Mohan Bhagwat vs Maulana Madani: क्या भारत में रहने वाले मुसलमान हिंदू हैं ? । R Bharat
Mohan Bhagwat vs Maulana Madani: क्या भारत में रहने वाले मुसलमान हिंदू हैं ? । R Bharat राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है. मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संघ प्रमुख ने कहा था कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं, वे कोई अरब से नहीं आए है. घर वापसी का काम तेज होना चाहिए. भागवत के इस बयान पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अपना ही एक पुराना वीडियो शेयर किया है. इसमें उन्होंने कहा कि हर वह आवाज जो देश को तबाही, बर्बादी, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती. #mohanbhagwat #arshadmadani #gharwapsi #populationcontrol #rss #jamiatulemaehind #hindumuslim Disclaimer: Republic Media Network may provide content through third-party websites, operating systems, platforms, and portals (‘Third-Party Platforms’). Republic does not control and has no liability for Third-Party Platforms, including content hosted, advertisements, security, functionality, operation, or availability. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ रिपब्लिक भारत देश का नंबर वन न्यूज चैनल है। देश और दुनिया की जनहित से जुड़ी ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल और मनोरंजन की खबरों का खजाना है । इस खजाने तक पहुंचने के लिए रिपब्लिक भारत से जुड़े रहिए और सब्सक्राइब करिए। ► http://bit.ly/RBharat R. Bharat TV - India's no.1 Hindi news channel keeps you updated with non-stop LIVE and breaking news. Watch the latest reports on political news, sports news, entertainment, and much more. आप Republic Bharat से जुड़ें और अपडेट्स पाएं! ???? Facebook: https://www.facebook.com/RepublicBharatHindi/ ???? Twitter: https://twitter.com/Republic_Bharat ???? Instagram: https://www.instagram.com/republicbharat/ ???? WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va7GPTi7dmecQ2LFH01I ???? Telegram: https://t.me/RepublicBharatHindi ???? LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/republic-bharat/
पाक में आईफोन बनाएगी एप्पल : सरकार ने जताई 8% इंसेंटिव देने पर सहमति, पीएम शरीफ देंगे अंतिम मंजूरी
इस्लामाबाद। अमेरिकी टेक दिग्गज एप्पल ने पाकिस्तान में आईफोन विनिर्माण की तैयारी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाक सरकार ने एक नए मोबाइल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क के तहत कंपनी को विशेष प्रोत्साहन देने पर सहमति जताई है। इस फैसले को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य देश को क्षेत्रीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात हब के रूप में विकसित करना है।
एप्पल रीफर्बिशिंग से करेगा शुरुआत
रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल सिर्फ नए आईफोन का निर्माण ही नहीं करेगी, बल्कि दो से तीन साल पुराने आईफोन को पाकिस्तान में रीफर्बिश कर उन्हें दोबारा निर्यात भी करेगी। सरकार का अनुमान है कि केवल री-एक्सपोर्ट से पहले ही वर्ष में लगभग 100 मिलियन डॉलर की आमदनी हो सकती है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस प्रस्तावित ढांचे के तहत Apple ने कुछ शर्तें रखी हैं।
पाक 8% प्रोत्साहन देने को राजी
Apple ने रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराने, 8 प्रतिशत प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन और पुराने आईफोन की मरम्मत की अनुमति मांगी है। पाकिस्तान सरकार पहले से ही मोबाइल निर्माताओं को 6 प्रतिशत प्रोत्साहन देती है, लेकिन एप्पल और अन्य वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए इसे बढ़ाकर 8 प्रतिशत करने की योजना है। इंजीनियरिंग डेवलपमेंट बोर्ड के सीईओ हमाद अली मंसूर ने बताया इन शर्तों को नए प्रस्तावित फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है, जिसे पीएम शहबाज शरीफ की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
भारत में भी अपनाया था यही मॉडल
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी टेक दिग्गज एप्पल पहले भी इसी मॉडल को अपनाकर एशियाई देशों में अपनी मौजूदगी मजबूत कर चुकी है। कंपनी ने इंडोनेशिया, मलेशिया और भारत में शुरुआत मरम्मत और प्रशिक्षण कार्यों से की थी। वहां पहले स्थानीय कर्मचारियों को तकनीकी कौशल सिखाया गया और बाद में धीरे-धीरे निर्माण कार्य शुरू किया गया। कंपनी पाकिस्तान में भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ना चाहती है।
योजना आगे बढ़ी तो पैदा होंगे रोजगार
यदि यह योजना सफल होती है, तो इससे हजारों रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही, तकनीकी प्रशिक्षण और सप्लाई चेन विकास के जरिए स्थानीय उद्योगों को भी फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश बढ़ने से निर्यात में वृद्धि और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह पहल अभी शुरुआती चरण में है। इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। लेकिन यदि एप्पल पाकिस्तान में उत्पादन शुरू करती है, तो यह देश की औद्योगिक नीति का एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
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