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India AI Summit 2026: PM मोदी का MANAV AI विज़न, बोले- “इंसान रॉ मटेरियल नहीं”; Deepfake पर सख्त चेतावनी

नई दिल्ली : नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर भारत का स्पष्ट और दीर्घकालिक विजन पेश किया।

गुरुवार को हुए इस ऐतिहासिक सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई समेत 118 देशों के प्रतिनिधि और दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों के दिग्गज मौजूद रहे।

इतने बड़े वैश्विक मंच से प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि तकनीक का भविष्य केवल मशीनों से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और जवाबदेही से तय होगा। भारत का यह विजन एआई को भय नहीं, बल्कि मानवता के एक सुनहरे भविष्य के रूप में देखता है।

​एआई सिर्फ एक तकनीकी क्रांति नहीं, बल्कि 'सभ्यतागत मोड़' है

​अपने संबोधन मे प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को महज एक तकनीकी बदलाव मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे मानवता के इतिहास का एक "सभ्यतागत मोड़" करार दिया। पीएम मोदी ने वैश्विक नेताओं को सचेत करते हुए कहा कि तकनीकी महारत हासिल कर लेना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके साथ नैतिक स्पष्टता का होना भी उतना ही जरूरी है।

Global unity at Bharat Mandapam: AI इम्पैक्ट समिट में ग्रुप फोटो के लिए PM मोदी दुनिया के नेताओं और टेक दिग्गजों के साथ शामिल हुए। 

उन्होंने एआई को बताते हुए कहा कि अगर यह तकनीक दिशाहीन हो जाए, तो यह दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा व्यवधान और खतरा बन सकती है, लेकिन अगर इसे सही दिशा और नीयत के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो यह दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं का समाधान बन सकती है।

​एआई गवर्नेंस के लिए दुनिया को दिया पांच सूत्रीय 'MANAV' विजन

M – Moral & Ethical Systems: AI का आधार नैतिक मूल्यों पर हो।
A – Accountable Governance: पारदर्शी नियम और सशक्त निगरानी तंत्र।
N – National Sovereignty: “जिसका डेटा, उसका अधिकार।”
A – Accessible & Inclusive: AI मोनोपॉली नहीं, अवसरों का विस्तार बने।
V – Valid & Legitimate: कानूनी और सत्यापन योग्य सिस्टम।

उन्होंने कहा कि यह विज़न किसी एक देश का एजेंडा नहीं, बल्कि वैश्विक संवाद में भारत का योगदान है।

​'इंसान कोई रॉ मटेरियल या डेटा पॉइंट नहीं है'

​तकनीकी कंपनियों की डेटा इकट्ठा करने की होड़ पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री ने इंसानियत को केंद्र में रखने की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंसान केवल एक 'डेटा पॉइंट' या कंपनियों के लिए 'रॉ मटेरियल' नहीं हैं।

एआई के लोकतंत्रीकरण पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' का आह्वान किया कि वे इस नए एआई युग में मूकदर्शक न रहें, बल्कि सक्रिय भागीदार बनें।

दुनिया की चिंताओं को दूर करने के लिए उन्होंने न्यूक्लियर पावर का बहुत ही सटीक उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जिस तरह मानवता ने पहले भी शक्तिशाली और विनाशकारी तकनीकों को अपने संतुलन और नियमों से समाज के हित में अपनाया है, ठीक उसी तरह एआई के साथ भी दुनिया को वही जिम्मेदारी निभानी होगी।

​डीपफेक, सिंथेटिक कंटेंट और बच्चों की सुरक्षा पर गहरी चिंता

​एआई के दुरुपयोग और उससे पैदा होने वाले खतरों को लेकर प्रधानमंत्री ने सख्त चेतावनी जारी की। उन्होंने 'डीपफेक' और सिंथेटिक कंटेंट को दुनिया के खुले और लोकतांत्रिक समाजों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बताया। पीएम मोदी ने कहा कि फेक वीडियो और ऑडियो से समाज में अस्थिरता फैल सकती है, इसलिए इसके लिए कड़े वैश्विक मानक तय किए जाने चाहिए।

उन्होंने एआई जेनरेटेड कंटेंट की पहचान के लिए 'वॉटरमार्किंग' और 'सोर्स लेबलिंग' जैसे नियमों को तुरंत लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने तकनीकी दिग्गजों से अपील की कि आने वाली पीढ़ियों और बच्चों के लिए डिजिटल स्पेस को हर हाल में सुरक्षित बनाया जाए, ताकि तकनीक उनके बचपन को नुकसान न पहुंचाए।

भारत का वैश्विक नेतृत्व और सुरक्षित एआई की ओर कदम

​फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और दुनिया भर से आए 118 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि एआई की वैश्विक नीति तय करने में भारत अब ड्राइविंग सीट पर है। इस समिट के जरिए भारत ने पूरी दुनिया को यह साफ और कड़ा संदेश दे दिया है कि तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सुंदर पिचाई ने कहा- AI अरबों लोगों का जीवन बदल देगा

गूगल भारत में अपने 15 बिलियन डॉलर (लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये) के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के तहत एक 'फुल-स्टैक AI हब' स्थापित कर रहा है। यह हब विशाखापत्तनम में बनेगा, जिसमें गीगावाट स्केल की कंप्यूटिंग क्षमता और एक नया इंटरनेशनल सब-सी केबल गेटवे शामिल होगा।

हर किसी के लिए उपयोगी और सशक्त AI विकसित करने के लिए हमें बोल्ड और साहसिक कदम उठाने होंगे। क्योंकि AI न केवल अरबों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है, बल्कि दुनिया की सबसे जटिल समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत कर सकता है। हमें उन क्षेत्रों और समुदायों की चुनौतियों को हल करने के लिए भी उतना ही दृढ़ संकल्पित होना चाहिए, जहां अभी तक तकनीक की पहुंच बहुत सीमित रही है।

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