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मेधावी विद्यार्थियों के लिए योगी सरकार की पहल, दसवीं के बाद मुफ्त कोचिंग की देगी सुविधा

दसवीं में गणित और विज्ञान में हासिल किए गए अंक अब मेधावी विद्यार्थियों के लिए इंजीनियर या डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बन सकते हैं. योगी सरकार में उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग में पढ़ रहे विद्यार्थियों को जेईई और नीट की तैयारी के लिए दक्षणा फाउंडेशन के माध्यम से एक साल की निःशुल्क कोचिंग मिलेगी. खास बात यह है कि इस अवसर के लिए पात्रता तय करने में कक्षा 10 के अंकों के साथ पारिवारिक आय को भी आधार बनाया गया है.

चयनित विद्यार्थियों को पुणे के निकट दक्षणा वैली परिसर में कोचिंग के साथ आवास और भोजन की सुविधा भी मुफ्त मिलेगी. समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग में अध्ययनरत और मई 2027 तक बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी संयुक्त दक्षणा चयन परीक्षा (जेडीएसटी-2027) के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं. 

पांच प्रतिशत अंकों की छूट मिलेगी

इंजीनियरिंग वर्ग में सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए कक्षा 10 के गणित एवं विज्ञान विषयों में 85 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं. वहीं, छात्राओं के लिए कटऑफ 80 प्रतिशत है. यानी सामान्य श्रेणी की छात्राओं को पात्रता के लिए पांच प्रतिशत अंकों की छूट मिलेगी. अन्य श्रेणियों और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग मानक लागू होंगे. 

विद्यार्थियों को आवेदन का अवसर मिलेगा

नीट की तैयारी के लिए सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए कक्षा 10 में 80 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं. अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह सीमा 75 प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए 65 प्रतिशत है. इन मानकों के जरिए अलग-अलग श्रेणियों के पात्र विद्यार्थियों को आवेदन का अवसर मिलेगा. 

विद्यार्थियों को एक साल तक निःशुल्क कोचिंग

योजना का लाभ लेने के लिए छात्रों के परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम और छात्राओं के परिवार की आय पांच लाख रुपये से कम होनी चाहिए. चयनित विद्यार्थियों को एक साल तक निःशुल्क कोचिंग, आवास और भोजन मिलेगा. सर्वोदय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को पात्र विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं. इच्छुक विद्यार्थी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. 

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UP Election 2027: फतेहपुर को लेकर पार्टियों की क्या होगी रणनीति, यूपी विधानसभा चुनाव में जानें किन सीटों पर जीत है अहम

UP Election 2027: फतेहपुर में भाजपा, समाजवादी पार्टी और अपना दल (एस) के बीच सियासी मुकाबला दिलचस्प रहने की उम्मीद है. 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में बीजेपी ने तीन, समाजवादी  पार्टी ने दो और अपना दल (एस) ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी. ऐसे में 2027 के चुनाव में इन सीटों पर कब्जा बनाए रखना और विरोधियों के वोट बैंक में सेंध लगाना सभी प्रमुख दलों के लिए अहम होगा.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच फतेहपुर जिले की सियासत पर भी नजरें रहेंगी. कानपुर और प्रयागराज के बीच स्थित यह जिला राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक लिहाज से अहम है. यहां की छह विधानसभा सीटों पर अलग-अलग सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की छवि चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है.

तीन सीटों पर जीत दर्ज की

2022 के विधानसभा चुनाव में फतेहपुर में मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी (सपा) और अपना दल (एस) के बीच रहा था. भाजपा ने जहां तीन सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं सपा को दो सीटें मिलीं. भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) ने भी एक सीट पर कब्जा किया. इस परिणाम ने साफ किया कि जिले में किसी एक पार्टी का दबदबा सभी सीटों पर समान नहीं है.

2027 में बीजेपी के सामने अपने पुराने प्रदर्शन को मजबूत करने की चुनौती होगी. इस दौरान सपा अपनी जीती हुई सीटों को बचाने के साथ अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार करना चाहेगी. वहीं, अपना दल (एस) के लिए जहानाबाद के बजाय बिंदकी जैसी सीटों पर गठबंधन की भूमिका और स्थानीय जनाधार महत्वपूर्ण हो सकता है. बहुजन समाज  पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के सामने भी अपने समर्थन को प्रभावी चुनावी नतीजों में बदलने की चुनौती रहेगी.

फतेहपुर जिले की छह विधानसभा सीटों का गणित

फतेहपुर जिले में जहानाबाद, बिंदकी, फतेहपुर सदर, अयाह शाह, हुसैनगंज और खागा विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इनमें खागा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है. 2022 के नतीजों के आधार पर इन क्षेत्रों में अलग-अलग रणनीति की जरूरत होगी. आपके दिए गए आंकड़ों को साफ-सुथरी, खबर में इस्तेमाल करने योग्य टेबल में व्यवस्थित कर दिया है.

विधानसभा सीट

2022 के विजेता

पार्टी

जीत का अंतर (वोट)

जहानाबाद

राजेंद्र सिंह पटेल

बीजेपी

18,192

बिंदकी

जय कुमार सिंह जैकी

अपना दल (एस)

3,797

फतेहपुर सदर

चंद्र प्रकाश

समाजवादी पार्टी (सपा)

8,601

अयाह शाह

विकास गुप्ता

बीजेपी

13,006

हुसैनगंज

ऊषा मौर्य

समाजवादी पार्टी (सपा)

25,181

खागा (आरक्षित)

कृष्णा पासवान

बीजेपी

5,509

    इन आंकड़ों से पता चलता है कि बिंदकी, खागा और फतेहपुर सदर में मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा था. वहीं, हुसैनगंज में सपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की.

    1. जहानाबाद: भाजपा के सामने सीट बचाने की चुनौती

    जहानाबाद विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा के राजेंद्र सिंह पटेल ने सपा के मदन गोपाल वर्मा को 18,192  वोटों से हराया था. इस जीत के बाद भाजपा के लिए यहां अपना जनाधार बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा. 2027 में भाजपा की रणनीति में संगठन को मजबूत करना, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच बनाना और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाना शामिल हो सकता है. पार्टी को यह भी देखना होगा कि क्षेत्र में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और रोजगार जैसे मुद्दों पर मतदाताओं की क्या राय है.

    सपा के लिए जहानाबाद में चुनौती पिछले चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई करने की होगी. पार्टी को अपने समर्थकों को एकजुट करने के साथ उन मतदाताओं तक पहुंचना होगा, जिन्होंने 2022 में भाजपा को समर्थन दिया था. यहां उम्मीदवार का स्थानीय प्रभाव और सामाजिक समीकरण दोनों निर्णायक हो सकते हैं.

    2. बिंदकी: गठबंधन की राजनीति का अहम केंद्र

    बिंदकी जिले की उन सीटों में है, जहां 2022 का मुकाबला काफी करीबी रहा. अपना दल (एस) के जय कुमार सिंह जैकी ने सपा के रामेश्वर दयाल उर्फ दयालू ओमर को 3,797 वोटों से मात दी थी. यह अंतर बताता है कि  इस सीट पर छोटे-छोटे वोट बदलाव भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं.

    भाजपा और अपना दल (एस) के बीच गठबंधन के हालात 2027 में इस सीट की रणनीति का अहम पहलू हो सकता है. सीट बंटवारे, उम्मीदवार के चयन और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल का असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है. सपा के लिए बिंदकी में वापसी का रास्ता स्थानीय असंतोष को समझने, संगठन को सक्रिय करने और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच समर्थन बढ़ाने से होकर गुजर सकता है. 

    3. फतेहपुर सदर: भाजपा और सपा की सीधी लड़ाई

    फतेहपुर सदर सीट पर 2022 में सपा के चंद्र प्रकाश ने भाजपा के विक्रम सिंह को 8,601 वोटों से हराया था. चंद्र प्रकाश को 96,839 वोट मिले. वहीं भाजपा के उम्मीदवार को 88,238 वोट हासिल हुए. इससे स्पष्ट है कि दोनों दलों के बीच यहां मजबूत प्रतिस्पर्धा रही.

    2027 में सपा के सामने अपनी जीत दोहराने की चुनौती होगी. पार्टी को अपने मौजूदा समर्थन को बनाए रखने के साथ स्थानीय समस्याओं पर खास रुख रखना होगा. दूसरी ओर भाजपा के लिए पिछली हार का विश्लेषण कर मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करना जरूरी है. फतेहपुर शहर और करीब के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं, यातायात, व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अहम मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बन   सकते हैं. 

    4. अयाह शाह: BJP की बढ़त को चुनौती देने की कोशिश

    अयाह शाह सीट पर बीजेपी के विकास गुप्ता ने 2022 में सपा के विश्वंभर प्रसाद निषाद को 13,006 वोटों से  हराया था. भाजपा के लिए यह सीट अपने प्रदर्शन को दोहराने का अवसर होगी, जबकि सपा को पिछले चुनाव में मिले वोटों को मजबूत आधार में बदलना होगा. यहां चुनावी रणनीति में स्थानीय विकास, ग्रामीण संपर्क, कृषि से  जुड़े मुद्दे और सामाजिक समीकरण अहम हो सकते हैं. सपा के लिए उम्मीदवार के चयन और बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की भूमिका अहम होगी. पार्टी को यह देखना होगा कि पिछली बार उसके समर्थन में कहां कमी रही और किन क्षेत्रों में नए मतदाताओं को जोड़ा जा सकता है.

    5. हुसैनगंज: सपा की सबसे मजबूत सीटों में एक

    हुसैनगंज विधानसभा सीट 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के लिए जिले की सबसे मजबूत सीटों में शामिल रही. सपा की ऊषा मौर्य ने भाजपा के रणवेंद्र प्रताप सिंह को 25,181 वोटों के अंतर से हराया था. जिले की छह सीटों  में यह सबसे बड़ा जीत का अंतर था. 2027 में सपा की कोशिश इस बढ़त को बरकरार रखने की होगी. पार्टी को अपने मौजूदा मतदाताओं के साथ पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और अन्य सामाजिक समूहों के बीच समर्थन बनाए रखने पर ध्यान देना पड़ सकता है.

    भाजपा के लिए हुसैनगंज में मुकाबला आसान नहीं होगा. पार्टी को पिछले चुनाव में मिली हार के कारणों का आकलन करना होगा. मजबूत उम्मीदवार, बूथ स्तर पर बेहतर प्रबंधन और स्थानीय समस्याओं पर प्रभावी अभियान उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इस सीट पर उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि और क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी निर्णायक साबित हो सकती है.

    6. खागा: आरक्षित सीट पर किसकी होगी पकड़?

    खागा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2022 में भाजपा की कृष्णा पासवान ने सपा के रामतीर्थ परमहंस को 5,509 वोटों से मात दिया था. कम अंतर से मिली जीत बताती है कि इस सीट पर दोनों प्रमुख दलों  के बीच मुकाबला तगड़ा हो सकता है. भाजपा के लिए यहां अपनी जीत दोहराने की चुनौती होगी. पार्टी को अनुसूचित जाति के वोटरों के साथ अन्य सामाजिक समूहों में भी समर्थन बनाए रखने की रणनीति बनानी होगी. स

    क्या होगी पार्टियों की रणनी​ति 

    फतेहपुर जिले में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी तीन सीटों को बचाने की होगी. जहानाबाद, अयाह शाह और खागा में पार्टी ने 2022 में जीत दर्ज की थी. इसके अलावा बिंदकी में उसकी सहयोगी अपना दल (एस) ने सफलता हासिल की थी. 2027 के लिए भाजपा की संभावित रणनीति में तीन पहलू अहम हो सकते हैं. पहला, मौजूदा विधायकों और स्थानीय नेतृत्व के कामकाज का आकलन. दूसरा, बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना है.  तीसरा,केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों के साथ संपर्क बनाए रखना. 

    संगठनात्मक मजबूती पर भी काम करना होगा

    वहीं समाजवादी पार्टी ने 2022 में फतेहपुर सदर और हुसैनगंज में जीत दर्ज की थी. बिंदकी और खागा में भी पार्टी दूसरे स्थान पर रही.  ऐसे में सपा के पास जिले में अपना प्रभाव बढ़ाने के अवसर होंगे. पार्टी की रणनीति में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लाने का प्रयास अहम हो सकता है. इस सामाजिक समीकरण को चुनावी सफलता में बदलने के लिए स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार की छवि और संगठनात्मक मजबूती पर भी काम करना होगा.

     इस बीच बसपा और कांग्रेस की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. 2022 के चुनाव में बसपा ने सभी छह सीटों पर मुकाबले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, हालांकि वह कोई सीट नहीं जीत सकी. बसपा के लिए चुनौती अपने समर्थन को दोबारा मजबूत करने और उसे सीटों पर प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन में बदलने की होगी. खासकर खागा जैसी आरक्षित सीट पर पार्टी की रणनीति पर नजर रहेगी. कांग्रेस के सामने जिले में अपना संगठन मजबूत करने और मतदाताओं के बीच प्रभाव बढ़ाने की चुनौती होगी. पार्टी का प्रदर्शन, उम्मीदवारों का चयन और विपक्षी दलों के साथ संभावित तालमेल चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकते हैं.

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      Sports

    Rajasthan के Sachin Yadav और Karan Lamba ने ठोके 194 रन Railways के खिलाफ 338 रन की साझेदारी

    रणजी ट्रॉफी में राजस्थान और रेलवे के बीच खेले जा रहे मुकाबले के दूसरे दिन ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे क्रिकेट फैंस लंबे समय तक याद रख सकते हैं। राजस्थान के बल्लेबाज सचिन यादव और करण लांबा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 194-194 रन बनाए, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी दोहरे शतक से केवल 6 रन दूर रह गए। दोनों का एक ही स्कोर पर आउट होना इस मुकाबले का सबसे खास संयोग बन गया।

    जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले जा रहे ग्रुप डी के इस मुकाबले में राजस्थान ने दूसरे दिन सुबह 247 रन पर 2 विकेट से आगे खेलना शुरू किया। सचिन और करण ने अपनी शानदार बल्लेबाजी जारी रखी और रेलवे के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। दोनों के बीच 338 रन की बड़ी साझेदारी हुई, जिसने राजस्थान को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि, सचिन के आउट होने के बाद मेजबान टीम की पारी लड़खड़ा गई और पूरी टीम 497 रन बनाकर आउट हो गई।

    सचिन यादव ने अपनी 194 रन की पारी के लिए 358 गेंदों का सामना किया। इस दौरान उन्होंने 22 चौके और 4 छक्के लगाए। दूसरी ओर, अपना 11वां फर्स्ट क्लास मुकाबला खेल रहे करण लांबा ने केवल 284 गेंदों पर 194 रन बनाए। उनकी पारी में 19 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। करण ने इस दौरान अपना तीसरा रणजी शतक भी पूरा किया। दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य और आक्रामकता के बीच अच्छा तालमेल दिखाया।

    सुबह नई गेंद आने के बाद बल्लेबाजों को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रेलवे के गेंदबाजों ने किनारे लगवाने में सफलता हासिल की, लेकिन खराब क्षेत्ररक्षण के कारण टीम कुछ आसान मौके गंवा बैठी। इसका फायदा राजस्थान के बल्लेबाजों को मिला। शुरुआती दबाव से निकलने के बाद सचिन और करण ने खुलकर रन बनाए और रेलवे के गेंदबाजी आक्रमण को थका दिया। सचिन स्टंप आउट हुए, जबकि करण पॉइंट पर कैच दे बैठे।

    दोनों बल्लेबाज कई वर्षों से राजीव गांधी क्रिकेट अकादमी में साथ अभ्यास करते रहे हैं। करण ने बताया कि लंबे समय से साथ खेलने के कारण दोनों एक-दूसरे की ताकत और खेल को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने यह भी माना कि दोहरे शतक से चूकने का थोड़ा अफसोस जरूर था, लेकिन वह इस बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोच रहे थे। करण के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में बल्लेबाजी के लिए इतनी अच्छी पिच कम ही मिलती है और उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की कोशिश की।

    दिन के आखिरी सत्र में राजस्थान के गेंदबाजों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। पदार्पण कर रहे तेज गेंदबाज दानिश भांबू ने सटीक गेंदबाजी की, जबकि चेतन शर्मा और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह ने उनका साथ दिया। बाएं हाथ के स्पिनर मोहित चांगड़ा ने सलामी बल्लेबाज विवेक सिंह को पगबाधा आउट कर रेलवे को पहला झटका दिया।

    दिन का खेल समाप्त होने तक रेलवे ने 1 विकेट पर 46 रन बना लिए थे और वह राजस्थान से 451 रन पीछे है। ऐसे में मुकाबले में वापसी करने के लिए रेलवे के बल्लेबाजों को अगले दिन बड़ी साझेदारियां करनी होंगी।

    Mon, 19 Oct 2026 22:45:00 +0530

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