किया। शोधकर्ताओं ने ‘सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर’ (एससीएनटी) नामक तकनीक का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में एक वयस्क भेड़ की स्तन ग्रंथि (मैमरी ग्लैंड) की कोशिका से न्यूक्लियस निकालकर उसे एक दूसरी भेड़ के निषेचित अंडाणु में प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद विकसित भ्रूण को तीसरी भेड़ के गर्भ में स्थापित किया गया, जिससे डॉली का जन्म हुआ।
डॉली की खास बात यह थी कि वह किसी भ्रूणीय कोशिका से नहीं, बल्कि एक पूर्ण विकसित वयस्क कोशिका से तैयार की गई थी। इससे पहले वैज्ञानिक समुदाय में यह धारणा थी कि वयस्क कोशिकाएं अपनी विशेषता खो नहीं सकतीं और उनसे पूर्ण जीव का विकास संभव नहीं है। डॉली ने इस मान्यता को चुनौती दी और यह साबित किया कि वयस्क कोशिकाओं में भी संपूर्ण जीव बनाने की क्षमता को पुनः सक्रिय किया जा सकता है।
इस उपलब्धि के बाद दुनिया भर में वैज्ञानिक, नैतिक और सामाजिक स्तर पर गहन बहस शुरू हो गई। एक ओर, इसे चिकित्सा विज्ञान में संभावित क्रांति के रूप में देखा गया—विशेषकर अंग प्रत्यारोपण, आनुवंशिक रोगों के अध्ययन और दवाओं के परीक्षण के क्षेत्र में। दूसरी ओर, मानव क्लोनिंग की आशंका ने नैतिक चिंताओं को जन्म दिया। कई देशों ने इसके बाद मानव क्लोनिंग पर सख्त प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाए।
डॉली का जीवन भी शोध का विषय रहा। 2003 में छह वर्ष की आयु में उसे फेफड़ों की बीमारी के कारण मृत्युदंड (इथोनेशिया) दिया गया। सामान्यतः भेड़ों की आयु 10 से 12 वर्ष होती है, इसलिए यह सवाल भी उठा कि क्या क्लोनिंग से जुड़े जैविक कारक उसके अपेक्षाकृत कम जीवनकाल के लिए जिम्मेदार थे। हालांकि बाद के अध्ययनों में यह संकेत मिला कि डॉली की कई स्वास्थ्य समस्याएं सामान्य भेड़ों जैसी ही थीं।
--आईएएनएस
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