10वीं या 12वीं का पेपर हो गया है मिस, तुरंत करें ये काम; तभी मिलेगा दोबारा एग्जाम देने का मौका
CBSE Compartment Exam Rules 2026: बिहार के मसौढ़ी में मंगलवार को मैट्रिक परीक्षा छूटने के कारण छात्रा ने तनाव में आकर अपनी जान दे दी. नियम बताते हैं कि अगर 10वीं, 12वीं की बोर्ड परीक्षा (जैसे CBSE, राज्य बोर्ड आदि) किसी कारण से छूट जाती है तो बच्चे बीमारी, व्यक्तिगत कारण, कोई अन्य मजबूरी पर परीक्षा में दोबारा बैठ सकते हैं.
लेकिन नियम स्पष्ट हैं छात्र किसी एक या दो पेपर में Compartment, Supplementary Exam (कंपार्टमेंट) अप्लाई करके ऐसा कर सकते हैं लेकिन इसमें सीबीएसई की अनुमति मिलनी अनिवार्य है. स्पष्ट बता दें कुछ मामलों में compartment (या supplementary) exam देने का मौका मिलता है, लेकिन यह कितने पेपर छूटे हैं और किस कैटेगरी में आते हैं पर इस पर भी निर्भर करता है. CBSE ने 2026 से नियम सख्त कर दिए हैं कोई अलग मेकअप एग्जाम नहीं होता लेकिन compartment का मौका मिलता है.
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पेपर छूटने पर ये काम तुरंत करें?
- सबसे पहले अपने स्कूल बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट (cbse.gov.in या राज्य बोर्ड साइट) चेक करें.
- Admit Card/Exam Form में Absent दर्ज हुआ है या नहीं देखें.
- स्कूल प्रिंसिपल से बात करें वे बोर्ड से संपर्क करके सलाह दे सकते हैं.
- अगर बीमारी या अन्य कोई मजबूरी थी तो मेडिकल सर्टिफिकेट आदि के साथ आवेदन कर सकते हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में री-एग्जाम नहीं मिलता.
1 या 2 पेपर छूट जाएं तो रिजल्ट में पास नहीं माना जाता
जानकारी के अनुसार सीबीएसई में अगर 1 या 2 पेपर छूट जाएं तो रिजल्ट में पास नहीं माना जाता है. इसके अलावा अगर आप एग्जाम वाले दिन Absent रहे या आपके पेपर देने के बाद कम नंबर आए यानी Compartment आई और अगर आपने पहली मुख्य परीक्षा में कम से कम कुछ सब्जेक्ट दिए हैं तो आगे के विकल्प मिल सकते हैं.
अगर 3 या ज्यादा पेपर छूट गए तो आप Essential Repeat कैटेगरी में आते हैं
अगर 3 या ज्यादा पेपर छूट गए तो आप Essential Repeat कैटेगरी में आते हैं. ऐसे में आपको दूसरी बोर्ड परीक्षा जो अब 10वीं में दो बार होती है में बैठने की अनुमति नहीं मिलती है. आपको अगले साल की मुख्य बोर्ड परीक्षा में दोबारा पूरी परीक्षा देनी पड़ेगी. सीबीएसई नियमों के अनुसार पहली परीक्षा अनिवार्य है. अगर आप पहली मुख्य परीक्षा (फरवरी-मार्च) में बिल्कुल नहीं बैठे तो दूसरी परीक्षा (मई-जून) में सीधे नहीं बैठ सकते.
अधिकतर छात्र Compartment या NIOS चुनकर अपना करियर बचाते हैं
अधिकतर छात्र Compartment या NIOS चुनकर अपना करियर बचाते हैं. वहीं, अगर आप फेल हो गए या कुछ सब्जेक्ट छूट गए या कमजोर रह गए तो आप Compartment या Supplementary Exam (कंपार्टमेंट) भर सकते हैं लेकिन ये केवल 1 या 2 सब्जेक्ट में दिया जा सकता है. इसकी परीक्षा जुलाई या अगस्त में होती है. बता दें कंपार्टमेंट में 10वीं में 1-2 सब्जेक्ट, 12वीं में 1 सब्जेक्ट तक क्लियर करने का मौका मिलता है. इतना ही नहीं पास होने पर मार्कशीट में पास के साथ Compartment क्लियर लिखा रहता है. वहीं, अगर आपको किसी एग्जाम में मार्क्स बढ़ाने हैं तो आप Improvement Exam भी भर सकते हैं.
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एआई समिट रोबोडॉग विवाद पर चिराग पासवान सख्त, बोले- 'बड़ी लापरवाही', समिट के बाद होगी कार्रवाई
पटना, 19 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एआई समिट में प्रदर्शित चीनी रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बड़ी लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि समिट समाप्त होने के बाद सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह विवाद इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सामने आया, जहां एक रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित बताया गया था। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह प्रोडक्ट चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा विकसित यूनिट्री जीओ2 मॉडल है।
पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय द्वारा किसी प्रोडक्ट को प्रदर्शित कर उसका स्वामित्व गलत तरीके से लेना पूरी तरह अनुचित है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि समिट एक वैश्विक मंच है और पूरी दुनिया की नजर इस पर रहती है। ऐसे घटनाक्रम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने उस प्रतिनिधि के बयान का भी जिक्र किया, जिसने रोबोटिक डॉग के बारे में जानकारी दी थी। चिराग ने कहा कि वह शब्दों के चयन से स्थिति को उचित ठहराने की कोशिश करती दिखीं और बाद में इसे गलतफहमी बताया गया। जब देश में इतने बड़े स्तर का एआई सम्मेलन हो रहा हो, तब इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बन जाती हैं।
केंद्र सरकार ने भी अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि ऐसे मंचों पर केवल वास्तविक और प्रमाणिक कार्यों को ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय के पवेलियन में मौजूद कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि प्रदर्शित रोबोटिक डॉग विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है और उसका नाम ओरियन बताया। बाद में उन्होंने इसे संचार की गलती बताया।
विश्वविद्यालय ने भी आधिकारिक बयान जारी कर भ्रम के लिए माफी मांगी और कहा कि संबंधित प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी नहीं थी और उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।
--आईएएनएस
वीकेयू/एबीएम
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