मिडिल ईस्ट तनाव, मजबूत डॉलर और ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका से कीमती धातुओं पर दबाव, सोने-चांदी में 1 प्रतिशत तक की गिरावट
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, मजबूत डॉलर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका से सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान, वैश्विक बाजार से लेकर घरेलू कमोडिटी बाजार तक दोनों कीमती धातुएं दबाव में नजर आईं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर बुधवार को सोने और चांदी दोनों में गिरावट देखी गई। खबर लिखे जाने तक सोना 0.23 प्रतिशत कमजोर होकर 4,133 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। वहीं चांदी 1.03 प्रतिशत फिसलकर 57.405 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रही थी।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। घरेलू बाजार में सोना गिरकर 1.46 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया, तो वहीं चांदी 2.09 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना खबर लिखे जाने तक करीब 519 रुपए या 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,46,000 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया।
दिन के कारोबार में सोना अपने पिछले बंद 1,46,519 रुपए से 0.13 प्रतिशत टूटकर 1,46,328 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला, लेकिन बाद में यह 830 रुपए यानी 0.56 प्रतिशत फिसलकर 1,45,689 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, एमसीएक्स पर चांदी 2,267 रुपए यानी 1.07 प्रतिशत टूटकर 2,09,218 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई। दिन की शुरुआत इसने अपने पिछले बंद 2,11,485 रुपए से 1,085 रुपए यानी 0.51 प्रतिशत गिरकर 2,10,400 रुपए प्रति किलोग्राम पर की। हालांकि दिन के कारोबार में एक समय यह 2,684 रुपए यानी 1.26 प्रतिशत फिसलकर 2,08,801 रुपए प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले सप्ताह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी अस्थिरता और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया था। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों पर लगने वाले अतिरिक्त टैरिफ हटाने के फैसले ने भी वैश्विक कमोडिटी बाजारों का ध्यान आकर्षित किया। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर करीबी निगाह बनाए हुए हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक फिलहाल 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान है कि अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 16 प्रतिशत है, जबकि दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 90 प्रतिशत मानी जा रही है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो जाता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल नई खरीदारी को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसके अलावा हालिया कमजोरी के बाद डॉलर इंडेक्स में स्थिरता आने से भी सोने की मांग को सीमित समर्थन मिला है।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। निवेशक अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि फेडरल रिजर्व महंगाई पर नियंत्रण के लिए इन्हीं संकेतकों को प्रमुखता से देखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हो सकती है, जिससे सोने-चांदी पर दबाव बना रह सकता है। वहीं महंगाई के नरम संकेत मिलने पर कीमती धातुओं में दोबारा खरीदारी लौट सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
धामी सरकार का श्रमिक परिवारों को दिवाली से पहले तोहफा, 10,709 लोगों के खाते में पहुंचे 18.49 करोड़ रुपये
CM Dhami: त्योहारों से पहले उत्तराखंड के हजारों श्रमिक परिवारों को आर्थिक मदद मिली है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 10,709 लाभार्थियों के बैंक खातों में 18.49 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं. इस राशि में बच्चों की शिक्षा, बेटी की शादी, प्रसूति और परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद मिलने वाली सहायता शामिल है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र श्रमिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में एक क्लिक के जरिए लाभार्थियों के खातों में सीधे पैसे भेजे. यह सहायता उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत दी गई है. बोर्ड के अनुसार, इस बार सहायता पाने वालों में 8,083 लाभार्थी बच्चों की शिक्षा से जुड़ी योजना के हैं. वहीं, 2,354 लाभार्थियों को पुत्री के विवाह के लिए आर्थिक सहायता दी गई. इसके अलावा 177 लोगों को मृत्यु के बाद मिलने वाली सहायता और 95 लाभार्थियों को प्रसूति संबंधी सहायता दी गई. इस तरह कुल 10,709 लोगों को 18.49 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की गई.
यह भी पढ़ें: उत्तराखंड CM ने किया कन्या पूजन, कहा- बालिकाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करती है यह परंपरा
श्रमिक परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण श्रमिक राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं. इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि श्रमिकों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा का लाभ समय पर मिले. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र लोगों तक पहुंचाया जाए. दूरदराज के इलाकों में रहने वाले श्रमिक परिवारों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है. धामी ने यह भी निर्देश दिए कि स्वास्थ्य जांच के दौरान जिन श्रमिकों में किसी बीमारी का पता चला है, उनके इलाज की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर की जाए. उन्होंने श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यस्थलों पर चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया.
अब तक 83 हजार से ज्यादा किट बांटी गईं
निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड की ओर से कई तरह की सामग्री भी वितरित की जा रही है. कार्यक्रम में दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक 33,429 शिक्षण सामग्री किट, 26,674 स्वच्छता किट और 23,216 पोषण किट बांटी जा चुकी हैं. इस तरह कुल 83,319 किट का वितरण हुआ है. श्रमिक स्वास्थ्य योजना के तहत अब तक 20,527 स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और 2,32,281 स्वास्थ्य परीक्षण किए गए हैं. सरकार का उद्देश्य समय रहते बीमारियों की पहचान करना और जरूरतमंद श्रमिकों को इलाज उपलब्ध कराना है.
कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा
श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट की मदद ली जा रही है. इनके माध्यम से श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य जांच, डॉक्टरों से परामर्श और जरूरत पड़ने पर आगे के इलाज के लिए रेफरल की सुविधा दी जाती है.
मुख्यमंत्री ने श्रमिक स्वास्थ्य योजना की प्रगति पर संतोष जताया. कार्यक्रम में बताया गया कि मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार सम्मेलन में भी इस योजना की सराहना की गई. पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के इस मॉडल को अपने राज्यों में लागू करने में रुचि दिखाई है.
यह भी पढ़ें: CM धामी ने हिंदू नेशनल कॉलेज में किया रावण दहन, कैबिनेट मंत्री खजान दास शामिल
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ा सेस कलेक्शन
कार्यक्रम में श्रम विभाग की डिजिटल प्रणाली लेबर सेस कलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (LCCMS) की उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई. इस प्रणाली के माध्यम से अब तक 21,200 प्रतिष्ठानों का ऑनलाइन पंजीकरण किया गया है. इसके जरिए सेस यानी निर्माण कार्यों पर श्रमिक कल्याण के लिए वसूले जाने वाले उपकर के संग्रह में 47.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस डिजिटल व्यवस्था को वर्ष 2025 में ई-गवर्नेंस श्रेणी में SKOCH Gold Award मिला था. इसे भारत सरकार के Best Practices Compendium में भी शामिल किया गया है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation








