अमेरिका बोला- पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, उससे बातचीत जरूरी:रुबियो बोले- विदेश नीति के लिए ये जरूरी, भारत भी ईरान से दोस्ती रखता है
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं। रुबियो ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ संबंध रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। उनके मुताबिक, विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन ऐसा करना जरूरी है। रुबियो बोले- अमेरिका आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता होती है। रुबियो ने कहा, ये मुश्किल फैसले हैं, लेकिन विदेश नीति के तहत हमें ऐसा करना पड़ता है। मुझे लगता है कि यह सकारात्मक भी हो सकता है। अगर हमारे पाकिस्तान के साथ संबंध हैं और हम उससे बात कर सकते हैं, तो इससे हमें उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत चिंतित है। रुबियो बोले- ईरान पर कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का कंट्रोल रुबियो ने ईरान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की सरकार के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, वे समझौता करना नहीं जानते। वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का नियंत्रण है। मैं सभी शिया धर्मगुरुओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि उन कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की बात कर रहा हूं, जो धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं। ऐसे लोगों के साथ समझौता करना बहुत मुश्किल है। होर्मुज में तेल की आवाजाही 80 से 100% हुई रुबियो ने कहा कि होर्मुज से तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई जारी है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की 80 से 100% तक बनी हुई है। रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह उन व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर सवार नाविकों की जान भी खतरे में पड़ रही है। रुबियो ने दुनिया के देशों से ऐसे हमलों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने ईरान के इन हमलों की तुलना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों से की। रुबियो के मुताबिक, उस दौर में भी पनडुब्बियों से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। फैक्ट चेक: स्ट्रैटेजिक एनर्जी मैप वेबसाइट के मुताबिक 20 अक्टूबर को होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 99% घट गई थी। यानी, अगर युद्ध से पहले एक दिन में 100 टैंकर गुजरते थे, तो इस आंकड़े के मुताबिक अब केवल 1 टैंकर गुजर रहा था। भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा कर रहा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। इसकी एक वजह यह भी है कि समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। नोट- पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अब तक 11 भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं 2 भारतीय नाविक लापता बताए गए हैं। ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता रहेगा अमेरिका रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल-ड्रोन बनाने में करता है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान को मिलने वाले पैसे और संसाधनों का इस्तेमाल देश के विकास के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाले हथियार तैयार करने में किया जाता है। रुबियो के बयान के तीन बड़े संकेत
फिजिकल हेल्थ- दुनिया भर में बढ़ रहे ‘गाउट’ के केस:पुरुषों को रिस्क ज्यादा, डॉक्टर से जानें इस बीमारी को कैसे पहचानें, कैसे बचें
पहले के समय में गाउट को ‘राजाओं की बीमारी’ कहा जाता था, क्योंकि इसे अमीर लोगों की डाइट और शराब पीने से जुड़ी बीमारी माना जाता था। हालांकि मेडिकल साइंस के मुताबिक, गाउट सिर्फ खानपान से होने वाली बीमारी नहीं है। यह एक तरह का इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस है, जिसमें ब्लड में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने पर उसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं। इससे अचानक तेज दर्द के साथ गाउट का अटैक हो सकता है। ‘द लैंसेट रेह्यूमेटोलॉजी’ में पब्लिश ‘ग्लोबल बर्डन डिजीज 2021’ के मुताबिक, साल 2020 में दुनिया में 5.58 करोड़ लोग गाउट से प्रभावित थे। 1990 के मुकाबले मामलों की संख्या 150.6% बढ़ी है। 2050 तक दुनिया में गाउट के मामलों की संख्या 9.58 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में गाउट के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. मुजाहिद सलीम, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- गाउट क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- गाउट और सामान्य गठिया में क्या अंतर है? जवाब- गाउट और गठिया दोनों में जोड़ों में दर्द हो सकता है। लेकिन दोनों की वजह और दर्द का पैटर्न अलग होता है। ग्राफिक में इनके बीच का अंतर देखिए- सवाल- गाउट क्यों होता है? जवाब- इसकी मूल वजह शरीर में यूरिक एसिड का संतुलन बिगड़ना है। ऐसा दो कारणों से हो सकता है। शरीर जरूरत से ज्यादा यूरिक एसिड बनाने लगे या किडनी उसे पर्याप्त मात्रा में बाहर न निकाल पाए। ग्राफिक में गाउट के सभी कारण देखिए- सवाल- जिसका भी यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, क्या उसे गाउट होता ही है? जवाब- नहीं, जिसका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, उसे गाउट हो ही जाए, यह जरूरी नहीं है। कई लोगों का यूरिक एसिड सालों तक सामान्य से ज्यादा रह सकता है। लेकिन उनमें कभी गाउट के लक्षण नहीं दिखते। इसे ‘असिम्प्टोमैटिक हाइपरयूरिसीमिया’ कहते हैं। सवाल- यूरिक एसिड क्या है, इसका शरीर में क्या काम है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- बढ़े हुए यूरिक एसिड लेवल से गाउट कैसे होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या गाउट एक गंभीर बीमारी है? जवाब- हां, लंबे समय तक यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा रहने पर जोड़ों में स्थायी नुकसान, गांठें (टोफी) और किडनी से जुड़े कॉप्लिकेशंस हो सकते हैं। सवाल- गाउट के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- गाउट का शुरुआती अटैक अक्सर अचानक शुरू होता है और ज्यादातर रात में दिखाई देता है। ग्राफिक में गाउट के सभी लक्षण देखिए- सवाल- शरीर के कौन से अंग या जॉइंट्स इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं? जवाब- पैर के अंगूठे का जोड़ गाउट अटैक की सबसे कॉमन जगह है। समय के साथ बीमारी बढ़ने पर टखने, घुटने, पैर की उंगलियों के साथ हाथों की उंगलियां, कलाई और कोहनी भी प्रभावित हो सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- हमारी डेली लाइफ की कौन-सी आदतें गाउट का रिस्क बढ़ाती हैं? जवाब- कम फिजिकल एक्टिविटी, खराब खानपान और ज्यादा वजन जैसी चीजें धीरे-धीरे यूरिक एसिड के लेवल को प्रभावित करती हैं। इससे गाउट का रिस्क बढ़ता है। ग्राफिक में गाउट का रिस्क बढ़ाने वाली सभी आदतें देखिए- सवाल- किन लोगों में गाउट का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों में लगभग तीन गुना ज्यादा देखा जाता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए मेनोपॉज से पहले उनमें गाउट अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि मेनोपॉज के बाद इसका रिस्क बढ़ जाता है। किन्हें ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- कौन-से फूड आइटम्स यूरिक एसिड बढ़ा सकते हैं? जवाब- जिन फूड आइटम्स में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है, उनसे यूरिक एसिड बढ़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं- सवाल- अगर किसी को गाउट है तो उसकी डाइट कैसी होनी चाहिए ? जवाब- गाउट की डाइट का मकसद यूरिक एसिड को कंट्रोल रखना है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- गाउट का इलाज क्या है? जवाब- इसके इलाज में दवाएं, खानपान में बदलाव और लाइफस्टाइल में सुधार शामिल हैं। सवाल- क्या हेल्दी लाइफस्टाइल से गाउट को ठीक किया जा सकता है? जवाब- हेल्दी लाइफस्टाइल गाउट को मैनेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन केवल इसके सहारे गाउट ठीक हो जाए, जरूरी नहीं है। बैलेंस्ड डाइट और वेट मैनेजमेंट से यूरिक एसिड का स्तर कम करने में मदद मिलती है। सवाल- गाउट से कैसे बचें? जवाब- इसे पॉइंटर्स में देखिए- गाउट से जुड़े कॉमन मिथ-फैक्ट्स मिथ- गाउट सिर्फ बुजुर्गों को होता है। फैक्ट- नहीं। गाउट कम उम्र में भी हो सकता है। मिथ- नींबू पानी पीने से गाउट ठीक हो जाता है। फैक्ट- नहीं। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। मिथ- गाउट सिर्फ नॉनवेज खाने वालों को होता है। फैक्ट- नहीं। यह बात साइंटिफिक रूप से साबित नहीं हुई है। मिथ- यूरिक एसिड बढ़ने पर दाल खाना बंद कर देना चाहिए। फैक्ट- नहीं, संतुलित मात्रा में दालें खाई जा सकती हैं। ……………………….. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- कार्डिएक अरेस्ट से नाना पाटेकर की मृत्यु:इतना ही खतरनाक ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’, जानें इसके लक्षण, बचाव व सावधानियां हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट अचानक ब्लड पंप करना बंद कर देता है। इससे ब्रेन और शरीर के दूसरे हिस्सों तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
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