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प्राकृतिक गैस-आधारित उर्वरक संयंत्रों को ग्रीन अमोनिया प्लांट में बदलेगा भारत: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत प्राकृतिक गैस से संचालित एक मौजूदा अमोनिया और यूरिया संयंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा आधारित संयंत्र में परिवर्तित करने जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद यह दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया संयंत्रों में से एक बन सकता है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 11 लाख टन होगी।

सिंगापुर स्थित एशियन पावर (एपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना को एएम ग्रीन अमोनिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड विकसित करेगी। परियोजना को एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और जापान का वित्तीय समर्थन प्राप्त है।

यह परियोजना एक्शन फॉर क्रिएटिंग एनर्जी सिक्योरिटी फॉर लॉन्ग-टर्म रेजिलिएंस (एसीसीईएल) के तहत दोनों पक्षों का पहला संयुक्त निवेश है।

एसीसीईएल पहल को मई 2026 में एशियाई विकास बैंक और जापान सरकार ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों और व्यवसायों को ऊंची ऊर्जा लागत, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद करना है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के लिए वित्तपोषण में 10 करोड़ डॉलर का ऋण भी शामिल है, जो लीडिंग एशियाज प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर फंड-2 के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। इस फंड को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) वित्तपोषित करती है और इसका संचालन एडीबी द्वारा किया जाता है।

एडीबी के अध्यक्ष मासातो कांडा के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, जीवाश्म ईंधनों की जगह नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके भारत बहुत कम उत्सर्जन के साथ अमोनिया का उत्पादन कर सकता है और यह उत्पादन स्तर इस उद्योग की दिशा बदलने में मदद कर सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एसीसीईएल पहल दो स्तरों पर कार्य करती है। पहला, अल्पकालिक अवधि में विशेष रूप से एमएसएमई को तरलता सहायता उपलब्ध कराना और दूसरा, दीर्घकालिक अवधि में अधिक विविध एवं टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों को समर्थन देना।

एडीबी के अनुसार, यह पहल देशों को तत्काल ऊर्जा झटकों से निपटने के साथ-साथ भविष्य के लिए अधिक मजबूत ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने में मदद करने हेतु वित्तीय सहायता और निवेश को एक साथ लाती है।

भारत जुलाई 2026 तक 300 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर चुका है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही लगभग 55.29 गीगावाट नई गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ी गई।

देश ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने में सौर और पवन ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है।

यह परियोजना भारत के ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा और नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि ग्रीन अमोनिया को भविष्य के स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा भंडारण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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हार्दिक पांड्या अगर हुए IPL 2027 से बाहर, तो कौन होगा मुंबई इंडियंस का कप्तान? कैप्टेंसी की रेस में ये 2 बड़े नाम शामिल

Hardik Pandya: आईपीएल 2027 सीजन से पहले मुंबई इंडियंस की टेंशन बढ़ती नजर आ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा कप्तान हार्दिक पांड्या पिंडली (Calf) की गंभीर स्ट्रेस इंजरी के कारण लंबे समय के लिए मैदान से बाहर हो सकते हैं. अगर हार्दिक आईपीएल 2027 तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाते हैं, तो 5 बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को एक नए कप्तान की तलाश करनी होगी. क्रिकेट के गलियारों में मुंबई की कमान संभालने के लिए 2 बड़े दिग्गजों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जो टीम के भविष्य को एक नई दिशा दे सकते हैं.

सूर्यकुमार यादव को मिल सकती है मुंबई इंडियंस की कमान

हार्दिक पांड्या की गैर-मौजूदगी में मुंबई इंडियंस की कप्तानी संभालने के लिए जो पहला और सबसे मजबूत नाम सामने आ रहा है, वह कोई और नहीं बल्कि 'मिस्टर 360 डिग्री' नाम से फेमस सूर्यकुमार यादव का है. सूर्या को कप्तान बनाने के पीछे सबसे बड़ी वजह उनका इंटरनेशनल स्तर पर लीडरशिप का बड़ा अनुभव है. सूर्या भारत के पूर्व टी20 कप्तान रह चुके हैं और उन्हीं की कप्तानी में टीम इंडिया ने 2026 का टी20 वर्ल्ड कप जीता था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम को लीड करने का उनका नजरिया हमेशा से बेहद आक्रामक और मॉडर्न रहा है.

इसके अलावा, सूर्या लंबे समय से मुंबई इंडियंस की टीम के मुख्य स्तंभ रहे हैं. ड्रेसिंग रूम में वे साथी खिलाड़ियों के बीच बहुत पॉपुलर हैं और मैदान पर सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी एकदम कूल रहते हैं. दबाव के पलों में शांत रहकर मैच का पासा पलट देने की उनकी यही कला उन्हें फैंस और मैनेजमेंट दोनों की पहली पसंद बनाती है. अगर मुंबई इंडियंस एक अनुभवी और भरोसेमंद लीडर के साथ जाना चाहती है, तो सूर्या से बेस्ट विकल्प कोई हो ही नहीं सकता. 

तिलक वर्मा हो सकते हैं एक अच्छा विकल्प

हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के बाद कप्तानी की रेस में जो दूसरा नाम सामने आ रहा है, वह मुंबई इंडियंस के स्टार युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा का है. मुंबई इंडियंस की हमेशा से यह खूबी रही है कि वे अपने युवा टैलेंट पर भरोसा जताते हैं और उन्हें भविष्य का बड़ा लीडर बनाते हैं. तिलक वर्मा ने पिछले कुछ सीज़न में मुंबई इंडियंस के लिए लगातार धमाकेदार प्रदर्शन किया है और कई बार टीम के लिए 'संकटमोचक' की भूमिका निभाई है.

मैदान पर बड़े-बड़े कप्तानों के सामने भी उनका आत्मविश्वास और समझदारी देखने लायक होती है, जिसने बड़े-बड़े क्रिकेट एक्सपर्ट्स का दिल जीता है. अगर मुंबई इंडियंस का मैनेजमेंट आने वाले लंबे समय की सोचे और एक युवा खिलाड़ी को कप्तानी के लिए तैयार करना चाहे, तो तिलक वर्मा अच्छा विकल्प हो सकते हैं. इस वक्त तिलक वर्मा टीम इंडिया के टी20 कप्तान भी हैं. ऐसे में तिलक को कप्तानी सौंपना मुंबई के एक नए सुनहरे युग की शुरुआत हो सकती है.

हार्दिक पांड्या का चोटिल होना मुंबई इंडियंस के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि एक ऑलराउंडर के रूप में उनकी कमी को पूरा करना आसान नहीं है. लेकिन सूर्यकुमार यादव का अपार टी20 अनुभव या तिलक वर्मा का युवा जोश मुंबई इंडियंस को एक बार फिर से चैंपियन बनाने का जज्बा रखता है. अब यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि अगर हार्दिक चोट के कारण बाहर होते हैं तो मुंबई का मैनेजमेंट सूर्या के अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर दांव लगाता है या तिलक वर्मा को कप्तानी सौंपकर एक नए और युवा युग की शुरुआत करता है.

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