Parivartini Ekadashi 2026: परिवर्तिनी एकादशी व्रत से मिलती है सभी पापों से मुक्ति
आज परिवर्तिनी एकादशी है, परिवर्तिनी एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना गया है। परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में परिवर्तिनी एकादशी विशेष है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में सोते हुए अपनी करवट बदलते हैं। इस एकादशी पर कुछ विशेष उपाय करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तो आइए हम आपको परिवर्तिनी एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।
जानें परिवर्तिनी एकादशी के बारे में
पंडितों के अनुसार वर्ष में 24 एकादशी आती हैं और हर महीने शुक्ल व कृष्ण पक्ष में एक-एक एकादशी पड़ती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त होता है। भाद्रपद मास की परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। 22 सितंबर दिन मंगलवार को परिवर्तनी एकादशी तिथि का व्रत किया जाएगा, हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर विधि विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है, जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है। पुराणों में बताया गया है कि परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने से 100 यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में विश्राम करते हैं। परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है।
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जानें परिवर्तिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे आरंभ होगी और 22 सितंबर की रात लगभग 9:43 बजे समाप्त होगी।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत में करें इन नियमों का पालन
पंडितों के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करें। एकादशी पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करें। बिना तुलसी के विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनें। व्रत के दिन क्रोध न करें और न ही किसी के लिए अपने मन में बुरे विचार लेकर आएं। एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित होता है। तो इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही जल चढ़ाएं। एकादशी के दिन तामसिक चीजों का सेवन न करें। (लहसुन-प्याज,मांसाहार, शराब) एकादशी के दिन बाल, दाढ़ी और नाखून काटने की मनाही होती है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत के पारण का समय
- एकादशी तिथि प्रारम्भ - सितंबर 21, 2026 को 08:00 पी एम बजे
- एकादशी तिथि समाप्त - सितंबर 22, 2026 को 09:43 पी एम बजे
- परिवर्तिनी एकादशी पारण तिथि- 23 सितंबर 2026
- पारण (व्रत खोलने का)समय - 06:27 ए एम से 08:53 ए एम
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 10:50 पी एम
परिवर्तिनी एकादशी के दिन विष्णु जी को लगाएं इन चीजों का भोग
पंडितों के अनुसार जगत के पालनहार भगवान विष्णु को पंचामृत अत्यंत प्रिय है इसलिए इसका भोग जरूर लगाएं। दूध, दही, चीनी, शहर और घी को मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है। एकादशी के दिन विष्णु जी को पंचमेवा भी जरूर चढ़ाएं। पंचमेवा में बादाम, काजू, छुआरा, किशमिश और मखाना आता है। श्री हरि विष्णु को पीला रंग बेहद पसंद है तो एकादशी के दिन बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, पीला पेड़ा या केसरिया रंग की खीर भी अर्पित करें। एकादशी के दिन चावल बनाना वर्जित है तो आप खीर साबूदाना की बना सकते हैं।परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को मौसमी फल जैसे- केला, सेब, अनार आदि फलों का भी भोग लगाएं।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचक
शास्त्रों में परिवर्तिनी एकादशी के विषय में राजा मांधाता और अनावृष्टि की कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार त्रेतायुग में मांधाता नाम के एक प्रतापी राजा थे। उनके राज्य में लगातार तीन वर्षों तक बारिश नहीं हुई, जिससे भयंकर सूखा पड़ गया और प्रजा त्रस्त हो गई। कारण जानने के लिए राजा जब वन गए, तो ऋषियों ने बताया कि राज्य में एक शूद्र द्वारा तपस्या करने के कारण यह दोष उत्पन्न हुआ है। राजा मांधाता ने निर्दोष और तपस्यारत व्यक्ति को दंड देने से मना कर दिया और इसका धार्मिक उपाय पूछा। तब ऋषियों ने उन्हें परिवार सहित भाद्रपद शुक्ल एकादशी (परिवर्तिनी एकादशी) का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने विधि-विधान से यह व्रत किया, जिससे राज्य में मूसलाधार बारिश हुई, खेत हरे-भरा हो गए और प्रजा फिर से सुखी हो गई।
परिवर्तिनी एकादशी में दशमी से पहलें रखें ये सावधानी
शास्त्रों के अनुसार नारद पुराण में एकादशी व्रत के नियम अनुसार तिथि की शुरुआत होने के बाद इनमें मसूर आदि दालें, दूसरे के घर भोजन, और रात्रि भोजन से बचने की बात कही गई है। इसलिए अगर आप शास्त्रीय नियमों के अनुसार व्रत करना चाहते हैं तो 21 सितंबर को दिन में ही सात्त्विक और हल्का भोजन कर लेना बेहतर माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत में ये खाएं, रहेंगे सेहतमंद
पंडितों के अनुसार एकादशी व्रत को लेकर जलाहार, फलाहार, क्षीरभोजी और नक्तभोजी जैसी अलग-अलग व्रत पद्धतियां बताई गई है। आप अपनी क्षमता अनुसार ये व्रत कर सकते हैं। साबूदाना, सिंघाड़ा, शकरकंद, आलू और मूंगफली जैसी चीजें एकादशी व्रत में खा सकते हैं। एकादशी व्रत में सिर्फ अन्न का त्याग ही नहीं बल्कि झूठ, छल-कपट, क्रोध और कठोर वाणी से बचने की सलाह भी दी जाती है। व्रत के दौरान संयम रखें, इंद्रियों पर काबू रखना भी जरुरी है।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से भक्तों को श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। भक्त भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, फल और पंचामृत अर्पित कर पूजा करते हैं। एकादशी का व्रत मन और इंद्रियों पर संयम रखने तथा भगवान के प्रति भक्ति बढ़ाने का अवसर माना जाता है। परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु के वामन स्वरूप और राजा बलि से जुड़ी कथा के कारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं।
- प्रज्ञा पाण्डेय
UN में Pakistan की जबरदस्त फजीहत, Terrorism पर पूछा गया सवाल तो भाग खड़े हुए Shehbaz Sharif, Jaishankar ने पाकिस्तान को चारों खाने किया चित
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आतंकवाद को लेकर सीधे सवाल किए गए, लेकिन उन्होंने जवाब देने की बजाय वहां से भाग जाना ही बेहतर समझा। इसके एक दिन बाद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सामने जब पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, तो जयशंकर ने पलटकर ऐसा करारा जवाब दिया कि सवाल पूछने वाला ही कठघरे में खड़ा हो गया। जयशंकर ने दो टूक कहा, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” उधर, जयशंकर के बयान से गर्म हुए माहौल के बीच ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान पर एक और करारा हमला कर डाला।
हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को एक ‘‘कठपुतली शासन’’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में उसके ‘‘झूठ’’ और ‘‘छल’’ पर तीखा प्रहार किया तथा चेतावनी दी कि इस्लामाबाद की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मामले को उठाया और 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ को दिया। शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने शुक्रवार रात ‘जवाब के अपने अधिकार’ का इस्तेमाल किया।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, ‘‘हमने एक ऐसे शासन से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर कुछ पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी को अपने ही लोगों से बचाने के लिए इसी समय किलेबंद किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन है। उसकी कठपुतलियां आती-जाती रह सकती हैं, लेकिन इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन करता है। पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संविधान संशोधन और उसके असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से जाहिर होती है।’’ गहलोत ने पिछले साल नवंबर में शहबाज शरीफ सरकार द्वारा पारित उस 27वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए यह बात की जिसके तहत पाकिस्तान के ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट दी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में देखेगी, न कि उस रूप में जैसे उसके प्रतिनिधि झूठे तरीके से पेश करते हैं। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।’’ हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में ट्रंप को उनके ‘‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’’ के लिए धन्यवाद देते हुए कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाई। शहबाज शरीफ ने करीब 23 मिनट के अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है कि दक्षिण एशिया फिर कभी 2025 के संघर्ष जैसी स्थिति में न पहुंचे।
उधर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को याद दिलाया कि शहबाज शरीफ ने ये ‘‘विचित्र टिप्पणियां’’ ऐसे समय में की हैं जब महज दो सप्ताह पहले न्यूयॉर्क और दुनिया ने 11 सितंबर के भीषण आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाई थी। गहलोत ने कहा, ‘‘इस संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि उस हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था।’’ गहलोत ने शरीफ द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर की ही बात करनी है तो आइए, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान देते हैं। रावलाकोट के लोगों से बेमतलब की उन हत्याओं, बर्बर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए जिनका वे लंबे समय से सामना कर रहे हैं।’’
हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विवादित सीट को लेकर पिछले कई महीनों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई भी की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद की पाकिस्तान की ‘‘लंबे समय से बरकरार नीति’’ की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि ‘‘आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठेंगे, जिनकी बुनियाद मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ द्वारा व्यक्त किए गए विचार ‘‘ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रहा है।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता पर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी व्यवस्था का एक प्रमुख आधार ईशनिंदा कानून हैं। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी दिखावटी खोखली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती।’’
दूसरी ओर, जयशंकर के बयान की बात करें तो आपको बता दें कि मामला शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उस समय गरमा गया, जब जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यान्ती समुद्री परिवहन और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ की जानकारी दे रहे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से सवाल किया कि भारत पाकिस्तान में कथित आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगा? सवाल पूरा होते ही जयशंकर ने पलटवार किया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी ने भी साफ कर दिया कि जवाब सुना जा चुका है और वह बिल्कुल स्पष्ट है।
उधर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में बड़ी बड़ी बातें करने वाले शहबाज शरीफ से आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल हुआ तो वह भाग खड़े हुए। हम आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकारों ने उनसे सीधे पूछा— “प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” इस पर शहबाज शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में बाहर निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस सवाल पर भी उन्होंने चुप्पी साधी और भाग खड़े हुए। बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान भारत पर आतंकवाद के आरोप लगाने पहुंचा, लेकिन सवाल जब उसके अपने दरवाजे पर पहुंचा तो जवाब गायब हो गया।
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