'CRPF के बिना नहीं की जा सकती देश की आंतरिक सुरक्षा की कल्पना', गुवाहाटी में बोले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
Amit Shah News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को असम के गुवाहाटी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 87वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान गृह मंत्री के साथ असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा भी मौजूद रहे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभा संबोधित किया. अमित शाह ने कहा कि सीआरपीएफ 86 साल से अपने उत्कृष्ठ प्रदर्शन, शौर्य, धैर्य, वीरता और बलिदान के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत कर रही है.
'CRPF के बिना देश की आंतरिक सुरक्षा की नहीं की जा सकती कल्पना'
उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा की कल्पना सीआरपीएफ के बिना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि 86 साल में सीआरपीएफ ने इस देश की आंतरिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ अपनी कर्तव्य परायणता के कारण बनकर परफॉर्म भी किया है और परिणाम भी दिए हैं. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में 2270 जवान अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं. गृह मंत्री ने सभी जवानों के नमन करते हुए कहा कि उनकी कर्तव्य परायणता और बलिदानी जज्बे के कारण ही कई मौकों पर देश को बचाने का काम देश को सुरक्षित करने का काम सीआरपीएफ के जवानों ने किया है.
#WATCH | Assam: At the 87th CRPF Day Parade in Guwahati, Union Home Minister Amit Shah says, "Stone pelting incidents in Kashmir have become zero. Industries are coming up, and development is taking place. CRPF, BSF and especially Jammu & Kashmir Police have a huge contribution… pic.twitter.com/NfdR0PvQMY
— ANI (@ANI) February 21, 2026
आंतरिक सुरक्षा के लिए नासूर बन गए थे ये इलाके
गृह मंत्री ने आगे कहा कि, 11-12 साल पहले इस देश में तीन बड़े हॉट स्पॉट थे, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नासूर बनकर उभरे थे, जम्मू-कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद-माओवादी क्षेत्र और हमारा उत्तर पूर्व. अब आज स्थानों पर हमें शांति स्थापित करने में सफलता मिली है और ये तीनों क्षेत्र एक जमाने में बम धमाके, गोलियां, बंद, ब्लॉकेज और विनाश का दृश्य बनते थे, वहीं तीनों क्षेत्र आज देश के विकास का ग्रोथ इंजन बनकर समग्र देश को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं.
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गृह मंत्री ने बताया सीआरपीएफ के कितने जवानों ने दिया बलिदान
गृह मंत्री शाह ने कहा कि, ये हमारे लिए बहुत आनंद और गर्व का विषय है. शाह ने कहा कि मैं देश की जनता को ये भी याद दिलाना चाहता हूं कि तीनों क्षेत्र को शांत करने में. अगर मैं पूर्वोत्तर की बात करूं तो यहां 700 सीआरपीएफ के जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है. उसके कारण अब पूर्वोत्तर में शांति है. नक्सलवादी क्षेत्र में 780 जवानों ने अपना बलियान दिया, जम्मू-कश्मीर में लगभग 540 जवानों ने अपना बलिदान दिया और बाकी पूरे देश में ढाई सौ से ज्यादा जवानों ने अलग-अलग स्थानों पर अपना बलिदान दिया है. शाह ने कहा कि, 'इन बलिदानियों के बगैर इन तीनों हॉट स्पॉट को आज विकास के रास्ते पर ले जाना असंभव होता. अगर सिर्फ असम की बात करूं तो 79 जवानों ने शांति स्थापित करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है.'
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Bihar Politics: लालू पर ‘धृतराष्ट्र’ वाली टिप्पणी से भड़की सियासत, तेजस्वी का मैथिली ठाकुर पर तीखा पलटवार
Bihar News: बिहार विधानसभा में दिए गए एक बयान को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है. आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर पर तीखा हमला बोला है. तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए उनका फोटो साझा करते हुए कहा कि कुछ लोग विधायक बनते ही खुद को राजनीति का बड़ा जानकार समझने लगते हैं.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, गुरुवार को विधानसभा में बोलते हुए अलीनगर से पहली बार विधायक बनी मैथिली ठाकुर ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के अपने छोटे बेटे के प्रति स्नेह की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र और दुर्योधन से की थी. हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन “2005 से पहले का बिहार” कहकर उन्होंने उस दौर की ओर इशारा किया जब राज्य में आरजेडी की सरकार थी. उनके इस बयान को लेकर सदन में भी हलचल देखी गई.
तेजस्वी यादव ने कसा तंज
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि विधानसभा की बुनियादी जानकारी भी ठीक से समझे बिना कुछ लोग ‘जननायक’ पर कटाक्ष करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दरभंगा जिले में हाल ही में हुई दलित लड़की के दुष्कर्म और हत्या की घटना पर संबंधित विधायक ने कोई आवाज नहीं उठाई.
पहले अपने क्षेत्र की स्थिति पर दें ध्यान- तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि जो लोग आरजेडी शासनकाल को ‘जंगल राज’ बताते हैं, उनके अपने परिवार ने हाल ही में मधुबनी जिले में चोरी की शिकायत दर्ज कराई है, जबकि राज्य में उनकी ही पार्टी की सरकार है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले अपने क्षेत्र और सरकार की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए.
आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहर सकता है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर बड़े नेताओं और पुराने शासनकाल से जुड़ा हुआ है.
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