"हम भविष्य की गायें हैं": हर्ष गोयनका ने एआई को लेकर साझा की चेतावनी
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें चर्चित लेखक युवाल नोआ हरारी ने कहा है कि भविष्य में इंसान उन प्रणालियों पर से नियंत्रण खो सकता है, जो उसके जीवन को संचालित करती हैं।
सेपियंस: ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ ह्यूमनकाइंड के लेखक हरारी ने इंसानों और लगातार अधिक बुद्धिमान होती मशीनों के संभावित संबंध की तुलना इंसानों और गायों के रिश्ते से की है।
हरारी ने चेतावनी देते हुए कहा, हम भविष्य की गायें हैं। उनका कहना है कि एआई इतना उन्नत हो सकता है कि लोग उन प्रणालियों को न पूरी तरह समझ पाएंगे और न ही उन पर प्रभाव डाल सकेंगे, जिन पर उनका जीवन निर्भर होगा।
हर्ष गोयनका ने इस वीडियो को साझा करते हुए एआई की बढ़ती क्षमताओं और ऐसी तकनीक के संभावित खतरों पर ध्यान आकर्षित किया, जो मानव समझ से भी अधिक शक्तिशाली हो सकती है।
इस चेतावनी का आशय यह है कि एआई से सबसे बड़ा खतरा जरूरी नहीं कि रोबोटों के इंसानों के खिलाफ हो जाने से हो, बल्कि यह भी हो सकता है कि लोग धीरे-धीरे उन प्रणालियों को समझने और नियंत्रित करने की अपनी क्षमता खो दें, जो उनके जीवन और निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं।
अपनी तुलना को समझाते हुए हरारी ने इंसानों और जानवरों की समझ के बीच अंतर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गायें ऐसे वातावरण में रहती हैं, जिसे इंसान नियंत्रित करते हैं, लेकिन उन्हें पैसे, वित्तीय बाजारों या आर्थिक नीतियों जैसी चीजों की कोई समझ नहीं होती।
वे यह नहीं समझ पातीं कि ब्याज दरों में बदलाव, बॉन्ड बाजार की गतिविधियां या कारोबारी फैसले उनके जीवन को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
हरारी का कहना है कि एआई सिस्टम के और अधिक जटिल एवं परिष्कृत होने के साथ इंसानों के साथ भी कुछ ऐसा ही हो सकता है। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीते रहेंगे, जबकि एल्गोरिद्म और स्वचालित प्रणालियां वित्त, कारोबार, शासन और कानून जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े फैसलों में बड़ी भूमिका निभाने लगेंगी।
समय के साथ ये प्रणालियां इतनी जटिल हो सकती हैं कि उनका उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी यह समझना मुश्किल हो जाएगा कि वे वास्तव में काम कैसे करती हैं।
चेक टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में हरारी ने सवाल उठाया कि यदि लोगों के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को नियंत्रित करने वाली तकनीक इतनी जटिल हो जाए कि वे उसे समझ ही न सकें, तो इंसानों की स्थिति क्या होगी।
उनका तर्क है कि लोग धीरे-धीरे सूचित और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता छोड़ सकते हैं, क्योंकि वे ऐसी प्रणालियों पर अधिक निर्भर होते जाएंगे जिनका स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना उनके लिए संभव नहीं होगा।
हरारी ने बताया कि वित्त और प्रशासन ऐसे क्षेत्र हैं जहां इस संभावित बदलाव पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दशहरा पर गोल्ड-सिल्वर का दम, सालभर में सोने ने 25% तो चांदी ने 45% कमाकर दिया
Gold Silver Price: दशहरा के अवसर पर आज घरेलू शेयर बाजारों में कारोबार बंद है, लेकिन निवेशकों और खरीदारों की नजर सोने-चांदी की कीमतों पर बनी हुई है. हाल के उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना मजबूत स्तरों पर कारोबार कर रहा है और सोने का भाव 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के ऊपर बना हुआ है. वहीं चांदी की कीमतें 2.10 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के करीब बनी हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ऊंची महंगाई और ब्याज दरों को लेकर जारी चर्चाओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है.
वायदा और हाजिर बाजार में धातुओं की स्थिति
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोमवार को दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 618 रुपए यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,47,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी लगभग स्थिर रहकर 2,09,825 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई. हालांकि भौतिक बाजार में सोने और चांदी की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,340 रुपए प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,062 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया.
एक साल में निवेशकों को मिला बंपर रिटर्न
वहीं आपको बता दें कि दशहरा के मौके पर कीमती धातुओं में निवेश करने वालों के लिए पिछले एक वर्ष का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है. बाजार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशहरा से अब तक सोने की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. वहीं चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए करीब 45 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है. यही कारण है कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों का रुझान अभी भी कीमती धातुओं की ओर बना हुआ है.
वैश्विक मंच पर दबाव और चुनौतियां
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालांकि सोना दबाव में बना हुआ है. स्पॉट गोल्ड करीब 4,144 डॉलर प्रति औंस और स्पॉट सिल्वर 57.44 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की चिंता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने सोने पर दबाव बनाए रखा है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और टेक्नोलॉजी शेयरों में सुधार के कारण निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग भी कुछ कम हुई है.
ब्याज दरों का गणित और आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर में सोना लगातार 4,100 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है. हालांकि बाजार अभी भी इस संभावना को मजबूत मान रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व वर्ष के अंत तक एक और ब्याज दर वृद्धि कर सकता है.
आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों को कम आकर्षक बनाती हैं. इसके बावजूद वैश्विक महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग सोने और चांदी को समर्थन देती हुई दिखाई दे रही है.
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
यह भी पढ़ें: सोने की कीमत में जोरदार उछाल, ₹1.48 लाख के पार पहुंचा भाव; चांदी में भी तेजी
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation








