सहरसा में औषधीय खेती की ओर बढ़े किसान, लेमन ग्रास से कर रहे लाखों की कमाई
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लेमन ग्रास की फसल लगभग चार से पांच महीने में तैयार हो जाती है. एक बार रोपाई करने के बाद चार से पांच साल तक लगातार उत्पादन मिलता रहता है. इसकी खेती के लिए अत्यधिक उपजाऊ भूमि की आवश्यकता नहीं होती. कम पानी और कम खाद में भी इसकी अच्छी पैदावार हो जाती है. यही कारण है कि कम लागत में अधिक मुनाफा संभव हो पाता है.
एआई भारत की नीली अर्थव्यवस्था के विकास में निभा सकता है अहम भूमिका
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत के समुद्री प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, समुद्री आजीविका और नीली अर्थव्यवस्था के विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से गुरुवार को दी गई।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘एआई फॉर ओशन्स ऑफ टुमॉरो: डेटा, मॉडल्स एंड गवर्नेंस’ पर पैनल चर्चा के दौरान एक्सपर्ट्स ने इस विषय पर प्रकाश डाला।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मुताबिक, मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महपात्रा ने मुख्य भाषण में जलवायु नियंत्रण, आपदा जोखिम कम करने, खाद्य सुरक्षा और आजीविका में महासागरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने महासागर अवलोकन, चक्रवात पूर्वानुमान, समुद्री डेटा प्रणालियों और प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं में भारत की मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति ने विपरीत मौसम के दौरान होने वाली जानमाल की हानि को काफी हद तक कम कर दिया है।
उन्होंने अपने भाषण में विशेष रूप से महासागरों का गर्म होना, अम्लीकरण और समुद्र स्तर में वृद्धि जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के संदर्भ में पारंपरिक भौतिक मॉडलों के पूरक के रूप में डेटा-आधारित और एआई-सक्षम मॉडलों के महत्व पर बल दिया।
इस सत्र को संबोधित करते हुए भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने महासागरों और नीली अर्थव्यवस्था में भारत-नॉर्वे के बढ़ते सहयोग पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जब एआई को खुले, अंतरसंचालनीय और विश्वसनीय डिजिटल आधारों पर विकसित किया जाता है, तो यह मत्स्य प्रबंधन, जहाजरानी दक्षता, बंदरगाह संचालन और तटीय मजबूती को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है।
स्टेनर ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में भारत का अग्रणी होना इसे खुले डेटा, साझा मानकों और जिम्मेदार डिजिटल प्रबंधन पर आधारित एक वैश्विक डिजिटल महासागर ढांचा विकसित करने में सक्षम बनाएगा, जिससे न केवल भारत बल्कि वैश्विक समुदाय को भी लाभ होगा।
पैनल में कहा गया कि भारत खुले डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) संचालित बुद्धिमत्ता और सुदृढ़ शासन ढांचे को एकीकृत करने वाले डिजिटल महासागर अवसंरचना विकसित करके वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है। समुद्री आजीविका को बढ़ावा देने, परिचालन लागत को कम करने और नीली अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में समय पर डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आवश्यक होगी।
--आईएएनएस
एबीएस/
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