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चहल बोले- तलाक के बाद शराब की लत लगी:पैनिक अटैक से चेहरा टेढ़ा हो जाता था, बोलना मुश्किल था; 26 दिन रिहैब सेंटर में रहा

भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शराब की लत, तलाक और पैनिक अटैक पर बात की। उन्होंने आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट में बताया कि धनश्री वर्मा से तलाक के बाद उनकी शराब की लत हद से ज्यादा बढ़ गई थी। वे 26 दिन रिहैब सेंटर में रहे थे। 36 साल के चहल ने बताया कि पैनिक अटैक के दौरान उनका चेहरा सिकुड़कर टेढ़ा हो जाता था। इससे बोलना भी मुश्किल होता था। चहल 3 साल से टीम इंडिया से बाहर हैं। उन्होंने पिछला टी-20 इंटरनेशनल मैच अगस्त 2023 में खेला था। उन्होंने 15 दिन पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लिया था। पैनिक अटैक में होंठ कसकर एक तरफ खिंच जाते थे- चहल चहल ने पैनिक अटैक के बारे में बताया, ‘एंग्जायटी में दिल की धड़कन तेज हो जाती है और मेरा चेहरा सिकुड़ जाता था।’ उन्होंने कहा, ‘मैं बोल भी नहीं पाता था। मेरा होंठ कसकर एक तरफ खिंच जाता था। चहल ने कहा कि इससे लोग समझ जाते थे कि उनके साथ कुछ गलत है। उन्हें डर था कि सोशल मीडिया पर लोग कई तरह की बातें करेंगे। चहल ने कहा, ‘मैंने सोचा कि IPL पर ध्यान देते हैं।’ तलाक के बाद मानसिक स्थिति बिगड़ी- चहल चोपड़ा ने पूछा कि शराब पीना कैसे और क्यों शुरू हुआ। चहल ने कहा, ‘शुरुआत में मैं युवा था। पार्टियां होती थीं। मैंने 2011 में अपना पहला IPL खेला था।’ एबी डिविलियर्स ने एक बार उनसे कहा था, 'जिंदगी में संतुलन जरूरी है।' चहल ने कहा कि यह बात सुनने में आसान है, लेकिन अपनाना आसान नहीं होता। चहल ने कहा, ‘तलाक के बाद चीजें हद से ज्यादा बढ़ गई थीं। मेरी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं इसी रास्ते पर चलता रहा, तो जिस चीज से मुझे सबसे ज्यादा प्यार है, उस क्रिकेट को बर्बाद कर दूंगा।’ चहल ने कहा- कठिन समय में दोस्त और परिवार हमेशा साथ रहा आकाश चोपड़ा ने चहल से पूछा कि निजी जिंदगी की परेशानियों के दौरान उनके साथ कौन था। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भावनात्मक चोट, पेशेवर जिंदगी के संकट से अलग होती है। चहल ने जवाब दिया, ‘मेरे सबसे अच्छे दोस्त और परिवार मेरे साथ थे।’ शराब छोड़ने पर चहल ने कहा, ‘पिछले साल काउंटी क्रिकेट के बाद मैंने शराब छोड़ने का फैसला किया। बात हद से ज्यादा बढ़ गई थी।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने रिहैब सेंटर में दाखिला लिया और 26 दिन वहां रहा। अब मुझे पता है कि इसे कैसे संभालना है।’ चहल के मुताबिक, इस फैसले से उनकी निजी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। उनकी समझ बढ़ी और भावनाएं संतुलित हुईं। उन्होंने कहा, ''पिछले IPL में मेरा शरीर फिर 30 साल का महसूस हो रहा था। मैं जिम कर रहा था, फील्डिंग ड्रिल कर रहा था और ठीक से ट्रेनिंग कर रहा था।' 18 करोड़ में पंजाब किंग्स से जुड़ने पर खुद को साबित किया परेशानी धीरे-धीरे कम होने पर चहल ने इसे पीछे छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ‘पंजाब किंग्स के साथ मेरे पहले साल में टीम ने मेरे लिए 18 करोड़ रुपए दिए। मुझे लगा कि उन्होंने मुझ पर इतने पैसे के साथ भरोसा किया है, इसलिए मैं उन्हें निराश नहीं कर सकता।’ उन्होंने KKR के खिलाफ मैच का जिक्र किया। चहल ने कहा कि 111 रन के लक्ष्य का बचाव करते हुए उन्हें लगा कि उन्हें आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभानी होगी। चहल को 2025 सीजन से पहले चुना गया था। IPL 2025 में उन्होंने 16 विकेट लिए, जबकि 2026 में 12 विकेट लिए। चहल ने 15 दिन पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्याय लिया था ------------------------------------------------------------

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संजय मांजरेकर बोले- पिच फ्लैट बनाएं, बाउंड्री छोटी करें:बॉलर्स के खिलाफ नियम सख्त करने की जरूरत, ताकि हर मैच में 300 रन बने

‘मुझे लगता है कि पिचों को और फ्लैट बनाने, बाउंड्री छोटी करने और गेंदबाजों के खिलाफ नियम और सख्त करने की गुंजाइश है, ताकि टी-20 में नियमित रूप से 20 ओवर में 300 रन बन सकें।’ यह कहना है पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर का। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पोस्ट के जरिए कही। मांजरेकर की पोस्ट ऐसे समय आई है, जब फ्लैट भारतीय पिचों पर सवाल उठ रहे हैं। गौतम गंभीर, युजवेंद्र चहल जैसे कई दिग्गज क्रिकेटर्स पिचों को बॉलिंग फ्रेंडली बनाने की मांग कर रहे हैं। एक दिन पहले चेतन शर्मा ने बॉलिंग पिचों की मांग की थी एक दिन पहले भारतीय टीम के पूर्व चीफ सिलेक्टर चेतन शर्मा ने कहा- ‘टी-20 क्रिकेट में बैटिंग पिचों से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।’ नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में चेतन ने कहा- ‘मैं मानता हूं कि गेंदबाज रन देने के लिए मैदान पर आते हैं। लेकिन उन्हें इतना मत मारिए कि वे दोबारा मैदान पर आना ही न चाहें।’ गंभीर ने हफ्ते में 2 बार पिच पर सवाल उठाए थे मांजरेकर ने 37 टेस्ट में 2043 रन बनाए, स्पेशलाइज ट्रेनिंग देते हैं संजय मांजरेकर भारतीय कमेंटेटर हैं, जोकि अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उन्हें तकनीकी रूप से मजबूत बैटिंग स्किल के लिए भी जाना जाता है। वे क्रिकेटर्स को स्पेशलाइज ट्रेनिंग देते हैं। मांजरेकर 37 मैचों के टेस्ट करियर में 2043 रन बनाए। इसमें 4 शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं। उन्होंने 74 वनडे मैचों में 1994 रन बनाए। इस फॉर्मेट में संजय के नाम एक शतक है। -------------------------------------------------- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… चहल बोले-पैनिक अटैक से मेरा चेहरा टेढ़ा हो जाता था, बोलना मुश्किल होता था; तलाक के बाद शराब की लत लगी, 26 दिन रिहैब किया भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शराब की लत, तलाक और पैनिक अटैक पर बात की। उन्होंने आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट में बताया कि धनश्री से तलाक के बाद उनकी शराब की लत बढ़ गई थी। वे 26 दिन रिहैब सेंटर में रहे थे। पढ़ें पूरी खबर

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  Sports

न्यूजीलैंड से जीत को कभी तरसता था भारत:पहली जीत में 10 साल लगे; अब लगातार तीसरी टी-20 सीरीज जीतने का मौका

2007 में भारत ने पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। टूर्नामेंट में टीम को सिर्फ एक हार मिली और वह न्यूजीलैंड के खिलाफ थी। इसके बाद भी भारत को इस टीम के खिलाफ पहली जीत हासिल करने में 10 साल लग गए। अब तस्वीर बदल चुकी है। 2020 से भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार पांच द्विपक्षीय टी-20 सीरीज जीत चुका है। इनमें तीन सीरीज भारत में और दो न्यूजीलैंड में खेली गईं। 22 अक्टूबर से न्यूजीलैंड में पांच मैचों की सीरीज शुरू होगी। यह बदलाव कैसे आया, न्यूजीलैंड में खेलना भारत के लिए अलग चुनौती क्यों है और इस बार कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने क्या सवाल होंगे? इसे 5 फैक्ट में समझते हैं… 1. पहली जीत 53 रन से मिली भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला टी-20 मुकाबला 2007 में जोहान्सबर्ग में हुआ था। भारत को इसमें 10 रन से हार मिली। 2009 के न्यूजीलैंड दौरे पर भी टीम इंडिया दोनों मैच गंवा बैठी। 2012 में चेन्नई में जीत करीब आई, लेकिन भारतीय टीम एक रन से चूक गई। 2016 के टी-20 वर्ल्ड कप में नागपुर में घरेलू मैदान पर खेलते हुए भी भारत 47 रन से हार गया। लगातार नाकामियों के बाद भारत ने 1 नवंबर 2017 को दिल्ली में पहली बार न्यूजीलैंड को हराया। रोहित शर्मा और शिखर धवन ने 80-80 रन की पारियां खेलीं, जिससे मेजबान टीम ने 20 ओवर में 202/3 का स्कोर बनाया। जवाब में कीवी टीम 149/8 तक ही पहुंच सकी। भारत ने 53 रन से मुकाबला जीत लिया। 2. 2020 से भारत का दबदबा, लगातार 5 सीरीज जीतीं भारत की तस्वीर 2020 में बदली। न्यूजीलैंड दौरे पर पांच मैचों की सीरीज में भारतीय टीम ने सभी मुकाबले जीते। इनमें दो मैच निर्धारित 20 ओवरों के बाद टाई हुए थे, लेकिन दोनों बार भारत ने सुपर ओवर में जीत दर्ज की। सुपर ओवर वह अतिरिक्त ओवर होता है, जिसमें टाई मैच का फैसला करने के लिए दोनों टीमों को एक-एक ओवर खेलने का मौका मिलता है। इसके बाद 2021 में न्यूजीलैंड भारत दौरे पर आया। भारतीय टीम ने तीनों मैच जीतकर सीरीज 3-0 से अपने नाम की। 2022-23 में भारत ने न्यूजीलैंड में फिर सीरीज जीती। पहले मैच में बारिश के कारण खेल नहीं हो सका। दूसरे में सूर्यकुमार यादव के नाबाद 111 रन की मदद से भारत ने 65 रन से जीत दर्ज की। तीसरा मैच बारिश से प्रभावित हुआ और डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) नियम के तहत टाई रहा। यह नियम बारिश के कारण ओवर कम होने पर दोनों टीमों के लक्ष्य की तुलना करने के लिए इस्तेमाल होता है। 3. न्यूजीलैंड की धरती पर पहली जीत 2019 में मिली न्यूजीलैंड की धरती पर पहली जीत के लिए टीम को फरवरी 2019 तक इंतजार करना पड़ा। ऑकलैंड में खेले गए दूसरे मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से हराया। हालांकि, तीन मैचों की सीरीज न्यूजीलैंड ने 2-1 से जीती थी। न्यूजीलैंड में खेलना आसान नहीं है। इसकी वजह वहां की परिस्थितियां हैं। कुछ मैदानों पर नई गेंद से तेज गेंदबाजों को हवा में स्विंग और पिच से उछाल मिल सकता है। मैदान की बाउंड्री भी हर दिशा में एक जैसी नहीं होती, इसलिए बल्लेबाजों को यह समझना होता है कि किस दिशा में शॉट खेलना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। 4. 2026 में वर्ल्ड कप फाइनल में हराया भारत ने इस साल टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भी न्यूजीलैंड को हराया था। 8 मार्च को अहमदाबाद में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 255/5 रन बनाए। संजू सैमसन ने 46 गेंदों पर 89 रन, ईशान किशन ने 25 गेंदों पर 54 रन और अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों पर 52 रन बनाए। भारत ने पारी के पहले छह ओवर यानी पावरप्ले में बिना विकेट गंवाए 92 रन जोड़ दिए। इसका मतलब था कि टीम ने शुरुआत से ही तेज रन बनाए और कोई विकेट भी नहीं खोया। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 159 रन पर ऑलआउट हो गई। जसप्रीत बुमराह ने 15 रन देकर चार विकेट लिए, जबकि अक्षर पटेल को तीन विकेट मिले। 5. श्रेयस की कप्तानी और भुवनेश्वर की वापसी पर नजर इस सीरीज में भारत की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे और न्यूजीलैंड की टीम मिचेल सैंटनर की अगुआई में उतरेगी। अय्यर के लिए यह सीरीज सिर्फ जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने का मौका नहीं है, बल्कि विदेशी परिस्थितियों में रणनीतिक फैसले लेने की परीक्षा भी होगी। कप्तान को मैच के दौरान कई फैसले लेने होते हैं। शुरुआत में किस बल्लेबाज को भेजना है, किस गेंदबाज को किस समय गेंद देनी है और आखिरी ओवरों में रन तेजी से बनाने के लिए कितने विकेट बचाने हैं। अय्यर की कप्तानी में भारत का विदेश में रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। टीम को आयरलैंड ने पहली बार हराया था। इसके बाद इंग्लैंड से भी टीम को हार का सामना करना पड़ा। भुवनेश्वर कुमार की वापसी भी भारत के लिए अहम होगी। उन्होंने आखिरी मैच नवंबर 2022 में खेला था। नई गेंद से गेंद को हवा में घुमाना उनकी खासियत रही है। Tue, 20 Oct 2026 23:00:00

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