"यह पाकिस्तान नहीं, हिंदुस्तान है...", कश्मीर नेशनल हाईवे पर सिर्फ उर्दू में लिखे होर्डिंग्स देख भड़का पर्यटक
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कश्मीर की यात्रा पर गया एक शख्स वहां के नेशनल हाईवे पर लगे साइन बोर्ड्स को लेकर अपनी शिकायत दर्ज करा रहा है. वीडियो में युवक श्रीनगर से आगे पहलगाम के पास एक टोल टैक्स पर खड़ा है और पीछे लगे होर्डिंग्स की तरफ इशारा करते हुए अपनी बात रख रहा है.
उर्दू से परहेज नहीं
युवक का कहना है कि वह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) पर सफर कर रहा है, लेकिन वहां लगे बोर्ड्स पर सब कुछ उर्दू में लिखा है. युवक ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "हमें कैसे पता चलेगा कि क्या लिखा है? हम सिर्फ सिंबल देखकर अंदाजा लगा सकते हैं, लेकिन भाषा समझ नहीं आती. यह हिंदुस्तान है, यहां बोर्ड्स पर हिंदी और अंग्रेजी भी होनी चाहिए ताकि बाहर से आने वाले पर्यटकों को दिक्कत न हो."
नितिन गडकरी तक बात पहुंचाने की अपील
वीडियो में युवक आगे कहता है कि उसे उर्दू भाषा से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन नेशनल हाईवे पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की भाषाओं (हिंदी-अंग्रेजी) का होना जरूरी है. उसने यह भी कहा, "यह पाकिस्तान नहीं है." युवक ने सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि इस वीडियो को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तक पहुंचाया जाए, ताकि इस व्यवस्था में सुधार हो सके.
सोशल मीडिया पर लोगों की राय
यह वीडियो इंटरनेट पर काफी शेयर किया जा रहा है और इस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. ज्यादातर लोगों का मानना है कि पर्यटक स्थलों और नेशनल हाईवे पर भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सबके समझ में आए. लोगों का कहना है कि स्थानीय भाषा (उर्दू) के साथ हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल होने से यात्रियों का सफर आसान और सुरक्षित होगा.
Hlo @nitin_gadkari @NHAI_Official Why the signboards in Kashmir are only in Urdu?? Where are Hindi & English signboards?
— Hindutva Don (@HindutvaDon_) February 18, 2026
Is Kashmir in Pakistan? pic.twitter.com/VT4Bc92IMp
वीडियो की सच्चाई क्या है?
हालांकि, यह अभी साफ नहीं हो पाया है कि यह वीडियो किस तारीख का है. न्यूज नेशन इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है.
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शैक्षणिक संस्थान एआई डिवाइस से होंगे लैस, समिट से हुआ 200 अरब डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को घोषणा की कि देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को एआई तकनीक आधारित उपकरणों से लैस किया जाएगा। इससे छात्रों को नई तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी और वे अपने समाधान विकसित कर सकेंगे।
इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान योरस्टोरी की संस्थापक श्रद्धा शर्मा से बातचीत में वैष्णव ने इस वैश्विक सम्मेलन से मिलने वाले अवसरों, निवेश और नवाचार की संभावनाओं पर विस्तार से बात की।
एआई इम्पैक्ट समिट को दुनिया के प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मंचों में से एक माना जाता है, जहां नैतिक एआई, नियामक ढांचे और उन्नत तकनीकों की भूमिका पर व्यापक चर्चा हो रही है, जो उद्योगों और सार्वजनिक सेवाओं को बदल रही हैं।
पांच दिवसीय इस समिट में 110 से अधिक देश और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन भाग ले रहे हैं, जिसमें लगभग 20 राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख और करीब 45 मंत्री शामिल हैं। यह एआई शासन और सहयोग पर केंद्रित सबसे बड़े आयोजनों में से एक है।
भारत की प्रगति पर बात करते हुए वैष्णव ने कहा, देश एआई के सभी पांच स्तरों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों, वेंचर कैपिटल फर्मों और युवाओं में इस नई तकनीक को लेकर जबरदस्त उत्साह है।
उन्होंने बताया कि समिट के दौरान कई बड़े समाधान सामने आए हैं। उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि भारत अगला हेल्थकेयर मॉडल और अगला कृषि उत्पादकता मॉडल दुनिया के सामने लाएगा, जो वैश्विक स्तर पर हमारा योगदान होगा।
मंत्री ने बताया कि इस समिट के जरिए बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में लगभग 200 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित हुआ है।
इसके अलावा, डीप-टेक और एप्लीकेशन लेयर में करीब 17 अरब डॉलर का निवेश प्रतिबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में वेंचर कैपिटल फर्में खास रुचि दिखा रही हैं।
उन्होंने कहा, दुनिया को भारत की क्षमता पर भरोसा है कि हम एआई आधारित समाधान विकसित कर सकते हैं, नए मॉडल बना सकते हैं और आबादी के स्तर पर इनोवेशन कर सकते हैं।
युवा डेवलपर्स और उद्यमियों को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को पांचवीं औद्योगिक क्रांति के लिए तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है, जिसे समिट के बाद लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, हम एआई मिशन के अगले संस्करण पर काम करेंगे, जिसके तहत छात्रों को एआई समाधान और एआई आधारित उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे तकनीक को सीख सकें और उससे परिचित हो सकें। देश में एआई का व्यापक प्रसार होने वाला है।
स्टार्टअप्स को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार उनका पूरा समर्थन करेगी। उन्होंने बताया कि विश्वसनीय वेंचर कैपिटल फर्मों द्वारा 17 अरब डॉलर की फंडिंग का वादा किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। एक दशक पहले जहां केवल 400-500 स्टार्टअप थे, आज उनकी संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है। दुनिया हमारे लोगों की उद्यमशील ऊर्जा को पहचान रही है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर वैष्णव ने कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग 50 डीप-टेक स्टार्टअप उभर सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही सेमीकंडक्टर उत्पादन की व्यावसायिक शुरुआत होने वाली है। उन्होंने कहा, बहुत जल्द 10 इकाइयों में से एक से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा। इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द की जाएगी।
एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक नेता, नीति-निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा कर रहे हैं, जो आर्थिक विकास, बेहतर शासन और सामाजिक प्रगति को गति दे सकती है।
इस आयोजन का उद्देश्य एआई पहल को भारत की सभ्यतागत सोच सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के साथ जोड़ना है और एआई फॉर ह्यूमैनिटी के सिद्धांत को आगे बढ़ाना है।
इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 इस शृंखला का चौथा संस्करण है। इससे पहले यह सम्मेलन 2023 में यूनाइटेड किंगडम, 2024 में दक्षिण कोरिया और 2025 में फ्रांस में आयोजित किया गया था।
यह मंच एआई के नैतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करने के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, व्यापार, संस्कृति, पर्यटन और समुद्री सहयोग में साझेदारी को भी मजबूत करता है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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