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सीएम योगी ने यूपी के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जारी किया आदेश, ये कोर्स करना किया जरूरी

UP News: उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में सरकारी कर्मचारी और अधिकारी स्मार्ट और हाईटेक नजर आएंगे. दरअसल, योगी सरकार ने 'मिशन कर्मयोगी भारत' के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. जिसके लिए योगी सरकार राज्य के सभी 63 विभागों के 17 लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है. इस संबंध में राज्य के प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक ने आदेश भी जारी कर दिया है. जिसमें साफ कहा गया है कि तकनीकी दक्षता अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य होगी.

सहकारी आदेश के बाद मची हलचल

बता दें कि योगी सरकार ने 12 फरवरी को इसे लेकर आदेश जारी किया था. इसके अगले दिन यानी 13 फरवरी को प्रमुख सचिव नियुक्ति की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई. जिसमें सभी विभागाध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए गए. जिसमें कहा गया कि वे अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों का पंजीकरण 'कर्मयोगी भारत' पोर्टल पर सुनिश्चित करें. सरकारी आदेश के मुताबिक, सभी कर्मचारियों को पोर्टल पर उपलब्ध कुल तीन पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करना होगा. इनमें 'एआई का परिचय' का कोर्स करना अनिवार्य होगा.

कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन का किया गया गठन

बता दें कि योगी सरकार ने सिर्फ आदेश ही जारी नहीं किया है बल्कि इस प्रशिक्षण को सुव्यवस्थित ढंग से लागू करने के लिए 'कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन' का भी गठन किया है. जो विशेषज्ञों के साथ मिलकर कर्मचारियों के लिए ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करेगा, जो सरकारी कामकाज में मददगार साबित हो. इसी कड़ी में आवास विभाग ने भी अपने स्तर पर 'प्रदेश स्तरीय कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन' का गठन किया है. जिससे विभाग में डिजिटल कार्यक्षमता को जल्द से जल्द बढ़ाया जा सके.

जानें क्या है सरकार का लक्ष्य

दरअसल, योगी सरकार का लक्ष्य डिजिटल प्रशासन और स्मार्ट वर्किंग का है. शासन के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वक्त में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली में काफी बदलाव लाएगी. डिजिटल प्रशासन की ओर बढ़ते कदम के एआई की मदद से फाइलों का जल्द से जल्द निस्तारण, जनशिकायतों के सटीक समाधान और भारी भरकम डेटा का विश्लेषण करने में आसानी होगी. 

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लापरवाही करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

सरकारी आदेश में सख्त चेतावनी भी दी गई है. जिसमें साफ किया गया है कि जो अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित समयसीमा के भीतर एआई कोर्स पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि योगी सरकार ऐसा कर राज्य के हर सरकारी कार्यालय को कागजी खानापूर्ति से बाहर निकालना है.

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AC Buying Guide: Summer में एसी खरीदने का है Plan? 3-Star और 5-Star का कन्फ्यूजन यहां दूर करें

धीरे-धीरे मौसम में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। गर्मी शुरु होते ही एयर कंडीशनर की मांग बढ़ने लगती है, लेकिन जब हम एसी खरीदने जाते हैं, तो सबसे बड़ा कन्फ्यूजन होता है कि तीन स्टार वाला लें या पांच स्टार वाला। अक्सर होता है कि कई लोग कीमत देखकर ही एसी खरीद लेते हैं बाद फिर बिल ज्यादा आने कारण पछताते रहते हैं। 
एसी पर लगी स्टार रेटिंग उसकी बिजली बचाने की क्षमता को दर्शाती है। भारत में यह रेटिंग ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा निर्धारित की जाती है। किसी भी एसी या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर जितने अधिक स्टार होते हैं, वह उतनी ही कम बिजली की खपत करता है। कम स्टार वाले उपकरण अधिक बिजली खर्च करते हैं। उदाहरण के तौर पर, 5 स्टार एसी, 3 स्टार एसी की तुलना में कम बिजली उपयोग करता है, लेकिन इसकी खरीद कीमत थोड़ी अधिक हो सकती है।

एसी की स्टार रेटिंग कैलकुलेशन को समझें

मान के चलें कि, यदि 1.5 टन एसी रोज 8 घंटे और महीने में 25 दिन चलता है और बिजली दर आठ रुपये प्रति यूनिट है, तो स्टार रेटिंग का अंतर सीधे बिल पर दिखता है। आपको बता दें कि, तीन स्टार एसी लगभग 1.5 यूनिट प्रति घंटा खपत करता है, यानी 300 यूनिट प्रति महीना और करीब 2400  रुपये बिल। दूसरी तरफ, 5 स्टार एसी औसतन 1.25 यूनिट प्रति घंटा खपत करता है, यानी लगभग 250 यूनिट प्रति महीना, लगभग 2000 हजार रुपये बिल। इससे यह पता चलता है कि केवल रेटिंग बदलने से ही हर महीने करीब 400 और साल में लगभग 4,800 रुपये की बचत होगी।

कैसे बचत होगी?

स्पष्ट है कि स्टार रेटिंग वाला एसी शुरुआत में थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन उसकी बेहतर ऊर्जा दक्षता के कारण बिजली की खपत कम होती है और चलाने का खर्च घट जाता है। आमतौर पर 2–3 साल के भीतर इसकी अतिरिक्त कीमत बिजली की बचत से वसूल हो जाती है। इसके बाद यह लंबे समय तक वास्तविक बचत प्रदान करता है और आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होता है।

3-स्टार एसी कब लेना चाहिए?

यदि एसी का प्रयोग सीमित है, सिर्फ रात में 3-4 घंटे या साल में कुछ ही महीनों के लिए, तो कम लागत वाला 3 स्टार मॉडल सही चॉइज हो सकती है। सीमित बजट और कम प्रयोग पैटर्न में इसकी कुल स्वामित्व लागत संतुलित रहता है।

5-स्टार एसी कब लेना चाहिए?

रोजाना आप एसी को लगभग 6-7 घंटे तक चलाते हैं, या आप अत्यधिक गर्म स्थान जैसे कि जयपुर, दिल्ली या नागपुर में रहते हैं, तो 5-स्टार मॉडल बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। लंबी अवधि में एसी चलाने से बिजली खपत और स्थिर प्रदर्शन इसे आर्थिक रुप से बेहतर निवेश बनाते हैं। 

खरीदते समय न करें ये गलती

अक्सर होता है कि लोग इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते समय केवल उसकी कीमत देखकर फैसला कर लेते हैं, जबकि सही निर्णय लेने के लिए उपयोग के घंटों, स्थानीय बिजली दरों और अगले 5–7 वर्षों की संभावित उपयोग अवधि को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए एसी खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि एसी एक लंबे समय तक चलने वाली वस्तु है, इसलिए शुरु में ज्यादा पैसा लगाकर लंबे समय तक आप सेविंग कर सकते हैं। 

ये नियम जान लें

- ज्यादा चलाना है तो 5-स्टार चुनें।

-कम उपयोग है तो 3-स्टार भी पर्याप्त हो सकता है।

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  Sports

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