अनुसूचित जाति किसानों को कृषि भूमि खरीदने के लिए ₹2 लाख तक की सहायता
गुजरात सरकार के अंतर्गत सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई. “Financial Assistance Scheme for Purchase of Agricultural Land to Scheduled Caste Farmers” योजना को Department of Social Justice & Empowerment, Gujarat के तहत निदेशक, अनुसूचित जाति कल्याण द्वारा लागू किया गया.
इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के उन लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है जो मुख्य रूप से कृषि मजदूरी पर निर्भर हैं. भूमि स्वामित्व प्रदान कर उन्हें स्व-खेती के माध्यम से स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराना इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है.
योजना के तहत मिलने वाले लाभ
योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति के पात्र किसानों को कृषि भूमि खरीदने के लिए प्रति एकड़ 1,00,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. अधिकतम 2 एकड़ भूमि खरीदने हेतु 2,00,000 तक की सहायता उपलब्ध है.
यह सहायता सीधे भूमि क्रय के उद्देश्य से दी जाती है ताकि लाभार्थी स्वयं खेती कर सकें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें. सरकारी या निजी व्यक्ति से कृषि भूमि खरीदने पर भी यह सहायता उपलब्ध है. भूमि क्रय के बाद लाभार्थी 15 वर्षों तक उस भूमि को बेच नहीं सकता. यह प्रावधान योजना के वास्तविक उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है.
क्या है एलिजिबिलिटी?
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक का अनुसूचित जाति वर्ग से होना अनिवार्य है. आवेदक गुजरात का मूल निवासी होना चाहिए. आवेदक कृषि मजदूर होना चाहिए और स्वयं भूमि खरीदने में सक्षम होना चाहिए. सरकारी सहायता के अतिरिक्त भूमि क्रय की क्षमता रखने वाला व्यक्ति ही पात्र होगा. वार्षिक आय सीमा ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए ₹6,00,000 निर्धारित की गई है. एक परिवार से केवल एक सदस्य ही इस योजना का लाभ ले सकता है.
लाभ लेने के लिए डॉक्यूमेंट्स क्या क्या लगेंगे?
आवेदन के लिए पासपोर्ट आकार का फोटो, आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, कृषि मजदूर होने का प्रमाण, भूमि विक्रय की राजस्व विभाग से अनुमति, राजस्व अभिलेख की प्रति, बैंक पासबुक की प्रति या रद्द चेक तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे.
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया क्या है?
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. पात्र आवेदक e-Samaj Kalyan पोर्टल [https://esamajkalyan.gujarat.gov.in/](https://esamajkalyan.gujarat.gov.in/) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
सबसे पहले ‘Citizen Login’ के अंतर्गत ‘New User Please Register Here’ पर क्लिक कर पंजीकरण करना होगा. आधार कार्ड के अनुसार नाम, जन्मतिथि, लिंग, ईमेल, जाति आदि विवरण भरकर रजिस्ट्रेशन पूर्ण किया जाता है.
पंजीकरण के बाद यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉगिन कर ‘User Profile’ अपडेट करना आवश्यक है. प्रोफाइल अपडेट करने के पश्चात संबंधित योजना का चयन कर आवेदन पत्र भरना होता है.
आवश्यक जानकारी भरकर सभी दस्तावेज अपलोड करने के बाद शर्तों से सहमति देकर आवेदन सुरक्षित किया जाता है. अंत में आवेदन जमा कर उसकी प्रिंट कॉपी भविष्य के संदर्भ हेतु सुरक्षित रखनी चाहिए. आवेदन संख्या के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर आवेदन की स्थिति भी ट्रैक की जा सकती है.
सामाजिक प्रभाव क्या होगा?
यह योजना अनुसूचित जाति समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. भूमि स्वामित्व मिलने से लाभार्थी कृषि उत्पादन में सक्रिय भागीदारी कर सकते हैं और मजदूरी पर निर्भरता कम कर सकते हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है और सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलता है.
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केंद्र ने एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए सात नई पहलों की शुरुआत की, वैश्विक बाजार में मजबूत होगी निर्यातकों की पहुंच
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत सात नई पहलों (इंटरवेंशन) की शुरुआत की, जो केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए सशक्त बनाना है।
ये नए कदम भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली मुख्य चुनौतियों को दूर करने, व्यापक और समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत निर्यात शक्ति बनाने के लिए तैयार किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि आज भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ आत्मविश्वास से जुड़ रहा है। देश संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करते हुए प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में लाभ सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार का फायदा हर एमएसएमई, स्टार्टअप और उद्यमी तक पहुंचना चाहिए।
गोयल ने बताया कि एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का उद्देश्य नए उत्पादों, सेवाओं और नए निर्यातकों को बढ़ावा देना है, साथ ही भारतीय कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच दिलाना है।
उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले आधे महीने में भारत के माल निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बाजार के भरोसे और उद्योग की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मिशन के तहत एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा, कर्ज तक पहुंच बढ़ाई जाएगी, गुणवत्ता मानकों को मजबूत किया जाएगा, अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन में सहायता दी जाएगी और वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स व वेयरहाउसिंग ढांचे का विस्तार किया जाएगा। दुबई में भारत मार्ट जैसी विदेशी वेयरहाउसिंग पहल से भारतीय निर्यातकों को जीसीसी, अफ्रीका, मध्य एशिया और यूरोप के बाजारों तक रणनीतिक पहुंच मिलेगी।
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन निर्यात प्रोत्साहन के तहत वित्तीय सहायता और निर्यात दिशा के तहत व्यापारिक सहयोग को एकीकृत और डिजिटल निगरानी वाले ढांचे में लागू करता है। इस मिशन को वाणिज्य विभाग द्वारा एमएसएमई मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, एक्जिम बैंक, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई), नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी), बैंकों, विदेशों में भारतीय मिशनों और उद्योग संगठनों के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
हाल ही में शुरू किए गए नए हस्तक्षेपों का उद्देश्य एमएसएमई के सामने आने वाली संरचनात्मक समस्याओं को दूर करना है। इनमें पूंजी की ऊंची लागत, व्यापार वित्त के सीमित विकल्प, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नियमों का पालन करने की जटिलता, लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां और नए बाजारों में प्रवेश की बाधाएं शामिल हैं।
गोयल ने यह भी कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क ने भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच काफी बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि नौ संपन्न एफटीए, जिनमें अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण भी शामिल है, के जरिए भारत को अब वैश्विक जीडीपी के लगभग 70 प्रतिशत और दो-तिहाई वैश्विक व्यापार तक पहुंच मिल चुकी है। ये समझौते 38 विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच प्रदान करते हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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