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टैरिफ डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीति का केंद्रीय हिस्सा बना रहेगा : अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट

वॉशिंगटन, 21 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि शुल्क नीति यानी टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रहेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन को एक विशेष कानूनी प्रावधान के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार के उपयोग पर रोक लगा दी है। हालांकि वित्त मंत्री ने संकेत दिया इससे सरकार की व्यापक व्यापारिक नीति में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आएगा।

डलास के इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सीधे तौर पर अदालत के फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि छह न्यायाधीशों ने स्पष्ट रूप से फैसला सुनाया है कि आईईईपीए (अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम) के तहत मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल एक डॉलर भी राजस्व जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कोर्ट के इस फैसले को झटका बताने वाले आलोचकों को करारा जवाब दिया। बेसेंट ने कहा कि डेमोक्रेट्स, गलत जानकारी देने वाले मीडिया संस्थानों और हमारे औद्योगिक आधार को तबाह करने वाले लोगों के बेबुनियाद जश्न के बावजूद, अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ फैसला नहीं सुनाया है। इसके अलावा उन्होंने निरंतरता का संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन आईईईपीए टैरिफ को बदलने के लिए वैकल्पिक कानूनी अधिकारों का सहारा लेगा। उन्होंने धारा 232 और धारा 301 के तहत टैरिफ से संबंधित अधिकारों का हवाला दिया, जिन्हें उन्होंने हजारों कानूनी चुनौतियों के माध्यम से मान्य बताया।

बेसेंट ने आगे कहा कि ट्रेजरी के अनुमानों से पता चलता है कि धारा 122 के अधिकार का उपयोग, संभावित रूप से बढ़ाई गई धारा 232 और धारा 301 के टैरिफ के साथ मिलकर, 2026 में टैरिफ राजस्व में लगभग कोई बदलाव नहीं लाएगा। उनकी इन बातों से स्पष्ट है कि व्यापार प्रवर्तन और टैरिफ का प्रभाव आर्थिक सुरक्षा एजेंडा का अभिन्न अंग बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक सुरक्षा वह आधार है जो किसी देश को अपने लोगों की सुरक्षा के अपने सबसे बुनियादी दायित्व को पूरा करने में सक्षम बनाता है। इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका को औद्योगिक क्षमता को बहाल करना चाहिए और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न कमजोरियों को कम करना चाहिए। चीन संकट का जिक्र करते हुए बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने 1999 और 2011 के बीच लगभग 6 मिलियन विनिर्माण नौकरियां खो दीं, जिससे रणनीतिक उद्योग और प्रोडक्टिव फ्लेक्सबिलिटी कमजोर हो गया।

उन्होंने कहा कि हमारी नीतियों ने कंपनियों को अपनी सोर्सिंग रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने और अमेरिकी विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में खरबों डॉलर का नया निवेश करने के लिए मजबूर किया है। व्यापारिक साझेदारों के लिए संदेश सीधा था कि प्रशासन अपनी आर्थिक रणनीति के तहत टैरिफ का उपयोग करना जारी रखेगा, भले ही कानूनी प्रक्रिया बदल जाए।

बता दें कि धारा 232 और 301 पर विशेष जोर दिया गया है। धारा 232 राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ लगाने की अनुमति देती है, जबकि धारा 301 अनुचित व्यापार प्रथाओं को लक्षित करती है। हाल के वर्षों में, चीन से जुड़े व्यापारिक मामलों सहित, इन दोनों का व्यापक रूप से उपयोग किया गया है।

भारत, जिसने व्यापार वार्ताओं और क्षेत्र-विशिष्ट चर्चाओं में वाशिंगटन के साथ सक्रिय रूप से भाग लिया है, उसके लिए टैरिफ उपकरणों पर निरंतर निर्भरता यह संकेत देती है कि आर्थिक सुरक्षा संबंधी विचार अमेरिकी व्यापार नीति से गहराई से जुड़े रहेंगे।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और औद्योगिक उत्पादन को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों के रूप में पेश किया है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में, यह संबंध और भी गहरा होने की संभावना है, क्योंकि टैरिफ राजस्व और प्रभाव को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक कानूनी तंत्र तैयार हैं। बेसेंट की इन बातों से साफ संकेत है कि भले ही कानूनी ढांचा बदल जाए, अमेरिकी व्यापार नीति की व्यापक दिशा - आक्रामक, सुरक्षा-केंद्रित और टैरिफ-समर्थित - अपरिवर्तित रहेगी।

--आईएएनएस

सत्यम/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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1912 से चली आ रही परंपरा में जुड़ा नया अध्याय, मेलानिया ट्रंप ने 2025 शपथग्रहण गाउन म्यूजियम को किया दान

वॉशिंगटन, 21 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने अपनी 2025 के शपथग्रहण समारोह में पहने गए गाउन को स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ अमेरिकन हिस्ट्री को दान कर दिया है। उन्होंने कहा कि “अमेरिका का फैशन उद्योग दुनिया का नेतृत्व कर सकता है।” मेलानिया ने कहा, “हर सिलाई में मानवीय भावना समाई होती है।

यह गाउन अब संग्रहालय के ऐतिहासिक ‘फर्स्ट लेडीज कलेक्शन’ का हिस्सा बन गया है। 1912 में स्थापित इस संग्रह में प्रथम महिलाओं द्वारा पहने गए शपथग्रहण परिधानों को प्रदर्शित किया जाता है और यह स्मिथसोनियन की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली प्रदर्शनियों में से एक है।

मेलानिया ने कहा, “यह सिर्फ एक ड्रेस नहीं है। यह 50 से अधिक वर्षों की शिक्षा, अनुभव और समझ का परिणाम है, जो हर धागे और हर सिलाई में झलकता है।”

यह ऑफ-व्हाइट सिल्क क्रेप का स्ट्रैपलेस गाउन डिजाइनर हार्वे पियरे ने तैयार किया था, जिसे काले सिल्क गजार से सजाया गया है। इसे हैरी विंस्टन द्वारा 1955 में बनाए गए हीरे के ब्रोच की प्रतिकृति के साथ पहना गया था, जिसे काले रिबन चोकर पर लगाया गया था।

मेलानिया ट्रंप ने इस डिजाइन को अमेरिकी कारीगरी को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे जटिल परिधान को तैयार करना आसान नहीं होता और इसके पीछे पैटर्न मेकर्स, दर्जियों और कारीगरों की एक उत्कृष्ट टीम का योगदान होता है। यह इस बात का प्रमाण है कि अमेरिका का फैशन उद्योग दुनिया का नेतृत्व क्यों कर सकता है।

मेलानिया ट्रंप ने कहा, “मुझे डिजाइन की पूरी प्रक्रिया, शुरुआत से अंत तक बेहद पसंद है। इसमें समय लगता है, यह धीमी प्रक्रिया है, लेकिन परिणाम हमेशा जादुई होता है।”

उन्होंने कहा, “हमें न केवल अपनी देखभाल की छोटी-छोटी परंपराओं पर गर्व करना चाहिए, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति के साहसिक कदम पर भी—जो दुनिया के सामने हमारे व्यक्तित्व को दर्शाता है।”

मेलानिया ट्रंप पहली ऐसी प्रथम महिला हैं जिन्होंने दूसरी बार अपना शपथग्रहण गाउन दान किया है। वह इतिहास की दूसरी प्रथम महिला हैं जिनके दो शपथग्रहण गाउन इस संग्रह में शामिल हैं। उनसे पहले यह सम्मान 1897 और 1901 में आइडा मैकिनले को मिला था।

यह गाउन अब नेशनल म्यूजियम ऑफ अमेरिकन हिस्ट्री में आम जनता के लिए प्रदर्शित है। संग्रहालय प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक खुला रहता है और प्रवेश निशुल्क है।

स्मिथसोनियन का फर्स्ट लेडीज कलेक्शन एक सदी से भी अधिक पुराना है और इसमें गाउन से लेकर निजी सामान और व्हाइट हाउस की यादगार वस्तुओं तक लगभग 1,000 वस्तुएं शामिल हैं। इस प्रदर्शनी को लंबे समय से राष्ट्रपति जीवनसाथियों की बदलती शैली और सार्वजनिक भूमिकाओं के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है।

--आईएएनएस

सत्यम दुबे/वीसी

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