भारत-न्यूजीलैंड FTA से इंजीनियरिंग निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, 5 साल में दोगुना होने की उम्मीद
India New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू होने से भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है। उद्योग जगत का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात दोगुना हो सकता है।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (EEPC India) के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि न्यूजीलैंड भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए फिलहाल अपेक्षाकृत छोटा बाजार है, लेकिन यहां निर्यात बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। चड्ढा के मुताबिक, भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू होने से इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनियों को कारोबार बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे। समझौते से भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने और निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
2025-26 में 14.05 करोड़ डॉलर निर्यात
भारत का न्यूजीलैंड को इंजीनियरिंग निर्यात 2024-25 में 12.98 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 14.05 करोड़ डॉलर हो गया। एफटीए लागू होने से भारतीय निर्माताओं को इस बाजार में नए अवसर तलाशने में मदद मिलेगी, जिससे निर्यात को और गति मिलने की उम्मीद है।
भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात की जाने वाली प्रमुख इंजीनियरिंग वस्तुओं में ऑटोमोबाइल, डेयरी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक मशीनरी, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उपकरण, कार्यालय संबंधी उपकरण एवं लोहा और इस्पात उत्पाद शामिल हैं।
पंकज चड्ढा ने कहा कि यह समझौता भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने और न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड के साथ एफटीए इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर प्रदान करता है।”
2030 तक भारत के 250 अरब डॉलर का लक्ष्य
उन्होंने आगे कहा कि न्यूजीलैंड के साथ इंजीनियरिंग व्यापार संबंध मजबूत होने से वर्ष 2030 तक भारत के 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की व्यापक महत्वाकांक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। ईईपीसी इंडिया को उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात बढ़कर 28-30 करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह 2025-26 में दर्ज निर्यात के स्तर से लगभग दोगुना होगा।
(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
उड़ान योजना के तहत 1.49 करोड़ यात्रियों ने किया हवाई सफर, अगले चरण में 4 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने का लक्ष्य
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के 10 साल पूरे होने के अवसर पर नागर विमानन मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी एक फैक्टशीट में कहा गया कि यह योजना आम लोगों के लिए क्षेत्रीय हवाई यात्रा को किफायती बनाने के अपने उद्देश्य में सफल रही है. इसके तहत अब तक 1.49 करोड़ से अधिक यात्री हवाई सफर कर चुके हैं.
देश के 90 एयरपोर्ट को जोड़ने वाली है उड़ान योजना
देशभर में 90 हवाई अड्डों (जिनमें दो जल हवाई अड्डे और 15 हेलीपोर्ट शामिल हैं) को जोड़ने वाली उड़ान योजना ने 625 मार्गों को परिचालन में लाया गया है. इस योजना ने न केवल दूरदराज के क्षेत्रों को देश के विमानन नेटवर्क से जोड़ा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने और देशभर में रोजगार के अवसर पैदा करने में भी योगदान दिया है.
पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएं और व्यापार को किया मजबूत
फैक्टशीट के अनुसार, उड़ान योजना ने क्षेत्रीय पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और व्यापार को मजबूत किया है. इसके साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहरों में आर्थिक विकास को गति मिली है. मूल योजना की सफलता के आधार पर इसके अगले चरण का लक्ष्य आने वाले दशक में 120 नए गंतव्यों को जोड़ना और 4 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों के लिए किफायती हवाई यात्रा उपलब्ध कराना है.
इस योजना के तहत दूरदराज, पहाड़ी और आकांक्षी जिलों में हवाई संपर्क बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा. इसमें विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र पर जोर होगा. साथ ही, हेलीपैड और छोटे हवाई अड्डों के विकास के लिए विशेष सहायता दी जाएगी.
74 से बढ़कर 159 हुआ देश का एयरपोर्ट नेटवर्क
भारत में हवाई अड्डों का नेटवर्क 2014 में 74 से बढ़कर 2024 में 159 हो गया, यानी एक दशक में इनकी संख्या दोगुने से अधिक हो गई. सरकार ने अगले पांच वर्षों में 50 नए हवाई अड्डे विकसित करने की भी प्रतिबद्धता जताई है. इसमें बिहार में नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का निर्माण, पटना हवाई अड्डे का विस्तार और बिहटा में मौजूदा हवाई अड्डे के विकास का काम शामिल है. इन पहलों का उद्देश्य हवाई यात्रा की भविष्य की मांग को पूरा करना और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है.
लैंडिंग और पार्किंग शुल्क किए गए माफ
इस योजना को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दिए गए हैं. इनमें कम सेवा वाले और दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई संपर्क को प्रोत्साहित करने के लिए 4,023.37 करोड़ रुपए की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) राशि का वितरण शामिल है. क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) के तहत उड़ानें संचालित करने के लिए लैंडिंग और पार्किंग शुल्क माफ कर दिए गए हैं. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) भी इन उड़ानों पर टर्मिनल नेविगेशन लैंडिंग शुल्क (टीएनएलसी) नहीं लगाता है. इसके अलावा, मार्ग नेविगेशन और सुविधा शुल्क (आरएनएफसी) में छूट दी जाती है.
पहले तीन वर्षों के दौरान आरसीएस हवाई अड्डों पर खरीदे जाने वाले विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क अधिकतम 2 प्रतिशत निर्धारित किया गया है. एयरलाइंस को अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कोड-शेयरिंग समझौते करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है.
राज्यों ने भी 10 वर्षों तक एटीएफ पर मूल्य वर्धित कर (वैट) घटाकर 1 प्रतिशत या उससे कम करने और सुरक्षा, अग्निशमन तथा उपयोगिता सेवाओं जैसी आवश्यक सुविधाएं रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है. फैक्टशीट में कहा गया है कि इस सहयोगात्मक व्यवस्था ने ऐसा माहौल तैयार किया है, जिसमें एयरलाइंस उन क्षेत्रों में सेवाएं देते हुए भी विकास कर सकती हैं, जिनकी लंबे समय से अनदेखी होती रही है.
स्रोत- आईएएनएस
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