नेपाल 4 झीलों का जलस्तर घटाएगा:भारत में भी बाढ़ का खतरा कम होगा; अगस्त में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ जैसी तबाही रोकने की तैयारी
नेपाल अगस्त में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ जैसी तबाही रोकने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए चार ग्लेशियरों से बनने वाली झीलों का जलस्तर घटाया जाएगा। इससे नेपाल के साथ भारत में भी बाढ़ का खतरा कम होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट पर 474 करोड़ रुपए खर्च होंगे और इसे 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन झीलों से बिहार में बाढ़ का खतरा बना रहता है नेपाल सरकार ने इस काम के लिए मनांग जिले की थुलागी, संखुवासभा की लोअर वरुण और होंगु-2 के साथ सोलुखुम्बु की लुम्दिंग झील को चुना है। ये झीलें समुद्र तल से 4050 से 5483 मीटर की ऊंचाई पर हैं। योजना के तहत होंगु-2 झील का जलस्तर एक मीटर घटाया जाएगा। वहीं, थुलागी, लोअर वरुण और लुम्दिंग झीलों का जलस्तर तीन-तीन मीटर कम किया जाएगा। इनमें से तीन झीलों का पानी कोशी नदी और गंडकी नदी में पहुंचता है। ये दोनों नदियां बिहार से होकर गुजरती हैं। इसलिए इस योजना से बिहार की बस्तियों, खेती और सड़कों समेत जरूरी सुविधाओं को भी बाढ़ से बचाने में मदद मिल सकती है। झीलों का जलस्तर कैसे कम किया जाएगा? डॉ. भट्टराई के मुताबिक, लगातार काम करने का मौका मिले तो तीन साल में झीलों का जलस्तर घटाया जा सकता है। लेकिन ये झीलें ऊंचाई वाले इलाकों में हैं, जहां खराब मौसम के कारण साल में केवल 5 से 6 महीने ही काम हो सकता है। इसी वजह से प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 2033 तक का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा। हालांकि, इन चार झीलों के फटने पर सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी गई है। भारत, नेपाल और चीन की 47 झीलों से खतरा अगस्त में नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर से बनी झीलों से होने वाले खतरे को फिर सामने ला दिया था। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट की 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत, नेपाल और चीन की 47 हिमनद झीलों को ज्यादा खतरे वाला बताया गया था। इनमें नेपाल की 21, चीन की 25 और भारत की एक झील शामिल है। इनमें से 42 झीलों का पानी कोशी नदी में पहुंचता है। इनमें 24 झीलें चीन और 18 नेपाल में हैं। कोशी नदी नेपाल से भारत के बिहार में आती है, इसलिए इन झीलों के फटने से दोनों देशों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए ग्रीन क्लाइमेट फंड ₹343 करोड़ देगा चारों झीलों का जलस्तर घटाने की परियोजना पर कुल 474 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें सबसे ज्यादा 343 करोड़ रुपए ग्रीन क्लाइमेट फंड देगा। यह संयुक्त राष्ट्र के जलवायु समझौते के तहत बना अंतरराष्ट्रीय कोष है। नेपाल सरकार 107 करोड़ और UNDP 20 करोड़ रुपए देगा। इसके अलावा निजी क्षेत्र से भी 3 करोड़ रुपए मिलेंगे। इस प्रोजेक्ट से नेपाल में 38 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा मिलने का अनुमान है। इससे बाढ़ के कारण होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान में भी 212 करोड़ रुपए तक की कमी आ सकती है। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़: कई पुल-घर बहे, 10 लापता; लैंडस्लाइड से स्यारी नदी का रास्ता बंद, बिहार में भी खतरा नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में करीब 35 घर और 6 पुल बह गए, जबकि कम से कम 10 लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…
इंदौर में आज 10 से ज्यादा जगहों पर होगा रावण दहन, दशहरा मैदान में शाम 7 बजे जलेगा 111 फीट का रावण, CM मोहन यादव करेंगे शस्त्र पूजन
इंदौर में आज मंगलवार को दशहरे पर शहर के 10 से ज्यादा स्थानों पर रावण दहन होगा। दरअसल दशहरा मैदान में 111 फीट ऊंचे रावण के साथ 250 फीट लंबी लंका का दहन भी किया जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव डीआरपी लाइन में पुलिस विभाग के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। चिमनबाग, छावनी, विजय नगर, कालानी नगर और सुभाष नगर सहित कई इलाकों में भी रावण दहन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
दरअसल दशहरा मैदान पर शाम 7 बजे रावण दहन का कार्यक्रम रखा गया है। इससे पहले महू नाके से मैदान तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। मैदान में राम-रावण युद्ध और हनुमान सहित वानर सेना के लंका पर चढ़ाई करने का मंचन होगा। वहीं रावण दहन से पहले होलकर स्टेट के पदाधिकारी पालकी के साथ शोभायात्रा लेकर पहुंचेंगे। इस दौरान शमी पूजन भी किया जाएगा।
दशहरा मैदान पर 111 फीट के रावण का दहन
वहीं दशहरा महोत्सव समिति के संयोजक सत्यनारायण सलवाडिया और पिंटू जोशी के मुताबिक मंगलवार शाम 7 बजे दशहरा मैदान पर रावण दहन होगा। आयोजन में 111 फीट ऊंचे रावण के पुतले के साथ 250 फीट लंबी लंका का दहन किया जाएगा। कार्यक्रम से पहले महू नाके से दशहरा मैदान तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। साथ ही मैदान में राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन भी होगा। इसके बाद हनुमान और वानर सेना के लंका पर चढ़ाई करने का दृश्य दिखाया जाएगा। रावण दहन से पहले होलकर स्टेट के पदाधिकारी पालकी के साथ शोभायात्रा लेकर मैदान पहुंचेंगे। यहां शमी पूजन भी किया जाएगा।
रात को होगा रावण दहन
दरअसल इंदौर के अलग-अलग इलाकों में भी दशहरे पर रावण दहन के कार्यक्रम होंगे। चिमनबाग मैदान में रात 8 बजे के बाद रावण और लंका का दहन किया जाएगा। इससे पहले यहां भजनों की प्रस्तुति होगी। आरएनटी मार्ग स्थित छावनी में 121 फीट ऊंचे रावण का दहन रात 12 बजे किया जाएगा। इससे पहले भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी होगी। छावनी में पिछले 34 वर्षों से रावण दहन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। विजय नगर, कालानी नगर और सुभाष नगर सहित शहर के अन्य स्थानों पर भी रावण दहन होगा। दशहरे के अगले दिन शहर में बासी दशहरा भी मनाया जाएगा।
DRP लाइन में मुख्यमंत्री करेंगे शस्त्र पूजन
वहीं दशहरे के दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव डीआरपी लाइन में पुलिस विभाग के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके लिए पुलिस अधिकारियों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। सोमवार को डीआरपी लाइन में पूजा स्थल को सजाया गया और कार्यक्रम को लेकर विशेष व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश सिंह और मयंक अवस्थी सहित अन्य अधिकारी शामिल होंगे। डीआरपी लाइन में हर साल दशहरे पर शस्त्र पूजन किया जाता है। शहर के थानों में भी शस्त्र पूजन के आयोजन होंगे। संबंधित थानों के अधिकारी अपने-अपने यहां पूजन करेंगे। इस तरह दशहरे पर इंदौर में एक ओर अलग-अलग मैदानों में रावण दहन होगा, वहीं पुलिस विभाग की ओर से शस्त्र पूजन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
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