एथेंस के दक्षिण समुद्री क्षेत्र में हादसा, क्रीट के पास नाव पलटी, पांच प्रवासियों की मौत, 20 लापता
एथेंस, 21 फरवरी (आईएएनएस)। ग्रीस के सबसे बड़े द्वीप क्रीट के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में शनिवार की सुबह नाव पलटने से पांच प्रवासियों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि हादसे के बाद से करीब 20 लोग लापता हैं। हादसा क्रीट के दक्षिणी तट पर स्थित तटीय बस्ती काला लिमेना से लगभग 15 नॉटिकल मील (27 किमी) दक्षिण में हुआ।
ग्रीक कोस्ट गार्ड ने बताया कि क्रीट के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में लोगों को ले जा रही एक लकड़ी की नाव पलट गई। यह दुखद घटना क्रीट के दक्षिणी किनारे पर एक तटीय बस्ती, काला लिमेना से लगभग 15 नॉटिकल मील दक्षिण में हुई।
ग्रीक नेशनल ब्रॉडकास्टर ईआरटी ने बताया कि यह हादसा तब हुआ जब नेशनल सर्च और रेस्क्यू सेंटर द्वारा भेजे गए दो कमर्शियल जहाजों में से एक प्रवासियों की लकड़ी की नाव के पास पहुंचा। जहाज से सीढ़ी उतारी गई। जैसे ही यात्रियों ने सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश की, नाव का संतुलन बिगड़ गया। कई लोग नाव की एक तरफ चले गए, जिससे नाव पलट गई।
पनामा का झंडा लहराते एक कार्गो जहाज ने 20 लोगों को बचाया, जबकि हेलेनिक कोस्ट गार्ड और यूरोपियन यूनियन की बॉर्डर एजेंसी, फ्रोंटेक्स के जहाजों ने तीन शव बरामद किए। बाद में समुद्र में दो और शव मिले।
बचे हुए लोगों ने बचावकर्मियों को बताया कि नाव पर लगभग 50 लोग सवार थे, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। खोज और बचाव अभियान जारी है। तटरक्षक जहाजों, गुजरते वाणिज्यिक पोतों, एक हेलीकॉप्टर और एक सैन्य विमान को तैनात किया गया है।
ग्रीक नेशनल ब्रॉडकास्टर ईआरटी के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में भी ग्रीक अधिकारियों ने ग्रीस और तुर्की के बीच प्राकृतिक सीमा बनाने वाली एवरोस नदी के किनारे दो प्रवासियों के शव बरामद किए थे, जिनकी उम्र करीब 20 और 35 साल बताई गई।
2015 से ग्रीस यूरोपीय संघ (ईयू) में अनियमित प्रवासियों और शरणार्थियों के प्रवेश का एक प्रमुख द्वार रहा है। पिछले एक दशक में 10 लाख से अधिक लोग देश में पहुंचे हैं। इन खतरनाक यात्राओं के दौरान सैकड़ों लोगों ने समुद्र में और दर्जनों ने एव्रोस नदी क्षेत्र में अपनी जान गंवाई है।
--आईएएनएस
अर्पित/डीकेपी
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युद्ध के कगार पर इजरायल, लेकिन भारतीय श्रमिकों का जोश बरकरार
मध्य-पूर्व में तनाव अपने चरम पर है. ईरान के साथ संभावित युद्ध की आशंका, मिसाइल अलर्ट और सुरक्षा सायरन-इन सबके बीच भी इजरायल के शहरों में एक तस्वीर अलग दिखाई देती है. यह तस्वीर है भारतीय श्रमिकों के साहस, समर्पण और आत्मविश्वास की. बिहार से राजस्थान, पंजाब से तमिलनाडु तक-हजारों भारतीय कामगार आज उस इजरायल में पुनर्निर्माण का काम कर रहे हैं, जहां पिछले साल ईरान की मिसाइलों ने रिहायशी इमारतों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था.
2023 के बाद बदले सुरक्षा परिदृश्य
टूटे अपार्टमेंट, क्षतिग्रस्त सड़कें, और जले हुए ढांचों को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी इन भारतीय हाथों पर है. इन श्रमिकों का चयन भारत–इज़रायल द्विपक्षीय श्रम समझौते, राज्य सरकारों के सहयोग और 2023 के बाद बदले सुरक्षा परिदृश्य में इजरायल के भारतीय श्रमिकों पर बढ़ते भरोसे के तहत हुआ. फिलिस्तीनी श्रमिकों की कमी के बाद इजरायल ने जिन पर सबसे अधिक विश्वास जताया-वे भारतीय कामगार हैं.
इमारत टूटी थी-हमने फिर से बनाई
ग्राउंड पर बात करने पर इनकी आवाज़ में डर नहीं, बल्कि दृढ़ निश्चय सुनाई देता है. एक बिहारी मज़दूर कहता है, “मिसाइल गिरी थी, इमारत टूटी थी-हमने फिर से बनाई. अगर जंग भी हुई, तो काम नहीं रोकेंगे.” राजस्थान से आए एक कंस्ट्रक्शन वर्कर का कहना है, “घर पर परिवार जानता है कि काम जोखिम भरा है, लेकिन यही रोज़गार हमारी पहचान है.”
भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक
सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्स हैं-सायरन बजते ही शेल्टर, हेलमेट और सेफ्टी गियर अनिवार्य-लेकिन काम रुका नहीं है. यह सिर्फ़ मजदूरी नहीं, बल्कि भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बन चुका है. युद्ध की आशंका के बीच इज़रायल का पुनर्निर्माण जारी है और उस पुनर्निर्माण की रीढ़ बने हैं भारतीय श्रमिक-जो कहते हैं, “डर से नहीं, काम से पहचान बनती है.”
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