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दशहरा पर सोने-चांदी में मजबूती, एक साल में गोल्ड ने 25 प्रतिशत तो सिल्वर ने 45 प्रतिशत का दिया रिटर्न

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। दशहरा के अवसर पर आज घरेलू शेयर बाजारों में कारोबार बंद है, लेकिन निवेशकों और खरीदारों की नजर सोने-चांदी की कीमतों पर बनी हुई है। हाल के उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना मजबूत स्तरों पर कारोबार कर रहा है और सोने का भाव 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के ऊपर बना हुआ है। वहीं चांदी की कीमतें 2.10 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के करीब बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ऊंची महंगाई और ब्याज दरों को लेकर जारी चर्चाओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोमवार को दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 618 रुपए यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,47,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी लगभग स्थिर रहकर 2,09,825 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। हालांकि भौतिक बाजार में सोने और चांदी की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,340 रुपए प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,062 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

वहीं आपको बता दें कि दशहरा के मौके पर कीमती धातुओं में निवेश करने वालों के लिए पिछले एक वर्ष का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशहरा से अब तक सोने की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए करीब 45 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है। यही कारण है कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों का रुझान अभी भी कीमती धातुओं की ओर बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालांकि सोना दबाव में बना हुआ है। स्पॉट गोल्ड करीब 4,144 डॉलर प्रति औंस और स्पॉट सिल्वर 57.44 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की चिंता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने सोने पर दबाव बनाए रखा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और टेक्नोलॉजी शेयरों में सुधार के कारण निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग भी कुछ कम हुई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर में सोना लगातार 4,100 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है। हालांकि बाजार अभी भी इस संभावना को मजबूत मान रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व वर्ष के अंत तक एक और ब्याज दर वृद्धि कर सकता है।

आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों को कम आकर्षक बनाती हैं। इसके बावजूद वैश्विक महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग सोने और चांदी को समर्थन देती हुई दिखाई दे रही है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो, US ट्रेड डील पर लग सकती है अंतिम मुहर

Secretary of State Rubio India Visit: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रहे व्यापार समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं. इसी बीच रुबियो मंगलवार को भारत की आधिकारिक यात्रा पर मुंबई पहुंचे. 

रुबियो के साथ भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी मुंबई पहुंचे. यहां वह विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीक जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है. समझौता होने पर दोनों देशों के कारोबार और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिल सकती है.

व्यापार समझौते पर क्या बोले रुबियो?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को उज्बेकिस्तान के समरकंद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है और दोनों पक्ष इसके काफी करीब हैं. उन्होंने रूस से तेल आयात के मुद्दे पर भी भारत की जरूरतों को ध्यान में रखने की बात कही. रुबियो के मुताबिक, रूस से तेल खरीदने को लेकर संभावित प्रतिबंधों और शुल्कों पर विचार करते समय भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझना जरूरी है.

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रस्तावित कदम का आर्थिक असर समझने के लिए समय चाहिए. इसमें वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव भी शामिल हैं. रुबियो ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार बताया.

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जयशंकर से किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

रुबियो की यात्रा से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुंबई में अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के साथ व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने भारत में कारोबार करना आसान बनाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत करने पर भी बातचीत की. रुबियो के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में भी इन मुद्दों के प्रमुखता से उठने की उम्मीद है. व्यापार समझौते पर प्रगति के अलावा दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के रास्तों पर विचार कर सकते हैं.

26/11 आतंकी हमले के पीड़ितों को देंगे श्रद्धांजलि

विदेश मंत्रालय के अनुसार, रुबियो मंगलवार दोपहर 3:40 बजे मुंबई के ताज महल पैलेस होटल स्थित ताज मेमोरियल में आतंकवाद के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देंगे. इसके बाद उसी स्थान पर उनकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत होगी. रुबियो मंगलवार शाम को जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'फ्रीडम 250 रिसेप्शन' में भी शामिल होंगे. इसके बाद बुधवार को उनके गुजरात के जामनगर जाने का कार्यक्रम है. जामनगर देश का एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र है.

भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है यह दौरा?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. ऐसे में रुबियो का यह दौरा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है. हालांकि, रुबियो ने समझौते को अंतिम रूप देने के करीब होने की बात कही है, लेकिन इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि समझौते पर कब तक हस्ताक्षर होंगे या इसकी शर्तें क्या होंगी.  

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  Sports

न्यूजीलैंड से जीत को कभी तरसता था भारत:पहली जीत में 10 साल लगे; अब लगातार तीसरी टी-20 सीरीज जीतने का मौका

2007 में भारत ने पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। टूर्नामेंट में टीम को सिर्फ एक हार मिली और वह न्यूजीलैंड के खिलाफ थी। इसके बाद भी भारत को इस टीम के खिलाफ पहली जीत हासिल करने में 10 साल लग गए। अब तस्वीर बदल चुकी है। 2020 से भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार पांच द्विपक्षीय टी-20 सीरीज जीत चुका है। इनमें तीन सीरीज भारत में और दो न्यूजीलैंड में खेली गईं। 22 अक्टूबर से न्यूजीलैंड में पांच मैचों की सीरीज शुरू होगी। यह बदलाव कैसे आया, न्यूजीलैंड में खेलना भारत के लिए अलग चुनौती क्यों है और इस बार कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने क्या सवाल होंगे? इसे 5 फैक्ट में समझते हैं… 1. पहली जीत 53 रन से मिली भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला टी-20 मुकाबला 2007 में जोहान्सबर्ग में हुआ था। भारत को इसमें 10 रन से हार मिली। 2009 के न्यूजीलैंड दौरे पर भी टीम इंडिया दोनों मैच गंवा बैठी। 2012 में चेन्नई में जीत करीब आई, लेकिन भारतीय टीम एक रन से चूक गई। 2016 के टी-20 वर्ल्ड कप में नागपुर में घरेलू मैदान पर खेलते हुए भी भारत 47 रन से हार गया। लगातार नाकामियों के बाद भारत ने 1 नवंबर 2017 को दिल्ली में पहली बार न्यूजीलैंड को हराया। रोहित शर्मा और शिखर धवन ने 80-80 रन की पारियां खेलीं, जिससे मेजबान टीम ने 20 ओवर में 202/3 का स्कोर बनाया। जवाब में कीवी टीम 149/8 तक ही पहुंच सकी। भारत ने 53 रन से मुकाबला जीत लिया। 2. 2020 से भारत का दबदबा, लगातार 5 सीरीज जीतीं भारत की तस्वीर 2020 में बदली। न्यूजीलैंड दौरे पर पांच मैचों की सीरीज में भारतीय टीम ने सभी मुकाबले जीते। इनमें दो मैच निर्धारित 20 ओवरों के बाद टाई हुए थे, लेकिन दोनों बार भारत ने सुपर ओवर में जीत दर्ज की। सुपर ओवर वह अतिरिक्त ओवर होता है, जिसमें टाई मैच का फैसला करने के लिए दोनों टीमों को एक-एक ओवर खेलने का मौका मिलता है। इसके बाद 2021 में न्यूजीलैंड भारत दौरे पर आया। भारतीय टीम ने तीनों मैच जीतकर सीरीज 3-0 से अपने नाम की। 2022-23 में भारत ने न्यूजीलैंड में फिर सीरीज जीती। पहले मैच में बारिश के कारण खेल नहीं हो सका। दूसरे में सूर्यकुमार यादव के नाबाद 111 रन की मदद से भारत ने 65 रन से जीत दर्ज की। तीसरा मैच बारिश से प्रभावित हुआ और डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) नियम के तहत टाई रहा। यह नियम बारिश के कारण ओवर कम होने पर दोनों टीमों के लक्ष्य की तुलना करने के लिए इस्तेमाल होता है। 3. न्यूजीलैंड की धरती पर पहली जीत 2019 में मिली न्यूजीलैंड की धरती पर पहली जीत के लिए टीम को फरवरी 2019 तक इंतजार करना पड़ा। ऑकलैंड में खेले गए दूसरे मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से हराया। हालांकि, तीन मैचों की सीरीज न्यूजीलैंड ने 2-1 से जीती थी। न्यूजीलैंड में खेलना आसान नहीं है। इसकी वजह वहां की परिस्थितियां हैं। कुछ मैदानों पर नई गेंद से तेज गेंदबाजों को हवा में स्विंग और पिच से उछाल मिल सकता है। मैदान की बाउंड्री भी हर दिशा में एक जैसी नहीं होती, इसलिए बल्लेबाजों को यह समझना होता है कि किस दिशा में शॉट खेलना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। 4. 2026 में वर्ल्ड कप फाइनल में हराया भारत ने इस साल टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भी न्यूजीलैंड को हराया था। 8 मार्च को अहमदाबाद में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 255/5 रन बनाए। संजू सैमसन ने 46 गेंदों पर 89 रन, ईशान किशन ने 25 गेंदों पर 54 रन और अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों पर 52 रन बनाए। भारत ने पारी के पहले छह ओवर यानी पावरप्ले में बिना विकेट गंवाए 92 रन जोड़ दिए। इसका मतलब था कि टीम ने शुरुआत से ही तेज रन बनाए और कोई विकेट भी नहीं खोया। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 159 रन पर ऑलआउट हो गई। जसप्रीत बुमराह ने 15 रन देकर चार विकेट लिए, जबकि अक्षर पटेल को तीन विकेट मिले। 5. श्रेयस की कप्तानी और भुवनेश्वर की वापसी पर नजर इस सीरीज में भारत की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे और न्यूजीलैंड की टीम मिचेल सैंटनर की अगुआई में उतरेगी। अय्यर के लिए यह सीरीज सिर्फ जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने का मौका नहीं है, बल्कि विदेशी परिस्थितियों में रणनीतिक फैसले लेने की परीक्षा भी होगी। कप्तान को मैच के दौरान कई फैसले लेने होते हैं। शुरुआत में किस बल्लेबाज को भेजना है, किस गेंदबाज को किस समय गेंद देनी है और आखिरी ओवरों में रन तेजी से बनाने के लिए कितने विकेट बचाने हैं। अय्यर की कप्तानी में भारत का विदेश में रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। टीम को आयरलैंड ने पहली बार हराया था। इसके बाद इंग्लैंड से भी टीम को हार का सामना करना पड़ा। भुवनेश्वर कुमार की वापसी भी भारत के लिए अहम होगी। उन्होंने आखिरी मैच नवंबर 2022 में खेला था। नई गेंद से गेंद को हवा में घुमाना उनकी खासियत रही है। Tue, 20 Oct 2026 23:00:00

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