Texas के Big Bend में सीमा दीवार निर्माण पर रोक के खिलाफ Supreme Court पहुंचा ट्रंप प्रशासन
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय से टेक्सास के बिग बेंड क्षेत्र में सीमा पर दीवार का निर्माण फिर शुरू करने की अनुमति दिए जाने का बुधवार को अनुरोध किया। सरकार ने आपातकालीन याचिका दायर कर न्यायाधीशों से अधीनस्थ अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया, जिसके तहत निर्माण कार्य रोक दिया गया था। अधीनस्थ अदालत का यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप की प्रमुख परियोजनाओं में से एक के लिए झटका था।
प्रशासन प्रशांत महासागर से लेकर मैक्सिको की खाड़ी तक सीमा पर दीवार बनाने और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा रहा है लेकिन बिग बेंड इलाके में प्रशासन को पशुपालकों, स्थानीय निवासियों, कारोबारियों और पर्यावरणविदों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस इलाके में अवैध प्रवासन के मामले पहले से ही बेहद कम रहे हैं, इसलिए ऐसी परियोजनाओं पर पैसा खर्च करना बेकार है। इसके अलावा, निर्माण कार्य से इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी नुकसान पहुंच सकता है।
इस परियोजना के तहत बिग बेंड में दीवारें, वाहनों को रोकने के लिए अवरोधक और निगरानी के लिए तकनीकी उपकरण लगाए जाने हैं। परियोजना के विरोधियों ने इसे रोकने के लिए कई मुकदमे दायर किए हैं। इन्हीं में से एक मामले में न्यायाधीश कैथलीन कार्डोन ने दो अक्टूबर को आदेश दिया था कि मामले की अदालत में सुनवाई जारी रहने तक सरकार परियोजना के लगभग 500 मील लंबे क्षेत्र में निर्माण कार्य रोक दे।
यह इस परियोजना का विरोध कर रहे रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों दलों के लोगों की बड़ी जीत थी। सरकार ने दलील दी कि बिग बेंड क्षेत्र में अवैध रूप से सीमा पार करने के मामले अधिक हैं। सरकार का कहना है कि 1996 का कानून गृह सुरक्षा मंत्री को स्पष्ट रूप से व्यापक अधिकार देता है कि वह सीमा के पास दीवार या अन्य अवरोधक और सड़कें बनवाकर लोगों को अवैध रूप से सीमा पार करने से रोक सकें।
विरोधियों ने इस दलील से असहमति जताई। उनका कहना है कि अमेरिकी संसद ने नियमों से छूट देने का अधिकार विशेष रूप से उन इलाकों के लिए दिया था, जहां ‘‘अवैध रूप से सीमा पार करने के मामले अधिक’’ हैं। उन्होंने कहा कि दुर्गम और दूरदराज का बिग बेंड क्षेत्र इस श्रेणी में नहीं आता।
न्यायाधीश कार्डोन ने विरोधियों के पक्ष में फैसला सुनाया।
तमिलनाडु : वंडालूर चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू की पुष्टि, दो दिन के लिए बंद हुई एंट्री
चेन्नई, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। चेन्नई के बाहरी इलाके में स्थित अरिगनर अन्ना जूलॉजिकल पार्क, वंडालूर में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। यहां जलीय पक्षियों में एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस पाया गया है। इसके बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने दो दिन के लिए आम जनता के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
प्रशासन ने घोषणा की है कि गुरुवार और शुक्रवार को पार्क में लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह फैसला संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लिया गया है।
वायरस की पुष्टि मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज की रिपोर्ट से हुई है। रिपोर्ट में साफ हुआ है कि चिड़ियाघर में रखे गए जलीय पक्षी एच5एन1 वायरस से संक्रमित हैं, जो बर्ड फ्लू का कारण है।
पुष्टि के बाद अधिकारियों ने पक्षियों को रखे जाने वाले क्षेत्रों की सफाई और कीटाणुशोधन का काम शुरू कर दिया है। पार्क प्रशासन ने कहा है कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बायोसिक्योरिटी उपायों को और सख्त कर दिया गया है।
यह रोक सिर्फ पक्षी बाड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे पार्क में आम लोगों के प्रवेश पर लागू होगी। लगभग 1,260 एकड़ में फैला वंडालूर चिड़ियाघर चेन्नई के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और हर साल यहां लाखों लोग आते हैं। इसके विशाल परिसर में 150 से ज्यादा प्रजातियों के हजारों जानवर और पक्षी रहते हैं।
पक्षियों के अलावा पार्क में मगरमच्छ, सांप और कछुओं सहित कई तरह के वन्यजीव भी हैं। यहां पर्यटकों को संरक्षित वाहनों से शेर और बाघ जैसे जानवरों को देखने का मौका भी मिलता है। यही सुविधाएं हर साल बड़ी संख्या में लोगों को पार्क की ओर आकर्षित करती हैं।
फिलहाल प्रशासन का ध्यान कीटाणुशोधन, सफाई और बायो सिक्योरिटी को मजबूत करने पर है। दो दिन की बंदी के साथ लोगों को गुरुवार और शुक्रवार को अपनी यात्रा टालने की सूचना दी गई है।
जारी की गई जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि कितने जलीय पक्षी पॉजिटिव पाए गए हैं या क्या किसी पक्षी की मौत हुई है। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि संक्रमण का पता किन परिस्थितियों में चला और लैब पुष्टि से पहले सैंपलिंग की प्रक्रिया क्या थी।
--आईएएनएस
वीकेयू/पीएम
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