एक पल का गुस्सा बिगाड़ सकता है सेहत, आयुर्वेद से जानें क्रोध प्रबंधन के आसान उपाय
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। गुस्सा आना स्वाभाविक और तेजी से आने वाली भावना है, जिसपर नियंत्रण कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है।
हर किसी का गुस्सा जाहिर करने का तरीका भी अलग होता है। कोई चिल्लाकर तो कोई मन ही मन बड़-बड़ाकर गुस्सा निकालने की कोशिश करता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक पल का गुस्सा हमारे शरीर को कितनी बुरी तरह प्रभावित करता है। यह सिर्फ मन के लिए ही नहीं बल्कि तन के लिए भी घातक है।
चिकित्सा और आयुर्वेद दोनों का ही मानना है कि क्रोध न सिर्फ रिश्तों को बिगाड़ता है, बल्कि इसके साथ ही हार्मोन, हृदय, पाचन और मस्तिष्क तक पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। आज की जीवनशैली की वजह से भी गुस्से की आवृति बढ़ गई है। अत्याधिक काम का दबाव, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन गुस्से का कारण बन रहे हैं। भले ही गुस्सा आना स्वभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इसे नियंत्रित करना भी जरूरी है। आज हम आपको क्रोध प्रबंधन के आसान उपाय बताएंगे और साथ ही यह भी जानेंगे कि शरीर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
जब किसी को भी गुस्सा आता है, तो शरीर में तेजी से हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं। तनाव को बढ़ाने वाले एड्रेनालिन और कोर्टिसोल एक्टिवेट हो जाते हैं और दिल की धड़कन भी तेजी से बढ़ने लगती है। तनाव की वजह से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है और पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है, और यही कारण है कि गुस्से में अक्सर लोगों की खाने की इच्छा खत्म हो जाती है। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती; गुस्सा आने पर मस्तिष्क का निर्णय लेने वाला भाग कमजोर हो जाता है और कम सक्रिय तरीके से काम करता है। रिसर्च बताती है कि बार-बार गुस्सा करने वालों में हाई बीपी, हार्ट डिजीज, माइग्रेन, एसिडिटी और नींद की समस्या अधिक पाई जाती है।
अब जब भी गुस्सा आए तो सबसे पहले गहरी और धीरे-धीरे सांस लें और बाहर की तरफ छोड़ें। कोशिश करें कि किसी खुली जगह में जाकर सांस लेने की कोशिश करें और हाथों को बाहर की तरफ झटके। यह शरीर से तनाव और गुस्से के असर को कम करता है। विज्ञान में माना गया है कि किसी भी बात पर गुस्सा जाहिर करने से पहले खुद को 90 सेकेंड के लिए रोक लें। इससे गुस्सा धीरे-धीरे कम हो जाता है और फिर हम चीजों को बेहतर समझ पाते हैं।
इसके साथ ठंडा पानी पीने और आंखों को ठंडे पानी से धोने से राहत मिलती है। ठंडा पानी पीने से पित्त शांत होता है और तनाव भी कम महसूस होता है। आयुर्वेद में गुस्से को पित्त से जोड़कर देखा गया है। आयुर्वेद में क्रोध नियंत्रण के लिए पित्तशामक आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। इसके लिए आहार में नारियल पानी, सौंफ, धनिया, घी, खीरा, और आंवला शामिल करें।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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सात समंदर पार गूंजेंगे 'जय श्री राम' के नारे, आज मॉस्को में होगा रामलीला का आयोजन, रूसी कलाकार निभाएंगे अहम किरदार
Ramleela in Russia: रूस में भारतीय संस्कृति की झलक एक बार फिर देखने को मिलेगी. आज यानी 20 फरवरी को यहां भव्य रामलीला का आयोजन किया जा रहा है. खास बात यह है कि इस रामलीला में स्थानीय कलाकार भारतीय पौराणिक पात्रों को मंच पर जीवंत करेंगे.
इस नाट्य प्रस्तुति में दारिया माता सीता की भूमिका निभाएंगी. वहीं दिमित्री को हनुमान के किरदार में देखा जाएगा. दोनों कलाकार लंबे समय से भारतीय संस्कृति और रामायण से जुड़े मंचनों का अभ्यास कर रहे हैं.
भारतीय संस्कृति से जुड़ाव
आयोजकों का कहना है कि रामलीला के जरिए भारतीय परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना उद्देश्य है. रामायण की कथा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और मानवता का संदेश भी देती है. इसी वजह से विदेशी दर्शकों में भी इसका आकर्षण बढ़ रहा है.
रामलीला के लिए सजाया गया मंच
रामलीला के लिए विशेष मंच सजाया गया है. पात्रों के वस्त्र भारतीय परंपरा के अनुसार तैयार किए गए हैं. संगीत और संवाद भी रामायण की मूल भावना को ध्यान में रखकर रखे गए हैं. मंचन के दौरान युद्ध दृश्य, वनवास और भक्ति भाव को खास तरीके से दिखाया जाएगा.
अयोध्या की दिवाली दुनिया में हुई मशहूर
जब से यूपी में योगी सरकार आई है, अयोध्या की दिवाली (दीपोत्सव) पूरी दुनिया में मशहूर हो गई है. लाखों दीयों से जगमगाती अयोध्या को देखकर विदेशों के कलाकार भी खींचे चले आ रहे हैं. आपको बता दें कि योगी सरकार ने पहले भी रूसी कलाकारों को अयोध्या बुलाया था. वहां की रौनक और भक्ति देखकर ये कलाकार इतने खुश हुए कि उन्होंने तय किया कि वे मॉस्को में भी ऐसी ही रामलीला करेंगे.
कलाकारों की मेहनत
दारिया ने बताया कि सीता का किरदार निभाना उनके लिए सम्मान की बात है. उन्होंने भारतीय संस्कृति को करीब से समझने की कोशिश की है. वहीं दिमित्री ने कहा कि हनुमान की भूमिका शारीरिक और भावनात्मक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण है.
दर्शकों में दिखा उत्साह
इस आयोजन को लेकर भारतीय समुदाय के साथ-साथ रूसी दर्शकों में भी उत्साह है. बड़ी संख्या में लोग इस रामलीला को देखने की तैयारी कर रहे हैं. माना जा रहा है कि यह आयोजन सांस्कृतिक संवाद को और मजबूत करेगा.20 फरवरी को होने वाली यह रामलीला न सिर्फ एक नाट्य प्रस्तुति होगी, बल्कि भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक सेतु का भी प्रतीक बनेगी.
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