Tamil Nadu Elections 2026 | द्रमुक ने कसी कमर, सीट बंटवारे के लिए TR Baalu की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय समिति गठित
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने अपनी चुनावी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। शनिवार को पार्टी नेतृत्व ने आगामी चुनावों के लिए अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर औपचारिक बातचीत शुरू करने हेतु एक उच्च स्तरीय सात सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की। पार्टी के वरिष्ठ नेता और कोषाध्यक्ष टी.आर. बालू इस महत्वपूर्ण समिति की कमान संभालेंगे। समिति में पार्टी के उन दिग्गजों को शामिल किया गया है जिन्हें गठबंधन की राजनीति और चुनावी गणित का लंबा अनुभव है।
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तमिलनाडु विधानसभा सत्र 20 फरवरी को समाप्त होने के साथ ही द्रमुक अपनी बूथ समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण देने और सदस्यता अभियान चलाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। द्रमुक ने कहा कि सहयोगियों के साथ बातचीत शुरू करने के लिए समिति का गठन किया गया है। पार्टी के कोषाध्यक्ष बालू इस समिति के प्रमुख होंगे।
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द्रमुक के प्रधान सचिव के एन नेहरू, उप महासचिव तिरुचि शिवा और ए राजा, संगठन सचिव आर एस भारती और द्रमुक की उच्च स्तरीय कार्यकारी समिति के सदस्य ई वी वेलू और एम आर के पनीरसेल्वम भी समिति के सदस्य हैं।
गठबंधन की चुनौती और भविष्य की राह
द्रमुक वर्तमान में 'धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन' (SPA) का नेतृत्व कर रही है, जिसमें कांग्रेस, वामपंथी दल और एमडीएमके (MDMK) जैसे दल शामिल हैं। 2026 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्षी खेमे में नए गठबंधन बनने की संभावना है। ऐसे में टी.आर. बालू की अध्यक्षता वाली यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सहयोगियों के बीच तालमेल बना रहे और सीटों का वितरण बिना किसी बड़े विवाद के संपन्न हो जाए।
US Chamber of Commerce ने फैसले का किया स्वागत, कहा- Trump Tariff से व्यापार को नुकसान हुआ
अमेरिका के प्रमुख व्यापार संगठन यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने शुक्रवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शुल्क के फैसले को रद्द किए जाने के बाद ब्राजील और भारत से आयातित कुछ वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क की राशि वापस मिलने की उम्मीद जगी है। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कई देशों के खिलाफ लगाए गए व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को रद्द कर दिया। माना जा रहा है कि इससे ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका लगा है। न्यायालय द्वारा 6-3 के बहुमत से सुनाया गया यह फैसला आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत लगाए गए शुल्कों पर केंद्रित था, जिनमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक ‘पारस्परिक’ शुल्क भी शामिल हैं।
यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए प्रशासन से कहा कि इसका उपयोग समग्र शुल्क नीति को पुन: निर्धारित करने और लोगों के लिए महंगाई कम करने के वास्ते किया जाना चाहिए। चैंबर के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य नीति अधिकारी नील ब्रैडली ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय का फैसला व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए स्वागत योग्य है।
पिछले एक साल में छोटे और मध्यम व्यवसायों ने इन शुल्क के कारण लागत में बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान झेला है।’’ चैंबर ने यह भी कहा कि अदालत के फैसले ने कई अमेरिकी छोटे व्यवसायों के लिए राशि वापस मिलने का रास्ता खोला है, लेकिन यह तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि कौन पात्र है और आगे क्या कदम उठाने हैं।
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