Gold Silver Rate: सोना 1.55 लाख के पार, चांदी में भी उछाल; क्या वैश्विक तनाव से बढ़ी मांग?
Gold-Silver Price: सराफा बाजार में 19 फरवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी देखने को मिली. घरेलू वायदा बाजार में सोना 1.55 लाख रुपये के पार पहुंच गया है, जबकि चांदी में भी मजबूत उछाल दर्ज किया गया है. बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग ने कीमती धातुओं को सहारा दिया है.
बाजार में खरीददारों का दबदबा
Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर अप्रैल 2026 एक्सपायरी वाला सोना करीब 0.13 फीसदी की बढ़त के साथ लगभग 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखा. वहीं 5 मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी में 0.46 फीसदी की तेजी रही और यह करीब 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई. इससे साफ है कि बाजार में इस समय खरीदारों का दबदबा बना हुआ है.
अमेरिका-ईरान विवाद भी है कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों को मजबूती मिली है. न्यूयॉर्क कमोडिटी मार्केट में सोना करीब 0.89 फीसदी की तेजी के साथ 4,981 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है. डॉलर में उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ा है. ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सबसे भरोसेमंद निवेश माना जाता है.
क्या कहते हैं जानकार
बाजार जानकारों के अनुसार, वायदा कारोबार में नए सौदे बन रहे हैं. इसके अलावा शादियों का सीजन होने से भौतिक मांग भी बढ़ी है. इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक अपना पैसा सोना-चांदी जैसे सुरक्षित साधनों में लगा रहे हैं. इन सभी कारणों ने मिलकर कीमतों को रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा दिया है.
निवेश से पहले सावधानी जरूरी
हालांकि, विशेषज्ञों की राय है कि निवेश से पहले सावधानी जरूरी है. यदि वैश्विक तनाव जारी रहता है और डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है. इसका असर घरेलू बाजार में भी नई ऊंचाइयों के रूप में दिख सकता है. लेकिन मुनाफावसूली शुरू होने पर तेज गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. कुल मिलाकर, फिलहाल सराफा बाजार में मजबूती का रुख है, लेकिन निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है.
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खैबर पख्तूनख्वा हमले पर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को जारी किया विरोध पत्र
इस्लामाबाद, 19 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले में हुए हालिया आतंकी हमले को लेकर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को डिमार्शे (औपचारिक विरोध पत्र) जारी किया है। पाकिस्तान का आरोप है कि इस हमले के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल किया गया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय (पीएफओ) ने अफगान मिशन के उप प्रमुख को तलब कर यह डिमार्शे सौंपा। बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने बाजौर में सैन्य और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की चौकियों पर वाहन-जनित आत्मघाती हमले और उसके बाद हुई गोलीबारी की कड़ी निंदा की है। इस हमले को ‘फितना अल खवारिज’ यानी प्रतिबंधित संगठन टीटीपी से जुड़ा बताया गया है।
पाकिस्तान का कहना है कि टीटीपी नेतृत्व अफगानिस्तान में मौजूद है और वहां से बिना रोक-टोक गतिविधियां चला रहा है। पाकिस्तान ने दावा किया कि अफगानिस्तान ने पहले भी आश्वासन दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस या दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं की गई।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, सोमवार को बाजौर में एक चेकपोस्ट पर विस्फोटकों से भरे वाहन से हमला किया गया, जिसमें 11 सुरक्षाकर्मी मारे गए। जवाबी कार्रवाई में 12 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया।
इससे पहले, इसी महीने अफगानिस्तान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने 6 फरवरी को इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर हुए हमले के संबंध में पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें “गैर-जिम्मेदाराना और निराधार” बताया था। यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर कहा था कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि हमलावर अफगानिस्तान से आवाजाही कर रहा था।
अफगान राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बिना पूरी जांच के तुरंत अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराना गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। मंत्रालय ने कहा कि बलूचिस्तान समेत अन्य घटनाओं में भी पहले ऐसा पैटर्न देखा गया है। बयान में कहा गया कि ऐसे हमलों को अफगानिस्तान से जोड़ने का “कोई तर्क या आधार नहीं” है और इससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा विफलताओं को छिपाया नहीं जा सकता।
अफगान मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया कि यदि हमलावरों की पहचान इतनी जल्दी हो गई थी, तो पहले ही हमले को रोका क्यों नहीं गया। साथ ही उसने कहा कि इस्लामी मूल्यों के तहत निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुंचाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा खामियों की जिम्मेदारी लेते हुए नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।
--आईएएनएस
डीएससी
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