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बुक रिव्यू- सुख बाहर नहीं, हमारे भीतर ही है:दुनियावी इच्छाओं की दौड़ से बाहर निकलो, मन के भीतर उतरो, यही सच्चे सुख का रास्ता है

किताब: सुख की खोज, सफल जीवन के प्रैक्टिकल सूत्र लेखक: निर्यापक मुनिश्री वीर सागर जी प्रकाशक: मंजुल मूल्य: 299 रुपए हर व्यक्ति सुख चाहता है, लेकिन सुख की उसकी परिभाषा अलग होती है। कोई पैसा, नौकरी, परिवार या प्रतिष्ठा में सुख खोजता है तो कोई अपनी इच्छाओं के पूरे होने में। कई बार मनचाही चीजें हासिल करने के बाद भी भीतर एक खालीपन बना रहता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या सुख वास्तव में बाहरी परिस्थितियों से मिलता है या उसका संबंध हमारे मन और नजरिए से है? निर्यापक मुनिश्री वीर सागर जी की किताब ‘सुख की खोज’ इसी सवाल के जवाब पर आधारित है। किताब सुख को किसी एक वस्तु, उपलब्धि या परिस्थिति से जोड़ने की बजाय उसे मन की अवस्था के रूप में समझने की कोशिश करती है। किताब में जीवन के उद्देश्य, इच्छाओं, क्रोध, डर, तनाव, ओवरथिंकिंग, आत्म-प्रेम, सकारात्मक सोच, कृतज्ञता और आत्मविश्लेषण जैसे विषयों को सरल तरीके से समझाया गया है। सबसे पहले खुद से सवाल किताब की शुरुआत ही एक जरूरी सवाल से होती है कि ‘हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है?’ मुनिश्री बताते हैं कि इंसान के पास क्षमताएं और संभावनाएं बहुत हैं। लेकिन अक्सर वह भीड़ के साथ चलते-चलते यह भूल जाता है कि वह वास्तव में चाहता क्या है। पैसा, पद और सफलता हासिल करने के बावजूद मन में बेचैनी बनी रहती है। ऐसे में जीवन की दिशा पर दोबारा विचार करना जरूरी हो जाता है। सुख आखिर है क्या? किताब का मूल सवाल यही है कि जिसे हम सुख मान रहे हैं, क्या वह वास्तव में सुख है? मुनिश्री बताते हैं कि इंसान की इच्छाएं लगातार बदलती रहती हैं। बचपन में खिलौने सुख देते हैं, बड़े होने पर अच्छे मार्क्स, नौकरी, पैसा, परिवार, प्रतिष्ठा और दूसरी उपलब्धियां सुख का आधार बन जाती हैं। लेकिन एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी इच्छा पैदा हो जाती है। यहीं से सुख की तलाश एक अंतहीन दौड़ शुरू हो जाती है। किताब पाठक को रुककर यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि सुख पाने के लिए लगातार कुछ हासिल करना जरूरी है। इसके बजाय अपनी सोच और नजरिए को बदलना ज्यादा जरूरी है। किताब के पांच खंड यह किताब पांच खंडों में विभाजित है- पहला खंड– ‘सुख को समझें’ दूसरा खंड– ‘मनोविकारों को जीतें’ तीसरा खंड– ‘निडर मन से मजबूत जीवन बनाएं’ चौथा खंड– ‘जीवन विकास के सूत्र’ पांचवां खंड– ‘संभावनाओं का खजाना- आप’ किताब के 10 मुख्य सबक ग्राफिक में देखिए- वर्तमान में जीना क्यों जरूरी? किताब में ‘वर्तमान में जीने’ और ‘ओवरथिंकिंग से बचने’ पर बात की गई है। इंसान अक्सर बीती बातों को लेकर पछताता रहता है या भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। ऐसे में वर्तमान उसकी नजर से ओझल हो जाता है। इस बारे में किताब में मुनिश्री लिखते हैं- डर से भागें नहीं, सामना करें किताब का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डर को लेकर है। डर कई बार किसी वास्तविक खतरे से ज्यादा हमारे मन की प्रतिक्रिया होती है, जैसेकि- ये डर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार काम करने से रोकते हैं। किताब में मुनिश्री डर से बचने की बजाय उसका खुलकर सामना करने की बात कहते हैं। सकारात्मक सोच से जीवन होता आसान किताब में सकारात्मक सोच को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यहां सकारात्मक सोच का अर्थ यह नहीं कि जीवन में समस्याएं नहीं आएंगी। बल्कि मुश्किल परिस्थितियों के बीच व्यक्ति अपना नजरिया कैसा रखता है, यह महत्वपूर्ण है। रिश्तों में अपेक्षा कम, समर्पण ज्यादा किताब केवल व्यक्ति के भीतर की दुनिया तक सीमित नहीं है। रिश्तों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कहती है। अक्सर रिश्तों में हमारी खुशी इस बात पर निर्भर हो जाती है कि सामने वाला हमारे लिए क्या कर रहा है। अपेक्षाएं बढ़ने पर रिश्तों में तनाव भी बढ़ सकता है। मुनिश्री किताब में निस्वार्थ भाव से रिश्ते निभाने और बदले में अपेक्षा न रखने की बात कहते हैं। किताब की खासियत किताब की सबसे अच्छी बात इसका प्रैक्टिकल अप्रोच है। पांचों खंडों में अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने के बाद उनसे जुड़े अभ्यास भी दिए गए हैं। ये अभ्यास सीधे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं, जैसेकि- किताब में सेल्फ-अवेयरनेस को ‘WATCH YOURSELF’ के एक सरल सूत्र से समझाया गया है। इसके जरिए पाठक को अपने शब्दों, काम, विचार, संगति और आदतों पर नजर रखने के लिए कहा गया है- यह सूत्र व्यवहार में बदलाव के लिए किसी बड़े संकल्प की बजाय छोटी-छोटी चीजों पर नजर रखने के लिए कहता है। इसे रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सकता है। किताब में ऐसे कई अभ्यास भी बताए गए हैं, जो प्रैक्टिकल लाइफ को आसान बनाने में मदद करते हैं। ग्राफिक में देखिए, ये किताब किन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। किताब के बारे में मेरी राय किताब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सुख को जीवन जीने के तरीके की तरह देखती है। किताब बार-बार पाठक को बाहर की परिस्थितियों से हटाकर अपने मन की ओर देखने के लिए प्रेरित करती है। पांच खंडों में विषयों का क्रम भी काफी सहज है। पहले सुख को समझने की कोशिश होती है, फिर उन मनोविकारों की बात आती है, जो सुख में बाधा बनते हैं। इसके बाद डर और तनाव से निपटने, जीवन को बेहतर बनाने के सूत्र और अंत में अपनी संभावनाओं को पहचानने की दिशा दिखाई गई है। सबसे उपयोगी बात है कि हर अध्यायों के साथ दिए गए अभ्यास जीवन की परिस्थितियों पर विचार करने और खुद में बदलाव शुरू करने का मौका देते हैं। ……………… ये बुक रिव्यू भी पढ़िए बुक रिव्यू- जिंदगी का साथ निभाता चला गया: साहिर लुधियानवी का जिंदगीनामा, जहां मोहब्बत, बगावत, तन्हाई और शायरी, सब साथ चलते हैं बहुत सादगी से लेखक साहिर की जिंदगी के एक-एक किरदार से हमारा परिचय कराते हैं। कहीं भी अनावश्यक सनसनी नहीं है। न प्रेम प्रसंगों में, न विवादों में और न ही उनके संघर्षों में। यही संयम किताब को विश्वसनीय बनाता है। पूरी खबर पढ़ें…

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जरूरत की खबर- किचन–सिंक में कभी न डालें 10 चीजें:जमेगी गंदगी, पाइप होगा ब्लॉक, सिंक हाइजीन मेन्टेन करने के 7 टिप्स

किचन का सिंक घर की उन जगहों में से एक है, जिसका इस्तेमाल दिनभर होता है। सुबह की चाय से लेकर रात के बर्तनों तक, दिनभर न जाने कितना पानी और कचरा इसके रास्ते से गुजरता है। हममें से ज्यादातर लोग बचा हुआ तेल, चायपत्ती, आटा, चावल या खाने के छोटे-छोटे टुकड़े सिंक में बहा देते हैं। उस वक्त लगता है कि पानी सब कुछ अपने साथ ले गया। लेकिन जो चीजें पानी के साथ बह जाती हैं, वे हमेशा पाइप से बाहर नहीं निकलतीं। कई बार ये पाइप में फंस जाती हैं या उसकी दीवारों पर जमने लगती हैं। धीरे-धीरे यही जमा कचरा बदबू और सिंक जाम होने जैसी समस्याओं की वजह बनता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में किचन सिंक ब्लॉकेज पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- किचन सिंक ब्लॉक क्यों होता है? जवाब- किचन सिंक की पाइपलाइन के अंदर समय के साथ गंदगी की लेयर जमा होने लगती है। यह लेयर पाइप का रास्ता धीरे-धीरे संकरा कर देती है। इससे पानी का बहाव कम होने लगता है और सिंक जाम हो जाता है। सवाल- हमारी किन गलतियों के कारण सिंक ब्लॉक हो सकता है? जवाब- किचन सिंक अचानक जाम नहीं होता। ज्यादातर मामलों में हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें इसकी वजह बनती हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- वो कौन-सी चीजें हैं, जिन्हें भूलकर भी सिंक में नहीं डालना चाहिए? जवाब- कुछ चीजें पानी में फूल जाती हैं और कुछ चिपचिपी परत बना लेती हैं। यही वजह है कि घरेलू इस्तेमाल की चीजों को किचन सिंक में डालने से बचना चाहिए। ग्राफिक में इन चीजों की लिस्ट देखिए- सवाल- ये 10 चीजें सिंक में डालने से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- नीचे ग्राफिक में दी गई टेबल से समझिए कि कौन-सी चीज क्या नुकसान पहुंचा सकती हैं- सवाल- इन 10 चीजों को डिस्पोज करने का सेफ तरीका क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या पानी आसानी से निकल रहा है, फिर भी पाइप के अंदर गंदगी जमा हो सकती है? जवाब- हां ऐसा हो सकता है। पाइप के अंदर गंदगी, ग्रीस और अन्य कण धीरे-धीरे जमा हो सकते हैं, जबकि ऊपर से पानी सामान्य रूप से बहता हुआ दिखाई देता है। दरअसल, पाइप में समस्या तब नजर आती है, जब जमा हुई गंदगी पानी के बहाव को प्रभावित करने लगती है। इसलिए सिर्फ पानी का निकलना ही पाइप की सफाई का पैमाना नहीं है। सवाल- क्या दूध, दही और क्रीम जैसी चीजें भी पाइप में समस्या पैदा कर सकती हैं? जवाब- हां, इन चीजों में फैट और प्रोटीन होते हैं। यह सीवर सिस्टम में जाकर अन्य कचरे के साथ मिल सकते हैं। इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट्स जल्दी खराब होते हैं। इनके अवशेष पाइप या ड्रेन में स्मेल पैदा करते हैं और बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं। सवाल- क्या किचन सिंक की गंदगी से फूड कंटैमिनेशन का रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, किचन सिंक का इस्तेमाल रोज फल-सब्जियां धोने, बर्तन साफ करने और खाना बनाने से जुड़ी कई गतिविधियों में होता है। ऐसे में अगर सिंक साफ न हो तो गंदगी और खाने के अवशेष फल-सब्जियों या साफ बर्तनों के संपर्क में आ सकते हैं। सवाल- कौन-से संकेत बताते हैं कि पाइप ब्लॉक हो रहा है? जवाब- पाइप पूरी तरह जाम होने से पहले कुछ बदलाव नजर आते हैं। अगर समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए, तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। ग्राफिक में पाइप ब्लॉकेज के सभी संकेत देखिए- सवाल- अगर सिंक जाम हो जाए तो क्या करें? जवाब- हल्के ब्लॉकेज की स्थिति में कुछ आसान घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं। ग्राफिक में सभी उपाय देखिए- सवाल- किचन सिंक को ब्लॉकेज से बचाने के लिए क्या करें? जवाब- कुछ आसान आदतों से लंबे समय तक पाइपलाइन में ब्लॉकेज की समस्या नहीं होती, जैसेकि- सवाल- किचन सिंक की सफाई कैसे करें? हाइजीन कैसे मेंटेन करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- किचन सिंक से जुड़े कुछ कॉमन सवाल जवाब सवाल- क्या चायपत्ती बायोडिग्रेडेबल होने के कारण सुरक्षित है? जवाब- बायोडिग्रेडेबल होने के बावजूद यह पाइप में फंस सकती है। सवाल- क्या थोड़ा-सा चावल या आटा नुकसान पहुंचा सकता है? जवाब- बार-बार ऐसा करने से धीरे-धीरे ब्लॉकेज बनने लगता है। सवाल- क्या नींबू के छिलके सिंक में डाल सकते हैं? जवाब- नहीं, नींबू के छिलकों को सिंक में बहाने की बजाय कम्पोस्ट या गीले कचरे में डालना बेहतर विकल्प है। ……………………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा …………………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- टॉयलेट सीट से ज्यादा कीटाणु किचन-स्क्रब में:गीला रहने से पनपते बैक्टीरिया, स्क्रब हमेशा सूखा रखें, तीन हफ्ते में बदलें जर्म्स, वायरस या बैक्टीरिया से छुटकारा पाने के लिए हम सभी किचन की नियमित साफ-सफाई करते हैं। किचन की साफ-सफाई में स्पंज या स्क्रब का बड़ा रोल होता है। मसाले रखने वाले स्लैब, डिब्बों, गैस चूल्हा या हर रोज के बर्तनों को साफ करने के लिए अधिकांश लोग स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं। ये खबर भी पढ़ें…

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मैच में 10 विकेट, हाथ में प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड... और फिर करियर खत्म! ये चीफ सिलेक्टर प्रज्ञान ओझा की कहानी है

भारत के पूर्व स्पिन गेंदबाज प्रज्ञान ओझा को हाल ही में चीफ सिलेक्टर नियुक्त किया गया. उन्होंने अजीत अगरकर की जगह ली है. प्रज्ञान टीम इंडिया के लिए अपने करियर में 24 टेस्ट मैच खेले. उनका आखिरी मैच साल 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वानखेड़े में था, लेकिन उसके बाद फिर उन्हें कभी टीम इंडिया के लिए मौका नहीं मिल पाया. Thu, 22 Oct 2026 09:54:36 +0530

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